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Shimla News: अंगदान का शपथ पत्र भरने के लिए नहीं काटने होंगे अस्पताल के चक्कर

Tue, 26 Sep 2023 06:42 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 26 Sep 2023 06:42 PM IST
सार

सोटो के नोडल अधिकारी डॉ. पुनीत महाजन ने प्रेसवार्ता में यह जानकारी दी। आईजीएमसी में आयुष्मान भव: कार्यक्रम के तहत सेवा पखवाड़ा चल रहा है। पखवाड़े में अंगदान के प्रति जागरूक किया जा रहा है। 

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No need to visit hospital to fill organ donation affidavit
सोटो की प्रेसवार्ता में मौजूद डॉक्टर। - फोटो : संवाद

विस्तार

अंगदान का शपथ पत्र भरने के लिए लोगों को अब अस्पताल के चक्कर नहीं काटने होंगे। कोई भी व्यक्ति अंगदान का शपथ पत्र सोटो की वेबसाइट पर जाकर यहां बने क्यूओर कोड स्कैन कर आसानी से भर सकता है। सोटो के नोडल अधिकारी डॉ. पुनीत महाजन ने प्रेसवार्ता में यह जानकारी दी। आईजीएमसी में आयुष्मान भव: कार्यक्रम के तहत सेवा पखवाड़ा चल रहा है। पखवाड़े में अंगदान के प्रति जागरूक किया जा रहा है। सोटो के नोडल अधिकारी डॉ. पुनीत महाजन ने बताया कि पूरे देश व प्रदेश में साइट पर बने क्यूआर कोड के जरिये तमाम औपचारिकताओं को पूरा करके यह फार्म भरा जा सकता है।

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उन्होंने बताया कि साइट पर क्यू ओर कोड के अलावा बीए आर्गन डोनर पर क्लिक करने पर शपथ के लिए पंजीकरण कर सकते हैं। इसमें और उसके बाद आधार नंबर डालना होगा। इसके बाद ओटीपी आएगा और फार्म नंबर 7 खुलेगा। इसमें व्यक्ति को पूरी जानकारी देनी होगी। जबकि परिवार के सदस्य का भी नंबर देना होगा। सभी औपचारिकता पूरी होने के बाद एक मैसेज परिवार के पंजीकृत सदस्य के नंबर पर भी जाएगा। जहां पर उक्त व्यक्ति को पता लगेगा कि परिवार के एक सदस्य ने अंगदान की शपथ ली है।
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इसके अलावा वह व्यक्ति अंगदान का शपथ पत्र भी पूरी प्रक्रिया के बाद डाउनलोड कर सकेगा। बता दें कि अब तक पूरे प्रदेश भर के करीब 1460 लोगों ने शपथ पत्र भरे हैं। जबकि ऑनलाइन माध्यम से 90 शपथ पत्र भरे जा चुके हैं । डॉ. पुनीत ने आग्रह किया वे इस कार्य में आगे आए। क्योंकि एक व्यक्ति अंगदान करके आठ लोगों का जीवन बचा सकता है। इस अवसर पर आईजीएमसी प्रिसिंपल डॉ. सीता ठाकुर, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव, नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रामलाल, सोटो के ज्वाइंट डॉयरेक्टर डॉ. शोमिन धीमान, सोटो के ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर नरेश व प्रोग्राम असिस्टेंट भारती कश्यप मौजूद रहीं।
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एक फीसदी लोग नेत्रदान के लिए नहीं आते आगे: डॉ. आरएल शर्मा
 आईजीएमसी के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रामलाल ने बताया कि पूरे प्रदेश में नेत्रदान व अंगदान को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में हर साल करीब 2100 मरीजों की मौत होती है, लेकिन एक फीसदी लोग भी नेत्रदान के लिए आगे नहीं आते हैं। कहा कि आईजीएमसी में मौजूदा समय तक 336 नेत्रदान हुए हैं।

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