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आपके लाडले को पांच बीमारियों से बचाएगा एक टीका

Wed, 02 Sep 2015 10:40 AM IST
Updated Wed, 02 Sep 2015 10:40 AM IST
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only one injection will save your baby from five major diseases.

पांच जानलेवा बीमारियों से बच्चों को बचाने के लिए पूर्व में पांच अलग-अलग टीके लगाए जाते थे, लेकिन अब पेंटावैलेंट का केवल एक टीका ही लगेगा। मंगलवार को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल शिमला में पेंटावैलेंट वैक्सीन को लांच किया।

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बच्चों को अब डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस (डीपीटी), हेपेटाइटिस बी (एचबी) और हीमोफिलिक इंफ्लुंजा वायरस (एचआइवी) के स्थान पर सिर्फ पेंटावैलेंट वैक्सीन का एक टीका लगेगा। यह टीका बच्चों के जन्म के डेढ़ माह बाद लगेगा। बाजार में पेंटावैलेंट वैक्सीन की कीमत लगभग 1200 रुपये है। महंगा होने के कारण अभी तक निजी अस्पतालों में ही यह लगता था।
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यह वैक्सीन अस्पताल में मुफ्त लगेगा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने कहा कि टीकाकरण से हर साल राज्य के लगभग 1.08 लाख बच्चों को लाभ होगा। चिकित्सा अधिकारियों, आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
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महंगी नहीं बिकेंगी 18 तरह की दवाएं

only one injection will save your baby from five major diseases.

वहीं, देश भर में एंटीबायोटिक, ब्लड शूगर, बीपी, बुखार, स्किन और ऑर्थो से संबंधित 18 तरह की जेनेरिक और नॉन जेनेरिक दवाएं अब मनमर्जी के दामों पर नहीं बिकेंगी। दवा तैयार करने वाली ऐसी 202 कंपनियों पर शिकंजा कस दिया गया है। राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने इन दवाओं के ड्रग प्राइज कंट्रोल ऑर्डर (डीपीसीओ) सीलिंग रेट/ खुदरा मूल्य तय कर दिए हैं।

बीते 24 अगस्त को इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। कंपनियों को तैयार दवाओं को निर्धारित खुदरा मूल्य के तहत मार्केट में उतारने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की जाएगी। अभी मार्केट स्टॉक पर यह संशोधन लागू नहीं होगा, लेकिन फ्रेश प्रोडक्शन में यह तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

इन दवाओं का काफी बड़े पैमाने में जिला सोलन और सिरमौर के औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन हो रहा है। ड्रग कंट्रोलर नवनीत मरवाह के मुताबिक नियमानुसार संबंधित कंपनियों को एनपीपीए के निर्देश जारी होते हैं।

ड्रग प्राइज कंट्रोल ऑर्डर 2013 के तहत करीब 628 दवाओं के सीलिंग रेट तय होने हैं जिसमें अभी तक 506 दवाओं की कीमतें तय कर दी हैं। सरकार ने इन कीमतों को अपने नियंत्रण में लिया है ताकि कंपनियां मनमर्जी से कीमतों के निर्धारण न कर सकें।

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