अगले महीने तय होगा उ. भारत के सबसे बडे रोप-वे का भविष्य
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उत्तर भारत के सबसे बड़े एरियल रोप-वे की तकदीर का फैसला अगले माह हो सकता है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। रियासत के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल में लगने वाले गंडोले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अंतिम फैसले का इंतजार हो रहा है।
सेंट्रल इंपावरमेंट कमेटी द्वारा भी इसका जायजा लेकर कुछ परिवर्तन करते हुए अपनी रिपोर्ट उच्च स्तर पर सौंप दी गई थी। जानकारी के मुताबिक चिनैनी तहसील के टमाटर मोड़ से गंडोले की शुरुआत होगी।
कुल पौने चार किलोमीटर लंबे इस रोप-वे में करीब 17 टवार लगाए जाएंगे। वर्ष 2007 के मई में सबसे विकसित पर्यटन स्थल पत्नीटाप पर महत्वाकांक्षी परियोजना का आगाज किया गया था।
स्थानीय लोगों को होगा फायदा
अनुमान के अनुसार पहले 49 करोड़ की लागत से एरियल रोप-वे तैयार होना था। रिवाइज करने के बाद 52 करोड़ और फिर 55 करोड़ लागत अनुमानित हुई, लेकिन यह फिर रिवाइज होगी। इस रोप-वे के लिए बाकायदा तत्कालीन मुख्यमंत्री ने नींव भी रखी थी।
गौरतलब है कि 2010 में स्थानीय लोगों से राय लेने की मुहिम भी चलाई गई थी। सौ फीसदी लोग प्रोजैक्ट के हक में थे। अब सभी कि निगाहें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर है। उम्मीद है कि पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाई मिलेगी।
गंडोला लगने से बढ़ेगा पत्नीटाप में रोजगार गंडोला लगने से पत्नीटाप में न सिर्फ सैलानियों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि यहां रोजगार के अवसर भी खुलेंगे। टमाटर मोड़ जहां से गंडोले की शुरुआत होगी, वहां पर लोग पहले से ही दुकानें खोलने के इंतजार में हैं।
पत्नीटाप से बढ़ेगा पर्यटन
जबकि संगोत गांव में भी सैलानियों के रुकने के लिए और उन्हें आकर्षण करने के लिए कुछ व्यू प्वाइंट होंगे। इसके अलावा करलाह पत्नीटाप में भी सैलानियों को आकर्षित करने के लिए सुविधाएं दी जाएगी।
उसके बाद कुद, पत्नीटाप क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। कई सैलानी चिनैनी-नाशरी टनल से नहीं, बल्कि गंडोले की सैर कर आगे बढ़ेंगे।
सुप्रीम कोर्ट में आखिरी तारीख अगले माह लगेगी, जिसमें इस पर फैसले की उम्मीद है। केंद्रीय इंपावर कमेटी ने भी इसमें कुछ परिवर्तन कर रिपोर्ट सौंपी है।