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सुविधा: नेरचौक कैंसर अस्पताल तैयार, अब लगेंगी आधुनिक मशीनें, आईजीएमसी, टांडा और पीजीआई जाने से मिलेगी राहत

Mon, 21 Feb 2022 01:52 PM IST
अरविन्द ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी/नेरचौक
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी/नेरचौक Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 21 Feb 2022 01:52 PM IST
सार

मेडिकल कॉलेज नेरचौक के समीप कैंसर अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है। इसमें आधुनिक उपकरणों के साथ कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी की सुविधा होगी। चार नई थेरेपी में भी कैंसर रोगियों का इलाज होगा। 45 करोड़ से बहुमंजिला अस्पताल भवन तैयार है।

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nerchowk cancer hospital in Mandi himachal pradesh
नेरचौक में कैंसर अस्पताल का भवन। - फोटो : संवाद

विस्तार

नेरचौक कैंसर अस्पताल में पीड़ितों का बेहतर तरीके से इलाज होगा। आईजीएमसी, टांडा और पीजीआई चंडीगढ़ के अलावा अब मंडी के नेरचौक में जल्द कैंसर रोगियों का उपचार होगा। इसमें मिलने वाली लीनियर एक्सीलरेटर, कोबाल्ट ब्रेकी थेरेपी, पैलिएटिव कीमोथेरेपी मेटास्टेटिक और लोपरोस्कोपी की अत्याधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। आईजीएमसी शिमला और टांडा मेडिकल कॉलेज में इन अत्याधुनिक सुविधाओं का बेहतर लाभ नहीं मिल रहा है। 

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मेडिकल कॉलेज नेरचौक के समीप कैंसर अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है। इसमें आधुनिक उपकरणों के साथ कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी की सुविधा होगी। चार नई थेरेपी में भी कैंसर रोगियों का इलाज होगा। 45 करोड़ से बहुमंजिला अस्पताल भवन तैयार है। अब इसे आधुनिक उपकरणों से लैस किया जाएगा। कैंसर अस्पताल में बिलासपुर, मंडी, कुल्लू, लाहौल-स्पीति और हमीरपुर जिले के रोगियों को सुविधा मिलेगी। वर्तमान में कीमोथेरेपी की सुविधा मध्य जोन मंडी में नहीं है।
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25 करोड़ की लगेगी लिनेक्स मशीन
लीनियर एक्सीलरेटर से सीधे कैंसर ट्यूमर वाले हिस्से पर रेडिएशन डाला जाता है, जो दूसरे सेल को खत्म करने के बजाय केवल कैंसर सेल को खत्म करता है। इसमें दूसरी मशीनों के मुकाबले ज्यादा रेडिएशन निकलता है। 25 करोड़ की लीनियर एक्सीलरेटर मशीन यहां लगाई जाएगी। 
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कोबाल्ट थेरेपी से होगा इलाज
कैंसर अस्पताल में कोबाल्ट ब्रेकी थेरेपी से भी मरीजों का इलाज हो सकेगा। इसमें निडल के माध्यम से सिर्फ कैंसर सेल्स पर रेडिएशन डाला जाता है, जिससे आसपास के टिश्यू डैमेज होने से बच जाते हैं। कोबाल्ट ब्रेकी थेरेपी से सीटी स्कैन, एमआरआई और पेट स्कैन से इमेज गाइडेड रेडियोथेरेपी करने में भी मदद मिलती है। यह गर्भाश्य, प्रोस्टेट ब्रेस्ट, ओरल कैंसर, आहार नली कैंसर में सबसे ज्यादा कारगर है। यहां के रेडियोथेरेपी विभाग में मशीन लगाने की योजना है।

पैलिएटिव कीमोथेरेपी की सुविधा भी
पैलिएटिव कीमोथेरेपी मेटास्टेटिक कैंसर रोगियों के जीवन को बढ़ाने में मदद करती है। कीमोथेरेपी आमतौर पर ट्यूमर को सिकोड़ने और प्रभावी ढंग से ठीक करने में मदद करती है। इसके कुछ उदाहरण लिम्फोमा, ल्यूकेमिया और वृषण कैंसर हैं। मेटास्टेसिस (जब रोग शरीर के अलग-अलग हिस्सों में फैलता है) के कैंसर के लिए, अन्य उपचार के तौर-तरीकों के साथ कीमोथेरेपी की आवश्यकता भी होती है। 

लोपरोस्कोपी के जरिये कैंसर की नस में जाएगा इंजेक्शन
कैंसर के मरीजों को एक इंजेक्शन लगाकर दर्द से राहत मिलेगी। इस इंजेक्शन के लगने से मरीज को कुछ दिन तक दर्द से काफी आराम मिलेगा। नेरचौक कैंसर अस्पताल में पेन क्लीनिक सुविधा से कैंसर के मरीजों के असहनीय दर्द को यही इंजेक्शन लगाकर दूर किया जाएगा। इसके लिए एक विशेष मशीन लोपरोस्कोपी के जरिये कैंसर की नस को पकड़ा जाता है। हर प्रकार के कैंसर के लिए अलग तरह के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। 

कैंसर अस्पताल में दो लिफ्ट 
कैंसर अस्पताल में दो लिफ्ट लगेंगी। एक लिफ्ट विशेष रूप से कैंसर रोगियों और तीमारदारों के लिए होगी तो दूसरी लिफ्ट स्टाफ और चिकित्सकों के लिए होगी। यह लिफ्ट सीधे वार्ड के कोरिडोर से जुडे़गी और वहीं से रोगियों को वार्ड तक पहुंचाने की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।

कीपिक तकनीक से दो विशेष रेडिएशन चेंबर बनेंगे 
कैंसर अस्पताल में ग्राउंड फ्लोर में दो कैंसर रेडिएशन चेंबर बनाए गए हैं, जहां कैंसर कैंसर पीड़ित मरीजों को कीमो दी जाएगी। कैंसर रेडिएशन चेंबर के ऊपर 7 फीट मोटी स्लैब है तथा 4-4 फीट मोटी आरसीसी दीवारें हैं। आधुनिक कीपिक तकनीक से लैस इस रेडिएशन चेंबर से रेडिएशन बाहर नहीं जाएगी।

बजट की यह है स्थिति
कैंसर अस्पताल का प्रोजेक्ट 45 करोड़ का है। इसमें से 90 फीसदी केंद्र सरकार की तरफ से आएगा तथा 10 फीसदी हिमाचल सरकार का होगा। केंद्र सरकार की तरफ से अभी तक 73 फीसदी शेयर यानी 29 करोड़ 63 लाख 62 हजार रुपये आ चुके हैं। हिमाचल सरकार की तरफ से 3 करोड़ 56 लाख नौ हजार रुपये आ चुके हैं।


कैंसर अस्पताल का काम लगभग पूरा हो चुका है। अब मशीनरी स्थापित की जानी है। जब यह प्रोजेक्ट बना था तो 45 करोड़ लागत थी। अब इसकी लागत बढ़ गई है। इसे पूरा करने में केंद्र और राज्य सरकार की मदद चाहिए। निर्माण कार्य तो मौजूद बजट से हो जाएगा, लेकिन उपकरण और अधोसंरचना के लिए और बजट चाहिए। - रूपचंद ठाकुर, प्रिंसिपल, एसएलबीसी मेडिकल कॉलेज नेरचौक

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