फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   new study on himalaya reveals possibility of earthquake.

हिमालयी क्षेत्रों में तेज हलचल, बड़े भूकंप का खतरा

Thu, 26 Nov 2015 11:46 AM IST
Updated Thu, 26 Nov 2015 11:46 AM IST
विज्ञापन
new study on himalaya reveals possibility of earthquake.

हिमालय क्षेत्र में बढ़ती भूगर्भीय हलचल से कभी भी भूकंप के बड़े झटके आ सकते हैं। इनकी तीव्रता अतीत में आए भूकंप से कई गुणा अधिक हो सकती है। इसका कारण वैज्ञानिक इंडियन टेक्टोनिक्स प्लेट का यूरेशियन प्लेट के नीचे लगातार दबना बता रहे हैं।

विज्ञापन


इसी के मद्देनजर वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी चंबा, तीसा, भरमौर, नड्डी और रिवालसर सहित अन्य चुनिंदा क्षेत्रों में दस से पंद्रह सिस्मोग्राफ यानी भूकंप की तीव्रता मापने वाले यंत्र लगाने जा रहा है। वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया है कि पिछले कुछ समय में इंडियन टेक्टोनिक्स प्लेट लगातार यूरेशियन टेक्टोनिक्स प्लेट के नीचे दब रही हैं।
विज्ञापन


इससे हिमालय तथा इससे जुड़े क्षेत्रों में रोजाना भूकंप के झटके आ रहे हैं। दोनों टेक्टोनिक्स प्लेट हिमाचल प्रदेश के भरमौर-कांगड़ा क्षेत्र में एक-दूसरे से आकर मिलती हैं। ऐसे में यह भूगर्भीय हलचल स्वयं भूकंप पैदा कर रही है। इसका अन्य क्षेत्रों की भूगर्भीय गतिविधियों से कुछ लेना-देना नहीं है। कांगड़ा और चंबा में वर्ष 2005 में 8.1 तीव्रता का आया भूकंप भी इंडियन और यूरेशियन प्लेट की देन था।
विज्ञापन
विज्ञापन

इंडियन प्लेट पर भरमौर से तिब्बत का इलाका

new study on himalaya reveals possibility of earthquake.

इंडियन प्लेट के साथ भरमौर, कांगड़ा और यूरेशियन प्लेट के साथ लाहौल-स्पीति और तिब्बत जैसे आबाद क्षेत्र हैं। अगर भविष्य में भूकंप का बड़ा झटका लगता है तो सबसे अधिक इन्हीं क्षेत्रों पर अपना प्रभाव दिखाएगा।

नकारी नहीं जा सकती बड़े भूकंप की संभावना
वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर सुशील ने बताया कि स्थिति बेहद गंभीर है। भूकंप के बड़े झटके आने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। शोध भी बताता है कि इंडियन और टेक्टोनिक्स प्लेट के आपसी गतिरोध से भूगर्भीय हलचल उच्च स्तर तक पहुंच रही है।

9579 ग्लेशियरों पर मंडरा रहा खतरा

new study on himalaya reveals possibility of earthquake.

वहीं, जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय के 9,579 ग्लेशियरों पर खतरा मंडरा है। इसे देखते हुए पर्यावरण मंत्रालय ने हिमालय की पारिस्थितिकी के संरक्षण के लिए नया रोडमैप बनाने का निर्णय लिया है। संयुक्त राष्ट्र के फ्रेमवर्क में जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के लिए तय राष्ट्रीय लक्ष्य में हिमालयीय इको सिस्टम के बचाव को उच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

इसके तहत जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में प्रोफेशनल्स के प्रशिक्षण की भी योजना है। पेरिस के विश्व सम्मेलन में भारत की ओर से हिमालय को बचाने के लिए उठाए गए कदमों और भावी योजनाओं को विस्तार से रखा जा सकता है। पर्यावरण मंत्रालय ने नेशनल मिशन ऑन हिमालयन स्टडीज के तहत हिमालय के ग्लेशियरों, वनों, जल और भूमि की सतत निगरानी की योजना बनाई है। देहरादून के वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के अधीन ग्लेशियरों के लिए एक अलग राष्ट्रीय केंद्र बनाया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed