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Shimla News: चेक बाउंस मामले में भुगतनी होगी एक साल की कैद, अपील खारिज

Thu, 27 Aug 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2026 11:59 PM IST
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One-year imprisonment to be served in cheque bounce case; appeal dismissed.
जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने लोअर कोर्ट की सजा रखी बरकरार
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दोषी को 1.25 लाख रुपये का मुआवजा भी देना होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिमला भुवनेश अवस्थी की अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली अपील खारिज कर दी है।

अदालत ने कोटखाई स्थित एन-टेक इंफोसिस सिस्टम के प्रोपराइटर नरेंद्र थापा की अपील खारिज करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम), शिमला द्वारा सुनाई एक साल के कारावास की सजा और 1,25,000 रुपये मुआवजे के आदेश को सही ठहराया है। मामले के अनुसार कसुम्पटी शिमला स्थित स्काई लाइन कंप्यूटर्स के मालिक मनमोहन सिंह से आरोपी नरेंद्र थापा पिछले तीन वर्षों से कंप्यूटर के सामान की खरीद-फरोख्त कर रहे थे। सामान के एवज में दोषी पर 84 हजार रुपये की देनदारी बकाया थी। इस राशि के भुगतान के लिए आरोपी ने पंजाब नेशनल बैंक, कोटखाई शाखा का एक चेक जारी किया था। शिकायतकर्ता मनमोहन सिंह ने 4 मार्च 2021 को यह चेक कसुम्पटी स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में लगाया लेकिन खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इसके बाद विधिक नोटिस भेजे जाने के बावजूद भुगतान न करने पर शिकायतकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अपीलकर्ता आरोपी ने तर्क दिया था कि उसने चेक केवल सुरक्षा के रूप में दिया था और चेक में राशि तथा तारीख शिकायतकर्ता द्वारा अलग स्याही से भरी गई थी।
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सत्र न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि यदि चेक सुरक्षा के तौर पर भी दिया गया हो या उसमें विवरण किसी अन्य व्यक्ति द्वारा भरा गया हो, तब भी चेक जारी करने वाले की कानूनी जवाबदेही समाप्त नहीं होती। इसके अलावा आरोपी बैंक खाते से भुगतान किए जाने का कोई दस्तावेजी प्रमाण अदालत में पेश नहीं कर सका। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि चेक बाउंस के बढ़ते मामलों को देखते हुए कड़ा रुख अपनाना आवश्यक है। सत्र न्यायालय ने आरोपी को एक वर्ष के साधारण कारावास और शिकायतकर्ता को 1,25,000 रुपये मुआवजा देने के आदेश को न्यायसंगत ठहराते हुए अपील खारिज कर दी।
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