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राजनीति: हिमाचल की तीन महिलाओं ने ही पार की संसद की दहलीज

Tue, 12 Oct 2021 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, मंडी
अमर उजाला नेटवर्क, मंडी Published by: Krishan Singh Updated Tue, 12 Oct 2021 05:00 AM IST
सार

संसद की दहलीज तक पहुंचने वाली तीनों महिलाएं राजपरिवार का हिस्सा रही हैं। कांग्रेस टिकट से चुनाव लड़ी हैं। प्रदेश में पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर रही है। 26.92 लाख पुरुष मतदाताओं के मुकाबले 26.33 लाख महिला मतदाता हैं। महिलाएं संसदीय चुनावों में अपनी छाप छोड़ने में विफल रही हैं। इसका कारण है कि राजनीतिक दलों ने उन्हें मैदान में उतारना ज्यादा पसंद नहीं किया। 

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Only three women of Himachal crossed the threshold of Parliament
चुनाव(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में 1952 के पहले लोकसभा चुनावों के बाद वर्तमान तक महज तीन महिलाएं ही लोकसभा सांसद बन सकी हैं। संसद की दहलीज तक पहुंचने वाली तीनों महिलाएं राजपरिवार का हिस्सा रही हैं। कांग्रेस टिकट से चुनाव लड़ी हैं। प्रदेश में पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर रही है। 26.92 लाख पुरुष मतदाताओं के मुकाबले 26.33 लाख महिला मतदाता हैं। महिलाएं संसदीय चुनावों में अपनी छाप छोड़ने में विफल रही हैं। इसका कारण है कि राजनीतिक दलों ने उन्हें मैदान में उतारना ज्यादा पसंद नहीं किया। राजनीतिक परिवारों से आने वाली महिलाओं को ही मैदान में उतारा गया और चुनाव भी जीता। अब 2021 के उपचुनाव में कांग्रेस ने छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह के निधन के बाद उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह को मैदान में उतारकर सहानुभूति के साथ महिला कार्ड चला है।

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इसके क्या नतीजे होंगे, यह देखना दिलचस्प होगा। हिमाचल में लोकसभा चुनावों के इतिहास की बात करें तो संसद की दहलीज तक पहुंचने का श्रेय सबसे पहले रानी अमृतकौर के नाम रहा है। 1952 में वह मंडी-महासू लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद तक पहुंचीं। चंद्रेश कुमारी 1984 में कांगड़ा लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुनी गईं। वह जोधपुर राजघराने से संबंध रखती हैं। प्रतिभा सिंह ने 2004 में 14वीं लोकसभा के लिए मंडी संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा तथा विजयी होकर संसद में पहुंचीं।
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उन्होंने 2013 के उपचुनाव में मंडी संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा तथा भारी वोटों से जीत हासिल की। हालांकि, राज्यसभा तक पहुंचीं महिलाओं की संख्या इससे कुछ अधिक है। राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाली कांगड़ा जिले की विप्लव ठाकुर 2006-12 तक राज्यसभा सांसद रहीं। पटियाला राजघराने से ताल्लुक रखने वाली महेंद्र कौर भी राज्यसभा सांसद रही हैं। वह सोलन जिले के कंडाघाट की रहने वाली थीं। 1977 में जनता पार्टी के शासनकाल के दौरान वह राज्यसभा सांसद चुनी गई थीं। प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष रहीं विमला कश्यप को भी राज्यसभा की सदस्य बनने का सौभाग्य मिला है। वह भाजपा सरकार के समय वर्ष 2010 में राज्यसभा की संसद चुनी गई थीं। वर्तमान में इंदु गोस्वामी राज्यसभा में हैं।

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