हिमाचल: प्री प्राइमरी शिक्षक भर्ती की पात्रता पूरी करने के लिए नर्सरी टीचर ट्रेनिंग शुरू
प्री प्राइमरी शिक्षकों की पात्रता को पूरा करने के लिए कई निजी शिक्षण संस्थानों ने नर्सरी टीचर ट्रेनिंग (एनटीटी) शुरू की है। शिक्षा विभाग में बीते दो वर्षों से 4,000 शिक्षकों की भर्ती की कवायद चल रही है।
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हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में भर्ती किए जाने वाले प्री प्राइमरी शिक्षकों की पात्रता को पूरा करने के लिए कई निजी शिक्षण संस्थानों ने नर्सरी टीचर ट्रेनिंग (एनटीटी) शुरू की है। शिक्षा विभाग में बीते दो वर्षों से 4,000 शिक्षकों की भर्ती की कवायद चल रही है। इन दिनों भर्ती एवं पदोन्नति नियम बनाए जा रहे हैं। जनवरी 2023 से भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के आसार हैं। शिक्षक भर्ती में युवाओं को शामिल करने के लिए प्रदेश के कई निजी शिक्षण संस्थानों ने सभी दस्तावेजों की जांच किए बिना नर्सरी टीचर ट्रेनिंग के कोर्स शुरू किए हैं। इसके लिए नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजूकेशन से मंजूरी ली गई है या नहीं। इस बारे में भी संस्थानों ने एमओयू करने वाली कंपनी से पता नहीं किया। अब निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग की कार्रवाई के बाद इन संस्थानों पर खतरा मंडराना शुरू हो गया है।
प्रदेश सरकार ने एनटीटी का एक या दो वर्ष का डिप्लोमा करने वालों को भर्ती के लिए पात्र बनाया है। भर्ती एवं पदोन्नति नियम बनने तक आउटसोर्स आधार पर भर्ती की जानी है। ऐसे में इस भर्ती में शामिल होने के लिए कई युवाओं ने इन संस्थानों में दाखिले लिए। इन युवाओं के भविष्य पर भी अब प्रश्नचिन्ह लग गया है। उधर, विनियामक आयोग ने इन संस्थानों में पहले से चल रहे अन्य कोर्स की भी जांच करने के लिए संबंधित विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को पत्र लिख दिया है। पहले से चल रहे कोर्स को करवाने के लिए क्या अधिकृत संस्था से मान्यता प्राप्त की गई है या नहीं। अब इस पहलु पर जांच की जाएगी। विनियामक आयोग ने एनटीटी से संबंधित जानकारी नहीं देने वाले नौ संस्थानों के खिलाफ भी अलग से जांच करने का फैसला लिया है।
आयोग का फैसला अधिकारों का हनन : संतोष
एनसीएफएसई के निदेशक संतोष सूदन ने कहा है कि राज्य निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग का फैसला एनसीएफएसई और अधिकृत केंद्रों के अधिकारों का हनन करने वाला है। एमएसएमई (भारत सरकार) के उपक्रमों को चुनौती देने वाला है। उन्होंने कहा कि यह फैसला केंद्र सरकार के अधिकारों को चुनौती देने वाला भी है। इस निर्णय के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय हिमाचल में चुनौती देने से भी पीछे नहीं हटेंगे।