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Shimla News: एनईपी के पहले बैच का ऑनलाइन परीक्षा रिकॉर्ड होगा तैयार
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एचपीयू ने विषय चयन का विवरण दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की, विद्यार्थियों को 31 अगस्त तक भरना होगा फॉर्म
विद्यार्थी का अब विषयवार रिकॉर्ड होगा तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों का शैक्षणिक रिकॉर्ड अब नई व्यवस्था के अनुसार तैयार होगा।
विश्वविद्यालय ने प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों से विषय चयन और अन्य जरूरी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करवाने को कहा है। इससे एनईपी के तहत शुरू हुई अकादमिक व्यवस्था को परीक्षा प्रणाली से जोड़ा जाएगा। परीक्षा नियंत्रक श्याम लाल कौशल ने सात अगस्त को परिपत्र जारी कर प्रक्रिया शुरू की। संबंधित कॉलेजों से आरएमई फॉर्म स्वीकृत होने वाले विद्यार्थियों को छात्र पोर्टल पर अपने पुराने उपयोगकर्ता नाम और पासवर्ड से लॉग्नि करना होगा। इसके बाद प्री-एग्जामिनेशन फॉर्म में मांगी जानकारी और चुने गए विषय दर्ज करने होंगे। एनईपी में विषय चयन की नई व्यवस्था होने के कारण विश्वविद्यालय को प्रत्येक विद्यार्थी का विषयवार रिकॉर्ड तैयार करना होगा। यही जानकारी आगे परीक्षा संबंधी प्रक्रिया में इस्तेमाल होगी। इससे विषय आवंटन और परीक्षा रिकॉर्ड में स्पष्टता बनाए रखने का प्रयास होगा।
संबंधित कॉलेजों को विद्यार्थियों की ओर से दर्ज जानकारी और विषय चयन का सत्यापन करना होगा। इससे विश्वविद्यालय और कॉलेज के रिकॉर्ड में अंतर की संभावना कम होगी। यह प्रक्रिया विश्वविद्यालय की एनईपी तैयारी की अगली कड़ी है। इससे पहले संबद्ध कॉलेजों के साथ साझा शैक्षणिक कैलेंडर तैयार करने पर चर्चा शुरू की थी। अब विषय चयन का ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार होने से नई व्यवस्था परीक्षा स्तर पर लागू होने लगी है। विश्वविद्यालय ने 31 अगस्त अंतिम तिथि तय की है।
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12 से अधिक पाठ्यक्रमों दायरे में
नई प्रक्रिया केवल सामान्य बीए, बीएससी और बीकॉम पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालय ने कई व्यावसायिक और विशेष पाठ्यक्रमों को भी इसके दायरे में रखा है। इनमें एईडीपी, ओटी शास्त्री, बीएफए, बीपीए, बीबीए, बीसीए, बीएचएम और बीटीटीएम शामिल हैं। इसके अलावा बीएससी डाटा साइंस और बीएससी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विद्यार्थी भी प्रक्रिया में शामिल होंगे।
गलती सुधारने पर लग सकता है शुल्क
विद्यार्थियों को फॉर्म भरते समय अपने विषय चयन और अन्य विवरण की जांच करनी होगी। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि के बाद सुधार के लिए शुल्क लागू हो सकता है। इसलिए विद्यार्थियों को अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना विवरण दर्ज कराने और उसकी शुद्धता जांचने की जरूरत होगी। कॉलेज स्तर पर भी दर्ज जानकारी का सत्यापन किया जाएगा। इससे गलत विषय चयन या विवरण में त्रुटि को समय रहते पकड़ने का अवसर मिलेगा। 31 अगस्त के बाद प्रक्रिया में बदलाव करने वाले विद्यार्थियों पर विश्वविद्यालय के निर्धारित नियमों के अनुसार शुल्क लागू किया जा सकता है।
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विद्यार्थी का अब विषयवार रिकॉर्ड होगा तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों का शैक्षणिक रिकॉर्ड अब नई व्यवस्था के अनुसार तैयार होगा।
विश्वविद्यालय ने प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों से विषय चयन और अन्य जरूरी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करवाने को कहा है। इससे एनईपी के तहत शुरू हुई अकादमिक व्यवस्था को परीक्षा प्रणाली से जोड़ा जाएगा। परीक्षा नियंत्रक श्याम लाल कौशल ने सात अगस्त को परिपत्र जारी कर प्रक्रिया शुरू की। संबंधित कॉलेजों से आरएमई फॉर्म स्वीकृत होने वाले विद्यार्थियों को छात्र पोर्टल पर अपने पुराने उपयोगकर्ता नाम और पासवर्ड से लॉग्नि करना होगा। इसके बाद प्री-एग्जामिनेशन फॉर्म में मांगी जानकारी और चुने गए विषय दर्ज करने होंगे। एनईपी में विषय चयन की नई व्यवस्था होने के कारण विश्वविद्यालय को प्रत्येक विद्यार्थी का विषयवार रिकॉर्ड तैयार करना होगा। यही जानकारी आगे परीक्षा संबंधी प्रक्रिया में इस्तेमाल होगी। इससे विषय आवंटन और परीक्षा रिकॉर्ड में स्पष्टता बनाए रखने का प्रयास होगा।
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संबंधित कॉलेजों को विद्यार्थियों की ओर से दर्ज जानकारी और विषय चयन का सत्यापन करना होगा। इससे विश्वविद्यालय और कॉलेज के रिकॉर्ड में अंतर की संभावना कम होगी। यह प्रक्रिया विश्वविद्यालय की एनईपी तैयारी की अगली कड़ी है। इससे पहले संबद्ध कॉलेजों के साथ साझा शैक्षणिक कैलेंडर तैयार करने पर चर्चा शुरू की थी। अब विषय चयन का ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार होने से नई व्यवस्था परीक्षा स्तर पर लागू होने लगी है। विश्वविद्यालय ने 31 अगस्त अंतिम तिथि तय की है।
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12 से अधिक पाठ्यक्रमों दायरे में
नई प्रक्रिया केवल सामान्य बीए, बीएससी और बीकॉम पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालय ने कई व्यावसायिक और विशेष पाठ्यक्रमों को भी इसके दायरे में रखा है। इनमें एईडीपी, ओटी शास्त्री, बीएफए, बीपीए, बीबीए, बीसीए, बीएचएम और बीटीटीएम शामिल हैं। इसके अलावा बीएससी डाटा साइंस और बीएससी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विद्यार्थी भी प्रक्रिया में शामिल होंगे।
गलती सुधारने पर लग सकता है शुल्क
विद्यार्थियों को फॉर्म भरते समय अपने विषय चयन और अन्य विवरण की जांच करनी होगी। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि के बाद सुधार के लिए शुल्क लागू हो सकता है। इसलिए विद्यार्थियों को अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना विवरण दर्ज कराने और उसकी शुद्धता जांचने की जरूरत होगी। कॉलेज स्तर पर भी दर्ज जानकारी का सत्यापन किया जाएगा। इससे गलत विषय चयन या विवरण में त्रुटि को समय रहते पकड़ने का अवसर मिलेगा। 31 अगस्त के बाद प्रक्रिया में बदलाव करने वाले विद्यार्थियों पर विश्वविद्यालय के निर्धारित नियमों के अनुसार शुल्क लागू किया जा सकता है।