रिपोर्ट दाखिल न करने पर हिमाचल सरकार को ठोका एक लाख का जुर्माना
हिमाचल प्रदेश में कुल्लू और मनाली के होटल व उद्योगों की जांच रिपोर्ट नहीं दाखिल करने के लिए राज्य सरकार पर एक लाख रुपये जुर्माना लगाया है। निर्धारित अवधि के बाद भी यह रिपोर्ट ट्रिब्यूनल में दाखिल नहीं की गई। राज्य सरकार की तरफ से इस रिपोर्ट को चरणबद्ध तरीके से दाखिल करना था।
पहले चरण की रिपोर्ट को लेकर हिमाचल प्रदेश के अधिवक्ता बार-बार एनजीटी के समक्ष या तो झूठे बहाने बनाते हैं या फिर मोहलत मांगते रहे। इससे नाराज एनजीटी ने राज्य पर जुर्माना लगाया। ट्रिब्यूनल ने यह कहते हुए कि बीते आश्वासन को ध्यान में रखते हुए इस बार राज्य पर यकीन करना मुश्किल है फिर भी अंतिम बार 28 मार्च तक की मोहलत दी जाती है।
पीठ ने चेताया है कि यदि इस बार चूक हुई तो प्रतिदिन पांच हजार रुपये के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा। जस्टिस आरएस राठौर की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को रमेश चंद मामले में यह आदेश दिया है।
राज्य को एक लाख रुपये जुर्माने की यह राशि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास जमा करने को कहा गया है। पीठ ने चेताया कि प्रथम चरण की रिपोर्ट सकारात्मक तरीके से तैयार कर समय के साथ दाखिल की जानी चाहिए। एनजीटी ने बीते वर्ष कुल्लू-मनाली में समिति गठित कर होटल और उद्योगों की जांच के लिए 7 दिसंबर को आदेश दिया था।
एनजीटी ने कहा कि इस बार आखिरी मौका
इसके बाद 11 जनवरी, 2018 को भी हिमाचल प्रदेश को कुल्लू-मनाली के पूरे इलाके की जांच रिपोर्ट को चरणबद्ध तरीके से दाखिल करने को कहा था। इसके तहत पहली रिपोर्ट 6 मार्च को दाखिल की जानी थी। हालांकि हिमाचल प्रदेश ने रिपोर्ट दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का और वक्त मांगा।
इसके बाद 8, 12 और 19 मार्च को भी मामले पर सुनवाई हुई। हर बार रिपोर्ट दाखिल करने के लिए मोहलत मांगी गई। बावजूद इसके अभी तक रिपोर्ट नहीं दाखिल हुई।
इतना ही नहीं जांच के दौरान अवैध होटलों और उद्योगों के पंजीकरण को रद्द करने व बिजली-पानी कनेक्शन काटने के मामले में अधिवक्ता ने गुमराह किया कि सुप्रीम कोर्ट से कुछ लोगों ने अंतरिम आदेश के तहत रोक लगवाई है।
जबकि सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोई ऐसा आदेश नहीं दिया गया। पीठ ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की ओर से आदेशों का अभी तक पालन नहीं किया गया। मामले पर 10 अप्रैल को सुनवाई होगी।