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Shimla News: अब दिल्ली में बिकेंगे घंडल की महिलाएं के बनाए उत्पाद
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चीड़ की पत्तियों और जूट के बनाए 500 उत्पादों का लगाया जाएगा स्टॉल, साबुन भी बना रही हैं महिलाएं
25 से ज्यादा ग्रामीण महिलाएं बना रहीं यह उत्पाद
खास खबर
दीक्षा सरोय
शिमला। पाइन नीडल (चीड़ की पत्तियों) और जूट के उत्पादों में अलग पहचान बना चुकी जिले की महिलाएं अब अपना हुनर दिल्ली में दिखाएंगी। रसोई और खेतों तक सिमटी घंडल पंचायत की महिलाएं अब दिल्ली के हाट बाजार में खुद के बनाए उत्पाद बेच सकेंगी।
गांव की 25 से ज्यादा महिलाएं पिछले 2 महीने से हाथों से पाइन नीडल, जूट और धागों से बुने उत्पाद, साबुन के 500 से अधिक उत्पाद तैयार कर रही हैं। इनमें टोकरी, बैग, फूलदान, कॉस्टर सेट और सजावटी सामान शामिल है जिसे दिल्ली के मार्ट में स्टॉल लगाकर प्रदर्शित किया जाएगा। मई के अंत तक यह प्रदर्शनी दिल्ली में लगेगी।
केमिकल फ्री और इको-फ्रेंडली इन उत्पादों की मांग मेट्रो शहरों में तेजी से बढ़ रही है जिससे गांव की इन महिलाओं को स्वरोजगार की नई उम्मीद जगी है। घंडल पंचायत में हेल्पिंग हैंड वेलफेयर एंड एजुकेशन संस्था से जुड़ी महिलाओं ने फरवरी में पाइन नीडल क्राफ्ट की ट्रेनिंग ली। इस दौरान मास्टर ट्रेनर सुनीता शर्मा ने 30 दिन तक इन ग्रामीण महिलाओं को चीड़ की सूखी पत्तियों से उत्पाद बनाना सिखाया। इसके अलावा चंपा देवी और पूनम बंसल ने महिलाओं को अन्य प्रशिक्षण दिया।
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अब यह महिलाएं संस्था के केंद्र में उत्पाद तैयार कर रही हैं। महिला विद्या देवी ने बताया कि पहले हम इन पत्तियों को राख कर देते थे। अब उन्हीं पत्तियों से 300 रुपये की टोकरी बन रही है। समन्वयक सुनीता बंसल ने बताया कि 25 महिलाओं ने पिछले 60 दिन से समूह 500 से ज्यादा उत्पाद तैयार करने के लिए लगातार कार्य कर रहा हैं। इसमें 75 पाइन नीडल उत्पाद, 200 जूट के बैग, 50 किट और 30 ज्वेलरी सेट और 100 के करीब सजावटी धागों से बुने रबड़ और अन्य सजावटी सामान शामिल हैं। पूजा ने कहा कि पाइन नीडल की एक टोकरी बनाने में 2 दिन लगते हैं और कीमत 250 से 600 रुपये तक है। जूट बैग 150 से 400 रुपये में बिकेंगे। समूह को उम्मीद है कि दिल्ली के हाट बाजार से एक लाख रुपये के उत्पादों की बिक्री होगी।
बॉक्स
हेल्पिंग हैंड वेलफेयर संस्था के संस्थापक कपिल कुमार ने बताया कि गांवों से लेकर अब महिलाओं के विभिन्न हुनर वह बड़े शहरों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे उन्हें अपने हुनर को निखारने और निरंतर काम करने की प्रेरणा मिलेगी जिससे महिलाओं आर्थिक तौर पर मजबूत होंगी सशक्त होंगी और उन्हें नई पहचान मिलेगी।
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25 से ज्यादा ग्रामीण महिलाएं बना रहीं यह उत्पाद
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दीक्षा सरोय
शिमला। पाइन नीडल (चीड़ की पत्तियों) और जूट के उत्पादों में अलग पहचान बना चुकी जिले की महिलाएं अब अपना हुनर दिल्ली में दिखाएंगी। रसोई और खेतों तक सिमटी घंडल पंचायत की महिलाएं अब दिल्ली के हाट बाजार में खुद के बनाए उत्पाद बेच सकेंगी।
गांव की 25 से ज्यादा महिलाएं पिछले 2 महीने से हाथों से पाइन नीडल, जूट और धागों से बुने उत्पाद, साबुन के 500 से अधिक उत्पाद तैयार कर रही हैं। इनमें टोकरी, बैग, फूलदान, कॉस्टर सेट और सजावटी सामान शामिल है जिसे दिल्ली के मार्ट में स्टॉल लगाकर प्रदर्शित किया जाएगा। मई के अंत तक यह प्रदर्शनी दिल्ली में लगेगी।
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केमिकल फ्री और इको-फ्रेंडली इन उत्पादों की मांग मेट्रो शहरों में तेजी से बढ़ रही है जिससे गांव की इन महिलाओं को स्वरोजगार की नई उम्मीद जगी है। घंडल पंचायत में हेल्पिंग हैंड वेलफेयर एंड एजुकेशन संस्था से जुड़ी महिलाओं ने फरवरी में पाइन नीडल क्राफ्ट की ट्रेनिंग ली। इस दौरान मास्टर ट्रेनर सुनीता शर्मा ने 30 दिन तक इन ग्रामीण महिलाओं को चीड़ की सूखी पत्तियों से उत्पाद बनाना सिखाया। इसके अलावा चंपा देवी और पूनम बंसल ने महिलाओं को अन्य प्रशिक्षण दिया।
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अब यह महिलाएं संस्था के केंद्र में उत्पाद तैयार कर रही हैं। महिला विद्या देवी ने बताया कि पहले हम इन पत्तियों को राख कर देते थे। अब उन्हीं पत्तियों से 300 रुपये की टोकरी बन रही है। समन्वयक सुनीता बंसल ने बताया कि 25 महिलाओं ने पिछले 60 दिन से समूह 500 से ज्यादा उत्पाद तैयार करने के लिए लगातार कार्य कर रहा हैं। इसमें 75 पाइन नीडल उत्पाद, 200 जूट के बैग, 50 किट और 30 ज्वेलरी सेट और 100 के करीब सजावटी धागों से बुने रबड़ और अन्य सजावटी सामान शामिल हैं। पूजा ने कहा कि पाइन नीडल की एक टोकरी बनाने में 2 दिन लगते हैं और कीमत 250 से 600 रुपये तक है। जूट बैग 150 से 400 रुपये में बिकेंगे। समूह को उम्मीद है कि दिल्ली के हाट बाजार से एक लाख रुपये के उत्पादों की बिक्री होगी।
बॉक्स
हेल्पिंग हैंड वेलफेयर संस्था के संस्थापक कपिल कुमार ने बताया कि गांवों से लेकर अब महिलाओं के विभिन्न हुनर वह बड़े शहरों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे उन्हें अपने हुनर को निखारने और निरंतर काम करने की प्रेरणा मिलेगी जिससे महिलाओं आर्थिक तौर पर मजबूत होंगी सशक्त होंगी और उन्हें नई पहचान मिलेगी।