अवैध निर्माण पर एनजीटी का बड़ा फैसला, तीन महीने की मोहलत दी
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कसौली में अंधाधुंध अवैध निर्माण मामले में सुनवाई करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने बड़ा फैसला लिया है। एनजीटी ने हिमाचल समेत सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि वे तीन महीने के अंदर हिल स्टेशनों और ईको सेंसिटिव जोन का क्षमता अध्ययन कराएं।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को भी निर्देश दिए हैं कि वह इस अध्ययन को एक महीने में गाइडलाइन तैयार कर एनजीटी को अवगत कराए। इस अध्ययन के बाद ही तय होगा कि हिल स्टेशनों और ईको सेंसिटिव जोन में निर्माण जारी रहेगा या नहीं। एनजीटी ने कसौली में निर्माण पर प्रतिबंध भी लगा दिया है।
कसौली में हुए अवैध निर्माण के बाद स्थानीय लोगों ने एनजीटी का दरवाजा खटखटाया था। लंबी सुनवाई के बाद एनजीटी ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को निर्देश दिए हैं कि वह देशभर में अधिसूचित हिल स्टेशनों और ईको सेंसिटिव जोन की कैरिंग कैपेसिटी के आंकलन को गाइडलाइन बनाए।
सूची में उन हिल स्टेशनों और ईको सेंसिटिव जोन की सूची भी देने को कहा है, जहां क्षमता अध्ययन कराना जरूरी है। गाइडलाइन तैयार करने को 30 नवंबर तक मियाद तय की है। इसके पीछे कारण दिया है कि इन क्षेत्रों में अनियंत्रित तरीके से हो रहे निर्माण से वहां के पर्यावरण को खतरा हो गया है।
इस गाइडलाइन व सूची के बनने के बाद सभी संबंधित राज्यों को तय गाइडलाइन के आधार पर तीन महीने के अंदर हिल स्टेशनों और ईको सेंसिटिव जोन के क्षमता आंकलन अध्ययन कराना होगा। एनजीटी के इस आदेश के बाद हिल स्टेशनों व ईको सेंसिटिव जोन में होने वाले निर्माण कार्यों का भविष्य अधर में लटक गया है।