{"_id":"6a9980a8585bbe7e8f00f704","slug":"oil-repeatedly-reheated-in-roadside-eatery-woks-is-harming-health-shimla-news-c-19-sml1002-780813-2026-09-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: ढाबों की कड़ाही में बार-बार गर्मी किया जा रहा तेल बिगाड़ रहा सेहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: ढाबों की कड़ाही में बार-बार गर्मी किया जा रहा तेल बिगाड़ रहा सेहत
विज्ञापन
छोटा शिमला में स्वास्थ्य सुरक्षा विभाग ने की जांच
दूध, दही और पनीर समेत खाद्य पदार्थों के 17 सैंपल भरे
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के उपनगर छोटा शिमला में वीरवार को स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन विभाग ने होटलों और ढाबों का निरीक्षण किया। इस दौरान होटलों और ढाबों की कड़ाही में इस्तेमाल होने वाले खाद्य तेल की जांच की गई।
अधिकांश जगहों पर तेल को बार-बार गर्म कर इस्तेमाल करने की बात सामने आई। सैंपलों की जांच में कुछ ढाबों और होटलों से लिए तेल के नमूनों में टीपीसी (टोटल पोलर कंपाउंड्स) का स्तर निर्धारित सीमा के करीब पाया गया। विभागीय अधिकारियों ने कारोबारियों को चेताया कि टीपीसी का स्तर निर्धारित सीमा के करीब या उससे अधिक होने पर तेल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कड़ाही में एक ही तेल को बार-बार गर्म न करने की हिदायत दी। अधिकारियों ने कहा कि खाद्य तेल को बार-बार और अधिक तापमान पर गर्म करने से उसमें हानिकारक यौगिक बढ़ सकते हैं, जिससे लंबे समय में स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने का खतरा रहता है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन विभाग ने वीरवार को छोटा शिमला क्षेत्र में मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन के माध्यम से खाद्य पदार्थों की जांच की। अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा एवं विनियमन विभाग की सहायक आयुक्त डॉ. विजया और जूनियर साइंटिस्ट प्रणव गुप्ता की अगुवाई में दूध, दही, पनीर, दूध से बने मिष्ठान्न, खाद्य तेल और जूस समेत 17 खाद्य सैंपलों की मौके पर जांच की गई। जांच में खाद्य तेल के कुछ नमूनों में टीपीसी का स्तर निर्धारित सीमा के करीब पाया गया। विभाग ने कारोबारियों को एक ही तेल को बार-बार तलने के लिए इस्तेमाल न करने की हिदायत दी।
विज्ञापन
मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन से होगी जांच
सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा डॉ. विजया ने बताया कि मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन के माध्यम से इस प्रकार की त्वरित खाद्य जांच नियमित रूप से की जाएगी। यह वैन शिमला शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर खाद्य पदार्थों की मौके पर जांच करेगी। इसके अलावा बेकरी निर्माताओं, थोक विक्रेताओं और विभिन्न खाद्य निर्माण इकाइयों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। गौरतलब है कि विभाग ने बताया कि तेल को बार-बार अधिक तापमान पर गर्म करने से उसमें हानिकारक यौगिक बढ़ सकते हैं, जिससे लंबे समय में स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर और हृदय संबंधी बीमारियों समेत अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। जांचे गए दूध और दूध से बने मिष्ठान्नों के नमूने एफएसएसएआई के निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए।
विज्ञापन
दूध, दही और पनीर समेत खाद्य पदार्थों के 17 सैंपल भरे
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के उपनगर छोटा शिमला में वीरवार को स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन विभाग ने होटलों और ढाबों का निरीक्षण किया। इस दौरान होटलों और ढाबों की कड़ाही में इस्तेमाल होने वाले खाद्य तेल की जांच की गई।
अधिकांश जगहों पर तेल को बार-बार गर्म कर इस्तेमाल करने की बात सामने आई। सैंपलों की जांच में कुछ ढाबों और होटलों से लिए तेल के नमूनों में टीपीसी (टोटल पोलर कंपाउंड्स) का स्तर निर्धारित सीमा के करीब पाया गया। विभागीय अधिकारियों ने कारोबारियों को चेताया कि टीपीसी का स्तर निर्धारित सीमा के करीब या उससे अधिक होने पर तेल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कड़ाही में एक ही तेल को बार-बार गर्म न करने की हिदायत दी। अधिकारियों ने कहा कि खाद्य तेल को बार-बार और अधिक तापमान पर गर्म करने से उसमें हानिकारक यौगिक बढ़ सकते हैं, जिससे लंबे समय में स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने का खतरा रहता है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
विज्ञापन
स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन विभाग ने वीरवार को छोटा शिमला क्षेत्र में मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन के माध्यम से खाद्य पदार्थों की जांच की। अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा एवं विनियमन विभाग की सहायक आयुक्त डॉ. विजया और जूनियर साइंटिस्ट प्रणव गुप्ता की अगुवाई में दूध, दही, पनीर, दूध से बने मिष्ठान्न, खाद्य तेल और जूस समेत 17 खाद्य सैंपलों की मौके पर जांच की गई। जांच में खाद्य तेल के कुछ नमूनों में टीपीसी का स्तर निर्धारित सीमा के करीब पाया गया। विभाग ने कारोबारियों को एक ही तेल को बार-बार तलने के लिए इस्तेमाल न करने की हिदायत दी।
विज्ञापन
मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन से होगी जांच
सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा डॉ. विजया ने बताया कि मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन के माध्यम से इस प्रकार की त्वरित खाद्य जांच नियमित रूप से की जाएगी। यह वैन शिमला शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर खाद्य पदार्थों की मौके पर जांच करेगी। इसके अलावा बेकरी निर्माताओं, थोक विक्रेताओं और विभिन्न खाद्य निर्माण इकाइयों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। गौरतलब है कि विभाग ने बताया कि तेल को बार-बार अधिक तापमान पर गर्म करने से उसमें हानिकारक यौगिक बढ़ सकते हैं, जिससे लंबे समय में स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर और हृदय संबंधी बीमारियों समेत अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। जांचे गए दूध और दूध से बने मिष्ठान्नों के नमूने एफएसएसएआई के निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए।