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सुई चुभोकर हो रही थी हत्या, आखिरकार लगी पाबंदी

Tue, 16 Dec 2014 10:33 AM IST
Updated Tue, 16 Dec 2014 10:33 AM IST
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new technology will be adopted at bird museum shimla.

राजधानी शिमला के चौड़ा मैदान स्थित पक्षीशाला में अंडों में सुई चुभोकर दुर्लभ पक्षियों की हत्या नहीं की जाएगी। पक्षियों के अंडों से प्राकृतिक या कृत्रिम तरीके से चूजे तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इन चूजों के परिंदे बनते ही उन्हें जंगलों में छोड़ दिया जाएगा, जिसका पूरा रिकार्ड रखा जाएगा।

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अमर उजाला की खबर का संज्ञान लेते हुए सोमवार को मुख्य अरण्यपाल वन्यजीव शिमला, पीएल चौहान ने पक्षीशाला का दौरा किया। इसका प्रस्ताव तैयार करने के लिए वेटनरी डॉक्टर को आदेश दिया। उन्होंने माना कि अंडों में सुई चुभोकर पक्षी को मारना कोई विकल्प नहीं है।
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अंडे पक्षी का रूप लें, इसके लिए जरूरत के अनुसार हैचिंग कराई जाएगी। इतना ही नहीं बल्कि प्रदेश में अन्य पक्षीशालाओं से परिंदों के स्थान में बदलाव किया जाएगा। यानी सराहन के पक्षी को शिमला और शिमला के पक्षी को सिरमौर भेजा जाएगा जिससे ब्रीडिंग ठीक हो पाए।
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एक साल में 25 अंडे

new technology will be adopted at bird museum shimla.

शिमला के चौड़ा मैदान स्थित पक्षीशाला में 43 पक्षियों के पूरे साल में 25 से अधिक अंडे होते हैं। यानी इन अंडों से साल में 25 से अधिक परिंदों का जन्म हो सकता है। जंगलों में परिंदों के घटने से यह अहम हो सकता हैं।

क्या है मामला
‘अंडों में सुई चुभोकर मारे जा रहे दुर्लभ परिंदे’ खबर को ‘अमर उजाला’ ने तीन दिसंबर के अंक में प्रमुखता से छापा। इसमें शिमला के चौड़ा मैदान स्थित वन विभाग की पक्षीशाला में दुर्लभ पक्षियों के अंडे सुई चुभोकर नष्ट करने की बात का खुलासा किया गया है। यह मामला विस के शीतकालीन सत्र में भी उठा।

पक्षीशाला में 43 पक्षी
इस पक्षीशाला में सात प्रजातियों के 43 पक्षी हैं। इनमें 16 जंगली लाल मुर्गे, पांच काले मुर्गे, चीर फीजेंट, छह सिल्वर फीजेंट चार इंडियन गूज, तीन मोर, तीन मोनाल हैं। वन्यजीव शिमला के मुख्य अरण्यपाल पीएल चौहान ने बताया कि अब पक्षीशाला में अंडों में सुई नहीं चुभोई जाएगी। अंडों से परिंदे बनें, इसके प्रयास शुरू कर दिए हैं। जल्द इस केंद्र को एक नए स्वरूप में सामने लाया जाएगा।

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