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इस स्कूल में दसवीं की परीक्षा में सिर्फ चार विद्यार्थी ही हुए पास

Mon, 16 May 2016 01:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रामपुर बुशहर
ब्यूरो/अमर उजाला, रामपुर बुशहर Updated Mon, 16 May 2016 01:04 PM IST
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only four student passed in matric exam of Bahali school rampur himachal pradesh
वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल बाहली के चार ही छात्र पास हो पाए हैं।

एक ओर प्रदेश सरकार जहां लोगों से बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की बात कर रही है, वहीं इन स्कूलों के वार्षिक परिणाम को देखकर अभिभावक भी परेशान हैं। सरकार स्कूलों का परीक्षा परिणाम निजी स्कूलों की अपेक्षा काफी दयनीय है। प्रत्येक बच्चे के अभिभावक अपने बच्चों को अच्छी व गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा दिलाने की चाह रखते हैं।

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ऐसे में कोई अपने बच्चे को सरकारी स्कूल में क्यों भेजेगा। यही कारण है कि दिन प्रतिदिन सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम होती जा रही है। हाल ही प्रदेश शिक्षा बोर्ड के दसवीं कक्षा के परिणाम घोषित हुए हैं। इन परिणामों ने तो सरकारी स्कूलों की पोल खोल कर रख दी है।
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रामपुर उपमंडल के वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल बाहली 16 विद्यार्थियों ने दसवीं कक्षा की परीक्षाएं दी थी। इनमें से चार ही छात्र पास हो पाए अन्य सभी फेल हो गए हैं। वर्तमान समय में बाहली स्कूल में छठीं से लेकर दसवीं कक्षा में 92 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बीते एक वर्ष से स्कूल में पीजीटी आर्ट्स के अध्यापक का पद रिक्त पड़ा है और जमा एक और दो के भी कई शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं।
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पंचायत प्रधान ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और मुख्यमंत्री से ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने की मांग की है। प्रधान वीरेंद्र भलूनी ने कहा कि शिक्षा विभाग के स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को अच्छा खासा वेतन दिया जा रहा है जबकि निजी क्षेत्र

के स्कूलों में शिक्षकों को नाममात्र वेतन मिलता है। इसके बाद भी निजी स्कूलों का प्रदर्शन सरकारी स्कूलों की अपेक्षा काफी बेहतर है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों के शिक्षक पढ़ाने में  अनियमितताएं बरत रहे हैं और आए दिन स्कूल से नदारद रहते हैं।

भारी भरकम वेतन, फिर भी परिणाम खराब
बात करें वेतनमान की तो सरकारी स्कूलों के शिक्षक 25 से लेकर 60 हजार रुपये तक प्रतिमाह ले रहे हैं। निजी स्कूलों के शिक्षकों को मात्र पांच से 10 हजार रुपये वेतन दिया जा रहा है। इस हिसाब से सरकारी स्कूलों में बच्चों को अधिक गुणात्मक शिक्षा मिलनी

चाहिए थी और उनके परिणाम भी बेहतर होने चाहिए थे। लेकिन सरकारी स्कूल का परिणाम काफी खराब है। इसके निजी स्कूलों में अपनाए जाने वाली शिक्षा प्रणाली सरकारी स्कूलों की अपेक्षा कहीं अधिक बेहतर है।

आम सभा से दो शिक्षक नदारद

पंचायत प्रधान वीरेंद्र भलूनी ने बताया कि परीक्षा परिणामों के बाद स्कूल में बैठक आयोजित की गई। बच्चों के अभिभावक बैठक में पहुंचे। लेकिन पता होने के बाद भी स्कूल के दो शिक्षक इससे नदारद रहे।


प्रधानाचार्य से जब उनकी मौजूदगी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे हाफ डे लीव लेकर चले गए हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिक्षक विद्यार्थियों की शिक्षा को लेकर कितने गंभीर हैं।

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