{"_id":"60f437dc8ebc3e6d687045b2","slug":"nit-hamirpur-semi-automated-trolley-help-to-change-oxygen-cylinder","type":"story","status":"publish","title_hn":"एनआईटी के छात्र ने तैयार की सेमी ऑटोमेटेड ट्रॉली, अब एक कर्मचारी ही आसानी से बदल सकेगा ऑक्सीजन सिलिंडर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एनआईटी के छात्र ने तैयार की सेमी ऑटोमेटेड ट्रॉली, अब एक कर्मचारी ही आसानी से बदल सकेगा ऑक्सीजन सिलिंडर
Sun, 18 Jul 2021 07:53 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, हमीरपुर
अमर उजाला नेटवर्क, हमीरपुर
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 18 Jul 2021 07:53 PM IST
सार
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के विद्यार्थी रजत अनंत ने प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू किया। उन्होंने दो माह के भीतर ही छोटे भाई मोहित अनंत की मदद से सेमी-ऑटोमेटेड ट्रॉली का मॉडल तैयार किया है।
विज्ञापन
सेमी ऑटोमेटेड ट्रॉली के मॉडल का निरीक्षण करतीं डीसी देवश्वेता बनिक।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एनआईटी हमीरपुर के विद्यार्थी रजत अनंत ने ऑक्सीजन सिलिंडर बदलने और अस्पताल के भीतर इन्हें आसानी से लाने और ले जाने के लिए सेमी ऑटोमेटिड ट्रॉली तैयार की है। हमीरपुर की युवा आईएएस देवश्वेता बनिक के प्रोत्साहन से रजत अनंत ने यक कामयाबी हासिल की है। कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर एनआईटी के विद्यार्थी की इस इनोवेशन में कई संभावनाएं नजर आ रही हैं।
विज्ञापन
डीसी देवश्वेता बनिक ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही थी। ऑक्सीजन सिलिंडर बार-बार बदलने तथा इन्हें अस्पताल की एक से दूसरी मंजिल तक ले जाने में स्वास्थ्य कर्मचारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही थी। एक सिलिंडर बदलने में भी काफी समय लग रहा था। इस कार्य में 5-6 लोगों की सेवाएं लेनी पड़ रही थीं। बाजार में भी कोई सेमी-ऑटोमेटेड ट्रॉली उपलब्ध नहीं थी।
विज्ञापन
उन्होंने एनआईटी के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष डॉ. आरके जरयाल और मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार के साथ इस समस्या पर चर्चा की। इंजीनियरिंग एक्सपर्ट की मदद से सेमी-ऑटोमेटेड ट्रॉली विकसित करने का आग्रह किया। एनआईटी निदेशक डॉ. ललित अवस्थी की अनुमति से दोनों विभागों ने इस दिशा में तेजी से कार्य शुरू किया।
विज्ञापन
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के विद्यार्थी रजत अनंत ने इस प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू किया। उन्होंने दो माह के भीतर ही छोटे भाई मोहित अनंत की मदद से एक ऐसी सेमी-ऑटोमेटेड ट्रॉली का मॉडल तैयार किया है, जिसके माध्यम से केवल एक व्यक्ति ही ऑक्सीजन सिलिंडर अस्पताल की एक से दूसरी मंजिल तक आसानी से ले जा सकता है। खाली सिलिंडर भी बहुत कम समय में बदल सकता है।
पिछले महीने ही बीटेक की डिग्री पूरी करने वाले रजत अनंत प्रतिभाशाली विद्यार्थी हैं। पिछले वर्ष भी उन्होंने इलेक्ट्रिकल चार्ज वाहन से संबंधित एक प्रोटोटाइप तैयार किया था। जिलाधीश ने बताया कि रजत अनंत के नए आविष्कार को मुख्यमंत्री स्टार्ट अप योजना में शामिल करवाने के लिए भी उद्योग विभाग के माध्यम से आवेदन कर दिया गया है। एनआईटी प्रबंधन भी इसके पेटेंट से संबंधित औपचारिकताएं पूरी कर रहा है। इस प्रोजेक्ट में एडीएम जितेंद्र सांजटा और डीएसपी रोहिन डोगरा ने भी रिसर्च टीम के साथ समन्वय स्थापित कर सराहनीय योगदान दिया।