राहुल की रैली में रोके जाने से नाराज बाली ने सीएम से पूछे सवाल
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परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा कि धर्मशाला में प्रदेश सरकार के चार वर्ष के सफल कार्यकाल के जश्न की 24 दिसंबर की रैली के दौरान पास होने के बावजूद उन्हें मंच पर जाने से रोका गया। उन्हें मंच पर जाने से रोकने का मकसद और मंशा क्या थी, यह जांच का विषय है।
कांगड़ा में पत्रकार वार्ता के दौरान बाली ने कहा कि कांगड़ा हवाई अड्डे पर राहुल गांधी के स्वागत के बाद वह स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर, आईपीएच मंत्री विद्या स्टोक्स के साथ धर्मशाला चले गए, लेकिन जब वह मंच पर चढ़ने लगे तो एसपीजी अधिकारी गोस्वामी ने उन्हें यह कहकर रोक दिया कि उनका नाम लिस्ट में नहीं है।
उन्होंने उन्हें दोबारा लिस्ट चेक करने को कहा, लेकिन लिस्ट में नाम न होने की वजह से वह वापस नगरोटा बगवां आ गए। अब इस मामले में चूक कहां हुई है, इसकी जांच करवाई जानी चाहिए। रैली प्रदेश सरकार की थी। ऐसे में मंच पर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री को जगह न देने से जिला और नगरोटा की जनता के लिए इस सवाल का जवाब बेहद जरूरी है।
मंच पर 45 कुर्सियां लगी थी, तब भी नहीं मिली जगह
बाली ने कहा कि इस बाबत उन्हें सैकड़ों फोन आ चुके हैं। मुख्यमंत्री पता लगाएं कि मामला क्या है। एसपीजी अधिकारियों ने अपनी ड्यूटी निभाई उनके पास जो लिस्ट थी, उसमें उन्होंने खुद देखा कि उनका नाम शामिल नहीं था।
बाली ने कहा कि रैली सरकारी थी ऐसे में प्रशासन की ड्यूटी बनती थी कि प्रोटोकोल के हिसाब से मंत्रियों और विधायकों को मंच पर बिठाने का प्रबंध किया जाता। मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि मंच पर 45 कुर्सियां विधायकों और मंत्रियों के लिए लगाईं गई थीं।
मगर हैरानी इस बात कि सदन में पार्टी के कुल 36 विधायक हैं। इनमें दो विधायक अनिरुद्ध सिंह और जगत सिंह नेगी रैली से अनुपस्थित रहे। जो लिस्ट एसपीजी के पास थी, उसमें 46 लोगों के नाम थे, मगर उनका नाम नहीं था।
भाजपा को दिया जाएगा माकूल जवाब
भाजपा की ओर से चार्जशीट में लगाए आरोपों के बारे में परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा कि तथ्य इकट्ठा किए जा रहे हैं। एक-दो दिन के भीतर शिमला में प्रेस कांफ्रेंस कर भाजपा को इसका माकूल जवाब दिया जाएगा।