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Shimla News: पिज्जा और पनीर बनाकर किसान बदलेंगे अपनी तकदीर

Wed, 30 Jul 2025 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 30 Jul 2025 11:59 PM IST
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Now by making pizza and cheese, farmers are relieved
खास
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किसानों को निःशुल्क प्रशिक्षण देगा पशुपालन विभाग, अगस्त में शुरू होंगी कार्यशालाएं
पर्यटन सीजन में होटलों में दोगुना होती है पनीर की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले के किसानों को पिज्जा और पनीर बनाने के लिए पशुपालन विभाग की ओर से निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए उपमंडल स्तर पर 16 अगस्त से प्रशिक्षण कार्यशालाएं शुरू होंगी। इसमें विशेषज्ञ के माध्यम से इच्छुक पशुपालकों को पनीर बनाने पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

बचत भवन में बुधवार को आयोजित बैठक के दौरान उपायुक्त (डीसी) अनुपम कश्यप ने कहा कि अभी जिस पनीर का पिज्जा में इस्तेमाल हो रहा है वह अन्य जिलों से खरीदकर लाया जा रहा है। जिले में पनीर की भारी मांग है। पर्यटन सीजन के दौरान होटलों में पनीर की मांग दोगुना हो जाती है। ऐसे में अगर जिले के किसान खुद पनीर बनाकर बचेंगे तो उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।
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अब इसे अपने जिले में बनाकर तैयार किया जाएगा। इसके लिए पशु पालकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे लोगों को रोजगार के अवसर घरद्वार पर ही उपलब्ध हो पाएंगे। कार्यशाला के माध्यम से लोगों के सुझावों के हिसाब से नीति निर्माण करना है ताकि मूलभूत चुनौतियों का समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य पशुपालन विभाग के माध्यम से उत्पादन को बढ़ाना है। एकीकृत एडवांस तकनीक का इस्तेमाल आधारभूत ढांचे का विकास करना, संतुलित फोस्टरिंग प्रैक्टिस को बढ़ावा देना और किसानों की आय तथा ग्रामीण क्षेत्रों की आय बढ़ोतरी करना है।
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अतिरिक्त उपायुक्त अभिषेक वर्मा ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालकों का अहम योगदान है। उन्होंने पशुपालन विभाग के फील्ड स्टाफ को भी निर्देश दिए कि समय पर अपने पशुओं के उपचार के लिए प्राथमिकता से कार्य करें। बैठक में पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. नीरज मोहन सहित अन्य लोग मौजूद रहे।


80 फीसदी आबादी पशुपालन पर निर्भर
भारत में पशुपालन अग्रणी क्षेत्र है। ग्रामीण क्षेत्रों में 80 फीसदी आबादी पशुपालन पर निर्भर है जोकि देश की जीडीपी का 5.5 फीसदी हिस्सा है। 11.16 लाख करोड़ रुपये दुग्ध उत्पादन से कमाए गए हैं। देश में प्रति व्यक्ति 471 ग्राम प्रतिदिन दूध की उपलब्धता है और हिमाचल में 640 ग्राम प्रतिदिन है।

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