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Shimla News: अब ई-कॉमर्स साइटों पर बिकेंगे महिलाओं के बनाए उत्पाद
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धामी, शकराह, घंडल और बनूटी की महिलाएं के बनाए उत्पादों को मिलेगा ऑनलाइन बाजार
समूहों से जुड़ी 200 महिलाओं को मिलेगा लाभ
खास खबर
दीक्षा सरोय
शिमला। राजधानी के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों धामी, शकराह, घंडल और बनूटी की 200 महिलाओं के हाथों से बने उत्पाद अब देश-विदेश की ई-कॉमर्स साइटों पर बिकेंगे। इससे महिलाओं के उत्पादों को ऑनलाइन बाजार मिलेगा और वह आर्थिक रूप से सशक्त हो सकेंगी।
खास बात यह है कि पहले यह महिलाएं अपने उत्पाद स्थानीय लोगों, बाजारों और प्रदर्शनियों में बेचती थीं लेकिन अब उनके उत्पादों की पहुंच देश-विदेश तक होगी। ऑनलाइन बाजार में महिलाओं के बनाए हस्तनिर्मित साबुन, पाइन नीडल (चीड़ की पत्तियों) से बने उत्पाद, हाथों से सिले कपड़े, बैग, पर्स, फूलदान, पेन होल्डर सहित हाथों से बुने स्वेटर, टोपी, मफलर और अन्य उत्पाद बेचे जाएंगे। हेल्पिंग हैंड वेलफेयर एंड एजुकेशन संस्था शिमला से जुड़ी इन महिलाओं के लिए संस्था की ओर से यह पहल की जा रही है। इसके लिए संस्था जल्द ही एक ई-कॉमर्स साइट के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करेगी। महिलाओं ने संस्था की ओर से चलाए गए प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर विभिन्न उत्पाद बनाने का हुनर सीखा है।
प्रशिक्षण के बाद अब यह महिलाएं उत्पाद तैयार करेंगी। इसके लिए संस्था की ओर से घणाहट्टी के पास स्थित उखलिया में उन्हें उत्पाद तैयार करने की जगह उपलब्ध करवाई जाएगी। यहां महिलाएं उत्पाद तैयार करने के साथ उनकी पैकेजिंग भी करेंगी। इसके बाद उत्पादों को प्रदर्शित कर नामी ई-कॉमर्स साइट के माध्यम से बेचा जाएगा। संस्था महिलाओं को कच्चा माल उपलब्ध करवाने से लेकर पैकेजिंग, मार्केटिंग और गुणवत्ता की जांच तक की जिम्मेदारी संभालेगी, ताकि महिलाओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
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बॉक्स
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल
हेल्पिंग हैंड वेलफेयर एंड एजुकेशन संस्था के संस्थापक कपिल कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी महिलाओं के उत्पादों को बाजार उपलब्ध करवाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए यह पहल की जा रही है। शुरुआत में इसमें 200 महिलाएं शामिल होंगी। बाद में इस पहल से और महिलाओं को भी जोड़ा जाएगा। संस्था का लक्ष्य है कि इस पहल के माध्यम से प्रत्येक महिला एक लाख रुपये तक की कमाई कर सके। इस संबंध में संस्था एक नामी ई-कॉमर्स साइट के साथ 2 नवंबर को आधिकारिक रूप से एमओयू पर हस्ताक्षर करेगी। इसके बाद महिलाओं के बनाए ग्रामीण उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री शुरू हो जाएगी। उत्पादों की बिक्री से होने वाला पूरा मुनाफा सीधे महिलाओं को दिया जाएगा। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और वे अपने परिवार का बेहतर पालन-पोषण कर सकेंगी।
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समूहों से जुड़ी 200 महिलाओं को मिलेगा लाभ
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दीक्षा सरोय
शिमला। राजधानी के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों धामी, शकराह, घंडल और बनूटी की 200 महिलाओं के हाथों से बने उत्पाद अब देश-विदेश की ई-कॉमर्स साइटों पर बिकेंगे। इससे महिलाओं के उत्पादों को ऑनलाइन बाजार मिलेगा और वह आर्थिक रूप से सशक्त हो सकेंगी।
खास बात यह है कि पहले यह महिलाएं अपने उत्पाद स्थानीय लोगों, बाजारों और प्रदर्शनियों में बेचती थीं लेकिन अब उनके उत्पादों की पहुंच देश-विदेश तक होगी। ऑनलाइन बाजार में महिलाओं के बनाए हस्तनिर्मित साबुन, पाइन नीडल (चीड़ की पत्तियों) से बने उत्पाद, हाथों से सिले कपड़े, बैग, पर्स, फूलदान, पेन होल्डर सहित हाथों से बुने स्वेटर, टोपी, मफलर और अन्य उत्पाद बेचे जाएंगे। हेल्पिंग हैंड वेलफेयर एंड एजुकेशन संस्था शिमला से जुड़ी इन महिलाओं के लिए संस्था की ओर से यह पहल की जा रही है। इसके लिए संस्था जल्द ही एक ई-कॉमर्स साइट के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करेगी। महिलाओं ने संस्था की ओर से चलाए गए प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर विभिन्न उत्पाद बनाने का हुनर सीखा है।
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प्रशिक्षण के बाद अब यह महिलाएं उत्पाद तैयार करेंगी। इसके लिए संस्था की ओर से घणाहट्टी के पास स्थित उखलिया में उन्हें उत्पाद तैयार करने की जगह उपलब्ध करवाई जाएगी। यहां महिलाएं उत्पाद तैयार करने के साथ उनकी पैकेजिंग भी करेंगी। इसके बाद उत्पादों को प्रदर्शित कर नामी ई-कॉमर्स साइट के माध्यम से बेचा जाएगा। संस्था महिलाओं को कच्चा माल उपलब्ध करवाने से लेकर पैकेजिंग, मार्केटिंग और गुणवत्ता की जांच तक की जिम्मेदारी संभालेगी, ताकि महिलाओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
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हेल्पिंग हैंड वेलफेयर एंड एजुकेशन संस्था के संस्थापक कपिल कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी महिलाओं के उत्पादों को बाजार उपलब्ध करवाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए यह पहल की जा रही है। शुरुआत में इसमें 200 महिलाएं शामिल होंगी। बाद में इस पहल से और महिलाओं को भी जोड़ा जाएगा। संस्था का लक्ष्य है कि इस पहल के माध्यम से प्रत्येक महिला एक लाख रुपये तक की कमाई कर सके। इस संबंध में संस्था एक नामी ई-कॉमर्स साइट के साथ 2 नवंबर को आधिकारिक रूप से एमओयू पर हस्ताक्षर करेगी। इसके बाद महिलाओं के बनाए ग्रामीण उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री शुरू हो जाएगी। उत्पादों की बिक्री से होने वाला पूरा मुनाफा सीधे महिलाओं को दिया जाएगा। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और वे अपने परिवार का बेहतर पालन-पोषण कर सकेंगी।