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Shimla News: तारादेवी मंदिर में अष्टमी पर नौ हजार श्रद्धालुओं ने टेका माथा
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अखंड चंडी पाठ का हवन और नौ कन्याओं का हुआ पूजन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के तारादेवी मंदिर में रविवार को गुप्त नवरात्र की अष्टमी पर हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। मंदिर में सात दिन से चल रहे अखंड चंडी पाठ का हवन हुआ। इसके साथ ही कन्या पूजन किया गया। इस दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहा। सुबह 8:00 बजे से माता तारा के दर्शनों के श्रद्धालुओं की कतारें लग गईं। देर शाम तक नौ हजार श्रद्धालुओं ने माथा टेका और मां भगवती का आशीर्वाद लिया।
सुबह 5:30 बजे तारादेवी मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए थे। इसके बाद मां भगवती का अभिषेक किया गया। भव्य शृंगार कर माता की महाआरती उतारी गई। इस दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। पहले नवरात्र से ब्राह्मणों की ओर से मंदिर में किए जा रहे अखंड चंडी पाठ का भोग हुआ। सुबह 7:30 बजे हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। सुबह 11:30 बजे हवन में पूर्णाहुति डाली गई। मंदिर न्यासियों और श्रद्धालुओं ने पूर्णाहुति डालकर माता का आशीर्वाद लिया। इसके बाद माता के नौ रूपों के रूप में नौ कन्याओं और एक वटुक का पूजन किया गया। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित कमलेश ने बताया कि गुप्त नवरात्रि पर मां भगवती की 10 महाविद्याओं की विधि- विधान के साथ पूजा की गई। पहले गुप्त नवरात्र से रखे अखंड चंडी पाठ का भोग डाला गया। उन्होंने बताया कि देर शाम तक नौ हजार श्रद्धालुओं ने तारा माता के आगे शीश नवाया और आशीर्वाद लिया।
श्रद्धालुओं ने टौर के पत्तल में चखा भंडारा
शिमला। तारादेवी मंदिर में रविवार को श्रद्धालुओं ने टौर की पत्तल में भंडारा चखा। जिला प्रशासन की ओर से तारादेवी मंदिर से रविवार को टौर की पत्तल में भंडारा परोसने की शुरुआत की गई। अब चरणबद्ध तरीके से शिमला जिले के सभी मंदिरों में यह व्यवस्था लागू की जाएगी। हिमाचल में धाम पहले टौर के पत्तल में परोसी जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे इनकी जगह प्लास्टिक की पत्तलों ने ले ली। अब ज्यादातर धाम के आयोजनों में प्लास्टिक की प्लेटों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे प्लास्टिक सेहत को तो नुकसान देता ही है साथ में पर्यावरण के लिए भी प्लास्टिक खतरा है। ऐसे में संस्कृति और धरोहर को सहेजने की दिशा में शिमला के ऐतिहासिक मंदिर तारा देवी में संतुलित पर्यावरण के लिए टौर के पत्तों से तैयार पत्तल में भंडारा परोसना शुरू किया गया। उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने बताया कि अपनी संस्कृति और धरोहर को सहेजने की दिशा में संतुलित पर्यावरण के लिए तारा देवी मंदिर में टौर के पत्तों से तैयार पत्तल में लंगर परोसा जाएगा। कहा कि जिला ग्रामीण विकास प्राधिकरण के अधीन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत सुन्नी खंड में कार्य कर रहे सक्षम क्लस्टर लेवल फेडरेशन को यह पत्तल बनाने का जिम्मा दिया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के तारादेवी मंदिर में रविवार को गुप्त नवरात्र की अष्टमी पर हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। मंदिर में सात दिन से चल रहे अखंड चंडी पाठ का हवन हुआ। इसके साथ ही कन्या पूजन किया गया। इस दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहा। सुबह 8:00 बजे से माता तारा के दर्शनों के श्रद्धालुओं की कतारें लग गईं। देर शाम तक नौ हजार श्रद्धालुओं ने माथा टेका और मां भगवती का आशीर्वाद लिया।
सुबह 5:30 बजे तारादेवी मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए थे। इसके बाद मां भगवती का अभिषेक किया गया। भव्य शृंगार कर माता की महाआरती उतारी गई। इस दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। पहले नवरात्र से ब्राह्मणों की ओर से मंदिर में किए जा रहे अखंड चंडी पाठ का भोग हुआ। सुबह 7:30 बजे हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। सुबह 11:30 बजे हवन में पूर्णाहुति डाली गई। मंदिर न्यासियों और श्रद्धालुओं ने पूर्णाहुति डालकर माता का आशीर्वाद लिया। इसके बाद माता के नौ रूपों के रूप में नौ कन्याओं और एक वटुक का पूजन किया गया। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित कमलेश ने बताया कि गुप्त नवरात्रि पर मां भगवती की 10 महाविद्याओं की विधि- विधान के साथ पूजा की गई। पहले गुप्त नवरात्र से रखे अखंड चंडी पाठ का भोग डाला गया। उन्होंने बताया कि देर शाम तक नौ हजार श्रद्धालुओं ने तारा माता के आगे शीश नवाया और आशीर्वाद लिया।
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श्रद्धालुओं ने टौर के पत्तल में चखा भंडारा
शिमला। तारादेवी मंदिर में रविवार को श्रद्धालुओं ने टौर की पत्तल में भंडारा चखा। जिला प्रशासन की ओर से तारादेवी मंदिर से रविवार को टौर की पत्तल में भंडारा परोसने की शुरुआत की गई। अब चरणबद्ध तरीके से शिमला जिले के सभी मंदिरों में यह व्यवस्था लागू की जाएगी। हिमाचल में धाम पहले टौर के पत्तल में परोसी जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे इनकी जगह प्लास्टिक की पत्तलों ने ले ली। अब ज्यादातर धाम के आयोजनों में प्लास्टिक की प्लेटों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे प्लास्टिक सेहत को तो नुकसान देता ही है साथ में पर्यावरण के लिए भी प्लास्टिक खतरा है। ऐसे में संस्कृति और धरोहर को सहेजने की दिशा में शिमला के ऐतिहासिक मंदिर तारा देवी में संतुलित पर्यावरण के लिए टौर के पत्तों से तैयार पत्तल में भंडारा परोसना शुरू किया गया। उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने बताया कि अपनी संस्कृति और धरोहर को सहेजने की दिशा में संतुलित पर्यावरण के लिए तारा देवी मंदिर में टौर के पत्तों से तैयार पत्तल में लंगर परोसा जाएगा। कहा कि जिला ग्रामीण विकास प्राधिकरण के अधीन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत सुन्नी खंड में कार्य कर रहे सक्षम क्लस्टर लेवल फेडरेशन को यह पत्तल बनाने का जिम्मा दिया है।
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