कोरोना फंड के लिए हिमाचल के कर्मचारियों की कटेगी एक दिन की सैलरी, संशोधित आदेश जारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोविड-19 सॉलिडेरिटी फंड के लिए हिमाचल में एक दिन की कर्मचारियों की पूरी सैलरी कटेगी। इससे पहले एक दिन का बेसिक वेतन काटे जाने के आदेश थे, लेकिन अब सरकार के वित्त विभाग ने संशोधित आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों को सभी विभागों को लागू करने के लिए भेज दिया है। यह सैलरी सभी अधिकारियों और स्टाफ की कटेगी। वित्त विभाग ने इससे पहले 18 अप्रैल को आदेश जारी किए थे कि कर्मचारियों की एक दिन की बेसिक सैलरी काटी जाएगी। यह भी निर्णय लिया कि यह कटौती केंद्रीयकृत प्रणाली ई-सैलरी के माध्यम से होगी। इसे अप्रैल के वेतन से काटा जाएगा, जो मई में देय है। वहीं केंद्र के उठाए कदम के बाद प्रदेश सरकार महंगाई भत्ते पर भी एक साल तक रोक लगा सकती है।
सभी फ्रंटलाइन कर्मियों को 50 लाख का अनुग्रह अनुदान
वहीं, हिमाचल सरकार ने कोरोना महामारी में कार्य कर रहे फ्रंटलाइन कर्मियों के लिए 50 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान देने की घोषणा की है। राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने जानकारी दी है कि प्रदेश में कोविड-19 के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर विभिन्न क्षमता में कार्य कर रहे फ्रंटलाइन कर्मियों की मृत्यु हो जाने की स्थिति में उनके परिजनों को सरकार ने 50 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान देने की घोषणा की है। इस संबंध में गुरुवार को अधिसूचना जारी कर दी गई है। अधिसूचना के अनुसार कोविड-19 के दौरान कार्य करते हुए मृत्यु हो जाने की स्थिति में यह अनुग्रह अनुदान राशि राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोविड-19 फंड के तहत दी जाएगी।
सरकार के अनुसार कोविड-19 की महामारी के बचाव, राहत कार्यों व अन्य उपाय करने में दिन-रात कार्य कर रहे ऐसे सभी कर्मियों के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि उनके परिवारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए। अधिसूचना के अनुसार अनुग्रह अनुदान का यह प्रावधान राज्य सरकार में कार्यरत ऐसे फ्रंटलाइन अधिकारियों व कर्मचारियों जो नियमित, आउटसोर्स, अनुबंध, दिहाड़ीदारों व नगर निगम शिमला की सैहब सोसायटी के सफाई कर्मियों पर लागू होगा, जो विभिन्न क्षमता में कोविड-19 महामारी के दौरान राहत व बचाव कार्यों में लगे हुए हैं। इस दौरान फ्रंटलाइन कर्मियों की मृत्यु होने की स्थिति में यह अनुग्रह अनुदान प्रदान किया जाएगा। भारत सरकार व अन्य प्रदेश सरकारों की ओर से इस प्रकार का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से भी स्वास्थ्य कर्मियों के लिए 50 लाख रुपये तक की बीमा योजना पहले ही घोषित की जा चुकी है।