फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Online studies spoiled the habit: Children are becoming irritable due to non-availability of mobile phones

ऑनलाइन पढ़ाई ने बिगाड़ी आदत: मोबाइल फोन न मिलने से चिड़चिड़े हो रहे बच्चे

Sun, 09 Jan 2022 02:16 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Published by: Krishan Singh Updated Sun, 09 Jan 2022 02:16 PM IST
सार

मनोचिकित्सकों के अनुसार जागरूक अभिभावक तो काउंसलिंग करवा रहे हैं, लेकिन कुछ इन लक्षणों को अनदेखा कर रहे हैं। स्कूल बंद होने से ऑनलाइन पढ़ाई का फायदा हुआ था, लेकिन अब मोबाइल की लत नुकसानदायक है। इससे आंखों पर बुरा असर तो पड़ ही रहा है, मानसिक विकार भी आ रहे हैं। 

विज्ञापन
Online studies spoiled the habit: Children are becoming irritable due to non-availability of mobile phones
मोबाइल फोन(सांकेतिक)

विस्तार

कोरोना महामारी के दौर में ऑनलाइन पढ़ाई ने बच्चों को मोबाइल फोन का गुलाम बना दिया। अब बच्चों की आदत इतनी बिगड़ गई है कि कुछ देर के लिए उन्हें मोबाइल फोन न मिले तो उनमें चिड़चिड़ापन, बेचैनी, घबराहट, गुस्सा, व्यवहार में आक्रामकता, बातचीत ही बंद कर देना या खाना छोड़ देने जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। स्मार्ट फोन के हाथ में आते ही उनका मूड ठीक हो रहा है। इससे परेशान कई अभिभावक बच्चों को लेकर नेरचौक मेडिकल कॉलेज में काउंसलिंग के लिए पहुंच रहे हैं। स्कूल से आते ही बच्चे मोबाइल फोन में ही लगे रहते हैं। इससे आंखों पर बुरा असर तो पड़ ही रहा है, मानसिक विकार भी आ रहे हैं। मनोचिकित्सकों के अनुसार जागरूक अभिभावक तो काउंसलिंग करवा रहे हैं, लेकिन कुछ इन लक्षणों को अनदेखा कर रहे हैं। स्कूल बंद होने से ऑनलाइन पढ़ाई का फायदा हुआ था, लेकिन अब मोबाइल की लत नुकसानदायक है। 

विज्ञापन

फोन लेने के लिए बेटी बनाती बहाने

मां-बाप अच्छे ओहदे पर हैं। उनकी इकलौती बेटी निजी स्कूल में नौवीं की छात्रा है। मेडिकल कॉलेज नेरचौक में काउंसलिंग के लिए पहुंचे अभिभावकों ने बताया कि स्कूल जाने से पहले और आने के बाद कभी पढ़ाई तो कभी किसी अन्य बहाने से उनकी बेटी फोन पर लगी रहती है। टोकने पर चिड़चिड़ेपन के साथ उसका व्यवहार आक्रामक हो जाता है। 

विज्ञापन

फोन न दें तो बेटा छोड़ देता खाना

एक शिक्षक दंपती भी अपने बेटे की मोबाइल की लत से परेशान है। इन्होंने नेरचौक मेडिकल कॉलेज में काउंसलिंग ली है। अभिभावकों के अनुसार उनका बेटा आठवीं में पढ़ता है। मोबाइल उससे छूट नहीं रहा। व्हाट्सएप में चेटिंग, इंस्टाग्राम और गेमिंग के लिए फोन किसी न किसी बहाने ले लेता है। फोन न दो तो खाना छोड़ देता है और चुप्पी साध लेता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन


मोबाइल ज्यादा इस्तेमाल करने से बच्चों में डिप्रेशन, अनिद्रा और चिड़चिड़ापन जैसी मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं। बच्चों में सिर और आंखों में दर्द, भूख न लगना, आंखों की रोशनी कम होना, गर्दन में दर्द जैसी शारीरिक बीमारियां हो रहीं हैं। इसलिए बच्चों को फोन से दूर रखें। -डॉ. देवेंद्र शर्मा, सीएमओ मंडी

अभिभावक बच्चों के सामने मोबाइल इस्तेमाल कम करें : डॉ. रमेश

नेरचौक मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग के एचओडी डॉ. रमेश कुमार का कहना है कि मोबाइल का कम इस्तेमाल ठीक है, अन्यथा यह लत है। मूड ठीक करने के लिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल भी ऐसा ही है, जैसे ड्रग्स व्यवहार को प्रभावित करती है। बच्चों का स्क्रीन समय घटाएं और अभिभावक रोल मॉडल हैं, इसलिए वे भी मोबाइल का कम ही इस्तेमाल करें।
 

अभिभावक यह करें

  1. - अभिभावक बच्चे के साथ अधिक समय बिताएं
  2. - खाली समय में बच्चों से घर के कामों में सहयोग लें
  3. - बच्चे को आउटडोर गेम्स, पेंटिंग, डांस, म्यूजिक और अन्य कक्षाओं में भेजें
  4. यह है स्क्रीन टाइम : अकादमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार
  5. -18 महीने से कम उम्र के बच्चे स्क्रीन का इस्तेमाल न करें
  6. -18 से 24 महीने के बच्चे को माता-पिता उच्च गुणवत्ता वाले प्रोग्राम दिखाएं
  7. - 2 से 5 साल के बच्चे एक घंटे से ज्यादा स्क्रीन का इस्तेमाल न करें
  8. - छह साल और उससे ज्यादा उम्र के बच्चों के स्क्रीन देखने का समय दो घंटे तक सीमित हो
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed