अब मोबाइल फोन से लगेगी शिक्षकों-विद्यार्थियों की हाजिरी
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सूबे के स्कूलों से गायब रहने वाले शिक्षकों पर अब मोबाइल फोन का पहरा लगने जा रहा है। मोबाइल से जहां शिक्षकों और विद्यार्थियों की ऑनलाइन हाजिरी लगेगी, वहीं विभागीय दिशा-निर्देश के साथ ही समस्याओं का निराकरण भी किया जाएगा।
यह सब डिजिटाइजेशन ऑफ स्कूल प्रोजेक्ट से संभव हो सकेगा। मंडी जिला में सफल प्रयोग के बाद अब प्रदेश भर के 17 हजार से अधिक निजी और सरकारी स्कूलों में यह व्यवस्था शुरू करने की तैयारी है।
डिजिटाइजेशन प्रोजेक्ट के तहत शिक्षा विभाग सभी स्कूलों की वेबसाइटों को अपनी अधिकृत साइट से इंटरकनेक्ट करेगा। ऐसा करने से एक क्लिक पर विभागीय निर्देश स्कूलों तक पहुंच जाएंगे।
स्कूलों की वेबसाइट को इंटरकनेक्ट करने से सूचना भेजने में देरी करने वाले स्कूल मुखिया की सीधी जवाबदेही तय होगी। समय पर विभागीय निर्देश स्कूलों तक न पहुंचने की बहानेबाजी भी खत्म हो जाएगी। प्रारंभिक चरण में स्कूली विद्यार्थियों की हाजिरी और पत्राचार किया जाएगा।
डिजिटाइजेशन ऑफ स्कूल प्रोजेक्ट के राज्य समन्वयक हेमराज शर्मा ने कहा कि सामाजिक संचार एवं शिक्षा समिति के माध्यम से यह प्रोजेक्ट चलेगा। उन्होंने दावा किया है कि इस तरह का सिस्टम देश ही नहीं बल्कि विश्व में और कहीं भी नहीं है।
ऐसे काम करेगा डिजिटाइजेशन प्रोजेक्ट
यदि स्कूल समय पर हाजिरी नहीं भरते हैं तो इंटरकनेक्ट वेबसाइट स्कूल की साइट पर हाजिरी केे कॉलम पर रेड अलर्ट देगी। इसकी मानीटरिंग जिला कार्यालय और निदेशालय में होगी।
स्कूल मुखिया को विभाग वेबसाइट चलाने के आईडी और पासवर्ड देगा, जिससे मोबाइल फोन से ही स्कूल मुखिया जरूरी निर्देशों की जानकारी लेने के साथ हर कक्षा के छात्रों की हाजिरी भरेंगे।
शिक्षकों की हाजिरी भी ऑनलाइन दर्ज होगी। यदि स्कूल मुखिया समय पर हाजिरी नहीं भरते हैं तो जिला के शिक्षा उपनिदेशक, निदेशक और स्वयं शिक्षा मंत्री को रेड अलर्ट की जानकारी स्वत: ही मिल जाएगी।
सालाना करोड़ों रुपये की होगी बचत
प्रदेश में वर्तमान में सरकारी क्षेत्र में 10722 प्राइमरी, 2120 मिडिल, 925 हाई और 1838 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल चल रहे हैं। निजी क्षेत्र में 1040 हाई स्कूल और 539 सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं। इन स्कूलों में पत्राचार का हर माह का खर्च औसतन एक हजार रुपये है।
एक वर्ष का यह खर्च 18 से 20 करोड़ रुपये है। जबकि, वेबसाइट से एक सरकारी स्कूल को इंटरकनेक्ट करने का खर्च महज 1500 और निजी स्कूल को इंटरकनेक्ट करने का खर्च 2500 रुपये है। इससे साल भर का खर्च महज ढाई करोड़ रुपये के करीब होगा।
मंडी के 420 उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में मार्च 2017 में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में व्यवस्था शुरू की थी। अब इसे पूरे प्रदेश में शुरू किया जा रहा है। - अशोक शर्मा, उच्च शिक्षा उपनिदेशक मंडी