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Kullu News: अब तीन जगहों से हो रहा जलोड़ी सुरंग का सर्वे, तीसरी मशीन की तैनात
Sun, 10 Dec 2023 11:20 AM IST
Krishan Singh
रोशन ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
रोशन ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Published by: Krishan Singh
Updated Sun, 10 Dec 2023 11:20 AM IST
सार
अब एनएच अथॉरिटी के कहने पर सर्वे करने वाली दिल्ली की अल्टीनोक कंपनी ने तीसरी मशीन भी लगा दी है। ये जलोड़ी दर्रा के साथ-साथ अलग-अलग जगहों पर टनल बनाने की जगह को तलाश रही है।
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जलोड़ी सुरंग का सर्वे,
- फोटो : संवाद
विस्तार
10,280 फुट ऊंचे जलोड़ी दर्रा को भेद कर बन रही जलोड़ी टनल का अब तीन जगहों से सर्वे किया जा रहा है। पहले बंजार के घियागी और दूसरी तरफ खनाग की तरफ से मशीनों का तैनात कर सर्वेक्षण किया जा रहा था। अब एनएच अथॉरिटी के कहने पर सर्वे करने वाली दिल्ली की अल्टीनोक कंपनी ने तीसरी मशीन भी लगा दी है। ये जलोड़ी दर्रा के साथ-साथ अलग-अलग जगहों पर टनल बनाने की जगह को तलाश रही है। सर्वे के लिए पहुंची तीनों टीमें जलोड़ी के अंदर पानी और चट्टानों के होने का भी पता लगा रही है। वहीं एनएच अथॉरिटी और कंपनी ने भारी बर्फबारी से पहले सर्वे पूरा करने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में अब दो की जगह तीनों मोर्चों से सर्वे किया जा रहा है।
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आपदा के कारण वैसे भी जलोड़ी टनल और टनल के दोनों मुहाने तक बनने वाले सड़कों की डीपीआर बनाने का समय तीन माह आगे खिसक गया है। जिला कुल्लू में जुलाई में आई आपदा से न केवल आम लोगों के जनजीवन पर असर पड़ा है, बल्कि विकास की योजनाओं को भी समय पर धरातल पर उतारने में देरी हो रही है। एनएच अथॉरिटी ने जलोड़ी टनल की डीपीआर को तैयार के लिए दिल्ली की अल्टीनोक कंसल्टिंग इंजीनियरिंग कंपनी को 17.32 करोड़ का टेंडर दिया है।
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मगर आपदा के कारण डीपीआर बनाने में देरी के साथ करीब चार किमी लंबी टनल के निर्माण का समय भी आगे खिसक रहा है। बाह्य सराज आनी-निरमंड की 69 पंचायतों के साथ रामपुर, किन्नौर, शिमला, मंडी के करसोग और स्पीति के लोगों को टनल निर्माण का बेसब्री से इंतजार है। करीब 90 के दशक से टनल बनाने की मांग चल रही है। केंद्र सरकार ने भी टनल बनाने को हरी झंडी दी है। एनएच-305 के अधिशासी अभियंता केएल सुमन ने कहा कि टनल की डीपीआर बनाने के लिए सर्वे का काम चल रहा है। अब तीन जगहों से सर्वे हो रहा है।
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जिला मुख्यालय से 12 माह जुड़ेगी 69 पंचायतें
10,280 फीट ऊंचे जलोड़ी दर्रा के कारण कुल्लू का बाह्य सराज सर्दी और बरसात में अलग-थलग पड़ जाता है। बर्फबारी और भूस्खलन से करीब पांच से छह माह तक हाईवे-305 बंद रहता है। इस कारण बाह्य सराज की 69 पंचायतों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट जाता है। टनल बनने से घाटी के अनछुए पर्यटन स्थलों को भी पंख लगेंगे।