34 लाख से ज्यादा महिलाओं की आबादी वाले प्रदेश में शक्ति ऐप पर सिर्फ दो शिकायतें
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महिला सुरक्षा को लेकर लांच की गई शक्ति ऐप पर पांच माह में महज दो ही शिकायतें मिली हैं। अधिकतर लोगों की कॉल्स यही देखने के लिए आईं कि यह ऐप काम कर रही है या नहीं। 34 लाख से ज्यादा महिलाओं की आबादी वाले प्रदेश में अभी तक इस ऐप को पांच हजार ने डाउनलोड किया है।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने 26 जनवरी को शक्ति ऐप लांच की है। पांच महीने में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है, जिसमें ऐप के जरिये आपात स्थिति में किसी महिला या युवती को रेस्क्यू किया गया हो।
तो शायद नहीं होती पालमपुर जैसी गैंगरेप की घटना
उधर, अधिकतर लोगों को इसकी सही जानकारी भी नहीं है। जानकारी होती तो शायद पालमपुर जैसी गैंगरेप जैसी घटना नहीं होती। प्रदेश में महिलाओं की संख्या 34 लाख से अधिक है जबकि राजधानी शिमला में ही करीब 76 हजार महिलाएं हैं।
एसपी लॉ एंड ऑर्डर डॉ. खुशहाल शर्मा ने बताया कि एक माह में गूगल प्ले स्टोर से शक्ति ऐप डाउनलोड करने का आंकड़ा तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सभी जिलों के एसपी को पत्र लिखा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 13 कंट्रोल रूम बनाए गए हैं।
इनमें शिमला, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, किन्नौर, सोलन, सिरमौर, बद्दी, हमीरपुर, बिलासपुर, ऊना, चंबा, कांगड़ा, मंडी शामिल हैं।
ज्यादातर आईं टेस्ट कॉल्स
डॉ. खुशहाल शर्मा ने बताया कि ऐप के जरिये पांच माह में सिर्फ दो शिकायतें आई हैं। इनमें पहली शिकायत एक युवती ने की थी। वह एक युवक के साथ लिव इन रिलेशनशिप में थी। युवक शादी करने से इनकार कर रहा था। पुलिस ने दोनों में सुलह करवा दी थी।
दूसरी शिकायत एक लड़के ने की थी। उसे मोबाइल पर कोई शख्स बार-बार तंग कर रहा था। उन्होंने बताया कि बाकी सभी टेस्ट कॉल्स थीं।
ऐसे काम करती है ऐप
शक्ति ऐप राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) ने तैयार की है। इसके लिए इंटरनेट की आवश्यकता नहीं है। ऐप आपात स्थिति में निकटतम पुलिस कंट्रोल रूम में 20 सेकेंड में संदेश भेजती है। इसमें ऑटो ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग होगी।
ऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करने के बाद सबसे पहला ऑप्शन अपना जिला भरना होगा। उसके बाद नाम, अगले कॉलम में आपातकालीन संदेश लिखना होगा। इसके बाद तीन करीबी लोगों के नंबर एड करने होंगे। इसमें एक नंबर पुलिस स्टेशन का भी दर्ज कर सकते हैं।
आपात स्थिति में बटन दबाते ही सबसे पहले पुलिस कंट्रोल रूम और जिन लोगों के नंबर एड किए हैं, उन्हें संदेश चला जाएगा। कंट्रोल रूम में जीपीएस लोकेशन पता चलने पर नजदीक के पुलिस स्टेशन से पुलिस मौके पर पहुंच जाएगी।