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Himachal News: हिमाचल में कर्मचारी संगठनों में अब पांच साल की ही मिलेगी ओहदेदारी

Sun, 15 Feb 2026 01:28 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sun, 15 Feb 2026 01:28 PM IST
सार

हिमाचल में कोई भी सरकारी कर्मचारी अपने पूरे सेवाकाल के दौरान किसी भी चुनावी पद पर अधिकतम दो कार्यकाल या कुल पांच वर्ष में से जो भी पहले हो, उससे अधिक नहीं रह सकेगा। ये आदेश  मुख्य सचिव की ओर से जारी किए गए हैं। पढ़ें पूरी खबर...

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Now employee organizations in Himachal will only hold positions for five years
हिमाचल प्रदेश सचिवालय। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

सरकारी कर्मचारियों की ओर से विभिन्न निकायों और कर्मचारी संगठनों में चुनावी पद धारण करने के मामलों पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव की ओर से जारी आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी अपने पूरे सेवाकाल के दौरान किसी भी चुनावी पद पर अधिकतम दो कार्यकाल या कुल पांच वर्ष में से जो भी पहले हो, उससे अधिक नहीं रह सकेगा। 

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निर्देशों में केंद्र सरकार के वर्ष 2019 और 2020 के दिशा-निर्देशों और 3 जून 2022 के कार्यालय ज्ञापन का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी किसी बोर्ड, निगम, स्वायत्त निकाय या कर्मचारी संगठन के चुनाव में भाग लेना चाहता है तो उसे सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। 
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बिना पूर्व स्वीकृति के चुनाव लड़ना या निर्धारित अवधि से अधिक समय तक पद पर बने रहना सेवा नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार के संज्ञान में ऐसे कई मामले आए हैं, जहां सरकारी कर्मचारी विभिन्न संस्थाओं में लंबे समय तक चुनावी पदों पर बने हुए हैं। कुछ मामलों में संबंधित संस्थाओं के उप नियमों में लगातार कार्यकाल की सीमा निर्धारित होने के बावजूद कर्मचारी एक अंतराल के बाद दोबारा चुनाव लड़कर पद हासिल कर लेते हैं। वहीं, कुछ मामलों में अपने परिवार के सदस्य या निकट संबंधी को प्रतिनिधि के रूप में चुनाव जिताकर परोक्ष रूप से संस्था पर नियंत्रण बनाए रखने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
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निर्देशों में यह भी कहा गया है कि इस प्रकार लंबे समय तक चुनावी पदों पर बने रहने से संबंधित कर्मचारी अपने शासकीय दायित्वों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते। इससे उनके कार्य निष्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। साथ ही यह आशंका भी उत्पन्न होती है कि विशेषकर वे संस्थाएं जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ी हैं, उनमें पद पर बने रहने वाले कर्मचारियों के निजी हित विकसित हो सकते हैं।

सचिवालय में भी नहीं हो रहा इन आदेशों का पालन
इन आदेशों का पालन राज्य सचिवालय में भी नहीं हो रहा है। विभागों और फील्ड स्टाफ के बीच भी ऐसी ही स्थिति बताई जा रही है। सचिवालय से जुड़े संगठनों जैसे राजपत्रित कर्मचारी संघ, सचिवालय चालक एसोसिएशन, स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड तथा क्लास-थ्री और क्लास-फोर कर्मचारियों के संगठनों में पदाधिकारी 20–25 वर्षों से बार-बार चुनाव लड़कर चुने जा रहे हैं और लंबे समय से पदों पर काबिज हैं।

प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडल आयुक्तों, उपायुक्तों, बोर्डों, निगमों को निर्देश
मुख्य सचिव ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों, बोर्डों, निगमों और स्वायत्त निकायों के प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीन कार्यरत कर्मचारियों के मामलों की समीक्षा कर निर्धारित सीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। राज्य सरकार ने चेतावनी दी है कि दो कार्यकाल या पांच वर्ष की अधिकतम सीमा का उल्लंघन करने, बिना पूर्व अनुमति चुनाव लड़ने अथवा नियमों को दरकिनार कर परोक्ष रूप से पद पर बने रहने के मामलों में संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध सेवा नियमों के तहत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसे प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और हितों के टकराव को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
 
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