{"_id":"d91f234cda69eee19d46d4cd000abcd6","slug":"new-facts-found-in-investigation-report-of-antique-bell-stolen-case-iias-shimla-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एडवांस स्टडी से घंटा चोरी मामले में नया खुलासा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एडवांस स्टडी से घंटा चोरी मामले में नया खुलासा
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 14 Sep 2015 12:32 PM IST
विज्ञापन
एडवांस स्टडी से कीमती ऐतिहासिक भारी भरकम घंटा चोरी मामले में तहकीकात कर रही एसआईटी ने उस समय की जांच पर कई सवाल खड़े किए हैं। एसआईटी का दावा है कि संबंधित अफसर से उस समय रिपोर्ट लिखने में चूक हुई है। अब तक इस मामले में आधा दर्जन संदिग्धों से पूछताछ हो चुकी है।
विज्ञापन
शुरूआती जांच में एसआईटी ने पाया कि पुलिस के संबंधित अफसर से भी रिपोर्ट लिखने में कुछ चूक रही है। घंटा चोरी के बाद ए़डवांस स्टडी के पिछले गेट से बाहर किया गया इसका उल्लेख रिपोर्ट में नहीं हुआ। वारदात वाले दिन घटनास्थल पर केवल एक चौकीदार मौजूद था, वह विकलांग था। दूसरा चौकीदार गायब था।
विज्ञापन
एसआईटी इस दिशा में भी काम कर रही है कि कहीं घंटा चोरी एडवांस स्टडी प्रबंधन की ओर से बताए गए समय से कहीं पहले हो गया हो? इस बारे में भी एसआईटी की ओर से एडवांस स्टडी प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। एडवांस स्टडी की ओर से पुलिस को दी जानकारी में साफ हो गया है कि वारदात वाले दिन यहां आने जाने वाली गाड़ियों के नंबर नोट नहीं किए गए हैं।
विज्ञापन
यहां सीसीटीवी की भी कोई व्यवस्था नहीं थी। इस बात का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए कि इस घंटे को जब बाहर ही रखा गया था तो उसकी सुरक्षा के इंतजाम में क्यों ढील बरती गई? मामले में जिस भी व्यक्ति को संदेहास्पद बताया गया उनसे पूछताछ चल रही है।
यह भारी भरकम घंटा अष्टधातु से बना बताया जा रहा है। 1903 में तत्कालीन नेपाल नरेश राजा रत्न बहादुर सिंह ने यह गिफ्ट दिया था। यह घंटा मुख्यद्वार से कुछ कदम दूर रिसेप्शन के सामने बरामदे में लगा था। यह घंटा छत में लकड़ी की चौखट में लगा रखा था। चोर लकड़ी की चौखट समेत घंटा उखाड़ ले गए।
अब तक यही अंदेशा जताया जा रहा है कि घंटा चोरी के पीछे इंटरनेशनल गैंग का हाथ है। स्थानीय संलिप्तता के बिना वारदात को अंजाम दे पाना भी संभव प्रतीत नहीं होता, लेकिन कई अफसरों के हाथों से गुजरी जांच में अब तक इस मामले का कोई सुराग नहीं लग पाया है।
इस तरह का घंटा प्राइजलेस होता है। ऐसा दावा किया जाता है कि इंटरनेशनल मार्केट में इसकी मुंहमांगी कीमत दी जाती है। अष्टधातु के साथ- साथ यह घंटा राइस पुलिंग है। राइस पुलिंग ऐसी धातु होती है जो चावल को अपनी ओर आकर्षित करती है।
एएसपी सिटी भजन देव नेगी ने कहा कि एसआईटी मामले के हर पहलु पर जांच कर रही है। एडवांस स्टडी प्रबंधन से पूछा गया है कि इस बात का क्या प्रमाण है कि घंटा उसी रात ही चोरी हुआ है।