पंचायत प्रधानों को झटका, वित्तीय शक्तियां छीनने की तैयारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश सरकार पंचायत प्रधानों की वित्तीय शक्तियां छीन सकती है। जिला परिषद और बीडीसी सदस्यों के बाद अब प्रधानों के पास वित्तीय शक्तियां नहीं होंगी। सरकार यह शक्तियां बीडीओ और पंचायत सचिवों को देगी। प्रदेश सरकार यह फैसला इसलिए लेने जा रही है कि पंचायतों के विकास कार्यों में गड़बड़ी होती है। ऐसे में पंचायत प्रधानों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती।
अधिकारियों के पास यह शक्तियां रहने से उन पर कार्रवाई हो सकेगी। पंचायत प्रधानों का काम सिर्फ पंचायतों के लिए योजनाएं बनाना और पंचायतों के विकास कार्यों की गुणवत्ता पर निगरानी रखना होगा। योजनाओं के प्रस्ताव ग्राम सभा में पास होगा। यहा स्वीकृति मिलने के बाद यह मामला कमेटी के पास जाएगा। पैसा जारी करने की पावरें बीडीओ और पंचायत सचिवों के पास रहेगी।
विकास पर खर्च नहीं हो रहा पैसा, मिल रही शिकायतें
प्रदेश सरकार को पहले भी शिकायतें मिली है कि पंचायतों के लिए जारी पैसा विकास कार्यों में कम खर्च हो रहा है। जितना पैसा पंचायतों के विकास कार्यों को जारी होता है उतना पैसा अगर सही मायने में खर्च किया जाएं तो पंचायतें अपने आप को आत्म निर्भर हो सकती थी।
पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा का कहना है कि पंचायतों के विकास कार्यों का पैसा बीडीओ और पंचायत सचिवों को पास जाएगा। प्रधानों से यह शक्तियां वापस ली जा रही हैं। अगर पैसा का सही इस्तेमाल या कार्यों में गड़बड़ी पाई जाती है तो अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।