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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   no Chances of increase in electricity rates this year due to coronavirus, only covid cess will impose

इस साल बिजली दरें बढ़ने की संभावना कम, सिर्फ कोविड सेस लगेगा

Wed, 13 May 2020 09:59 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 13 May 2020 09:59 AM IST
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no Chances of increase in electricity rates this year due to coronavirus, only covid cess will impose
सांकेतिक तस्वीर

 वैश्विक महामारी कोरोना के चलते इस साल प्रदेश में बिजली की दरें बढ़ने की संभावना कम ही है। मंगलवार शाम तक विद्युत नियामक आयोग के पास ई-मेल से दर्ज हुए सुझाव और आपत्तियों में अधिकांश लोगों ने इस कठिन दौर में बिजली दरें न बढ़ाने की मांग की है। आयोग ने अब सुझाव और आपत्तियों पर मंथन शुरू कर दिया है। संभावित है कि 25 मई तक बिजली दरों को लेकर घोषणा हो जाएगी।

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प्रदेश सरकार बिजली के प्रति यूनिट स्लैब पर कोविड सेस लगाने का भी विचार कर रही है। बीते दिनों हुई कैबिनेट बैठक में इसको लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बिजली बोर्ड से इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी गई है। ऐसे में आसार जताए जा रहे हैं कि प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं पर दोहरा आर्थिक बोझ सरकार नहीं डालेगी। प्रति स्लैब पर ही कोविड सेस लगाकर राजस्व जुटाने का प्रयास किया जाएगा। 
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उल्लेखनीय है कि राज्य बिजली बोर्ड ने विद्युत नियामक आयोग से बिजली दरों में 8.73 फीसदी की बढ़ोतरी मांगी है। 487 करोड़ के राजस्व घाटे का हवाला देते हुए वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 6000 करोड़ के वार्षिक राजस्व की जरूरत बताई गई है। बीते साल के मुकाबले इस बार बोर्ड ने 882 करोड़ की अधिक मांग की है। बोर्ड ने आयोग को भेजी पिटीशन में हिमाचल के 21 लाख घरेलू उपभोक्ताओं और 30 हजार औद्योगिक घरानों को दी जाने वाली बिजली सप्लाई को 8.73 फीसदी की दर से बढ़ाने की मांग की है।
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साल 2019 में आयोग ने बोर्ड के 5117.95 करोड़ के वार्षिक राजस्व जरूरत को पूरा करने के लिए घरेलू बिजली प्रति यूनिट पांच पैसे और उद्योगों को दी जाने वाली बिजली को 10 पैसे प्रति यूनिट की दर से बढ़ाया था। इसके बावजूद बोर्ड को 2019-20 में 487.88 करोड़ का घाटा हुआ है। ऐसे में बोर्ड ने 2020-21 के लिए 6000.52 करोड़ के वार्षिक राजस्व जरूरत का प्रस्ताव आयोग को भेजा है। साल 2017-18 और 2018-19 में घरेलू बिजली की दरें नहीं बढ़ाई थीं। साल 2016 में घरेलू बिजली साढ़े तीन फीसदी महंगी हुई थी। 

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