निरीक्षण में हुआ खुलासा, यहां पांच सालों से किसी को नहीं मिली छात्रवृत्ति
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कबायली क्षेत्र स्पीति के सरकारी स्कूलों के एक भी विद्यार्थी को पिछले पांच सालों से छात्रवृत्ति नहीं दी गई। स्कूलों के मुखियाओं को केंद्र और राज्य सरकार की ओर से दी जा रही एक भी छात्रवृत्ति योजना की जानकारी नहीं है। उन्हें ई-पोर्टल का भी पता नहीं है जिसके तहत शिक्षा विभाग को आवेदन किए जाते हैं। इंस्पेक्शन विंग के निरीक्षण के दौरान यह खुलासा हुआ है।
छात्रवृत्ति योजना के लिए पांच सालों से घाटी के किसी भी स्कूल से एक भी विद्यार्थी का ऑनलाइन आवेदन नहीं हुआ। इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित स्कूल प्रबंधन की है। इंस्पेक्शन विंग के कार्यकारी उपनिदेशक सुरेश विद्यार्थी, बीपीईओ छेरिंग दोरजे ने कहा कि हिमाचल में निरीक्षण विंग स्थापित होने के बाद स्पीति घाटी के स्कूलों का पहली बार निरीक्षण किया गया।
इस दौरान छात्रवृत्ति योजनाओं को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस गैर जिम्मेदाराना रवैये के लिए स्कूल प्रबंधन दोषी हैं, लेकिन शिक्षा विभाग स्पीति की कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। निरीक्षण विंग ने छात्रवृत्ति योजना लागू करने में बरती गई लापरवाही की रिपोर्ट संयुक्त सचिव प्रारंभिक शिक्षा विभाग और एसडीएम काजा को भेज दी है।
सालाना मिलते हैं हजारों रुपये
स्पीति शिक्षा उप निदेशक का कार्यभार देख रहे एसडीएम काजा जीवन नेगी ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी। इस साल स्पीति घाटी के तमाम पात्र विद्यार्थियों का छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए पंजीकरण सुनिश्चित किया जाएगा। कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने कहा कि यह बड़ी लापरवाही हुई है। जांच के बाद जिम्मेदार अध्यापकों और अधिकारियों से इसकी पूरी रिकवरी की जाएगी।
सरकार की ओर से पोस्ट और प्री मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना शुरू की है। इसके तहत पात्र विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष 2700 रुपयेे छात्रवृत्ति दी जाती है। ऐसे विद्यार्थियों की एडमिशन और ट्यूशन फीस रिफंड की जाती है। गर्ल्स इंसेटिव स्कॉलरशिप के तहत नौवीं कक्षा में प्रवेश लेते ही लड़कियों को यह छात्रवृत्ति मिलती है।
18 साल आयु पूरी करने के बाद लड़कियों को तीन हजार रुपये मिलते हैं। यह छात्रवृत्ति सभी वर्गों के लिए लागू है। हिमाचल सरकार की टीएस नेगी स्कॉलरशिप के तहत दसवीं की बोर्ड परीक्षा में टॉप 100 की सूची में आने वाले छात्रों को जमा एक और जमा दो में प्रतिवर्ष 11-11 हजार रुपये मिलते हैं। आईआरडीपी स्कॉलरशिप के तहत छठी से आठवीं के बच्चों को प्रतिवर्ष 700 रुपये की छात्रवृत्ति दी जाती है।