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Shimla News: घर बैठे न प्रमाणपत्र मिले न ही बिल भुगतान सुविधा
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बजट घोषणा के एक साल बाद भी ऑनलाइन सुविधाएं नहीं दे पाया कांग्रेस शासित नगर निगम
पेपरलैस सदन, तहबाजारियों का एप से पंजीकरण का वादा भी अधूरा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में कांग्रेस शासित नगर निगम एक बार फिर वार्षिक बजट में शहरवासियों के लिए बड़ी घोषणाएं करने जा रहा है। शहर की जनता को इस बार भी कई बड़े सपने दिखाए जाएंगे। लेकिन बजट की कितनी घोषणाएं धरातल पर उतरेंगी, इस पर सबकी नजरें रहेंगी।
दरअसल, नगर निगम के पिछले बजट की कई घोषणाएं एक साल बाद भी धरातल पर नहीं उतरी हैं। शहर की जनता आज भी नगर निगम दफ्तर के चक्कर काटने को मजबूर हैं। पिछले बजट में नगर निगम की कई सेवाएं ऑनलाइन करने का सपना दिखाया था। शहरवासियों को घर बैठे जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र देने के लिए ऑनलाइन सुविधा शुरू होनी थी। लेकिन यह एक साल से साॅफ्टवेयर में ही उलझी हुई है। हर महीने इसकी लॉचिंग के सपने दिखाए जा रहे हैं। नगर निगम में 1870 से लेकर 2015 तक शहर में हुए हर जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड मौजूद है। शहर के अलावा विदेशों से भी लोग इन प्रमाण पत्रों के लिए शिमला आते हैं।
निगम बजट घोषणा के एक साल बाद भी इसे ऑनलाइन नहीं कर पाया। नगर निगम संपत्तियों के किराये के भुगतान के लिए आज भी लोगों को कैश काउंटर के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। बजट घोषणा के अनुसार अप्रैल 2024 में इसकी सुविधा मिलनी थी। लेकिन एक साल बाद भी इसका अता पता नहीं है।
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शहर में हर घर से कूड़ा उठ रहा है या नहीं, इसे जांचने के लिए क्यूआर कोड लगाने की योजना थी। इस पर कई बैठकें भी हुई। लेकिन फिर इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। नगर निगम सदन को पेपरलैस बनाने का दावा भी हवा हो गया। नगर निगम को सदन के लिए जगह तक नहीं मिली है। शहर में तहबाजारियों का एप के जरिये पंजीकरण भी अभी तक शुरू नहीं हुआ। निगम का दावा है कि ऐप तैयार हो चुका है। लेकिन पंजीकरण की तारीख लगातार आगे टल रही है।
निगम को खुद भी हो रहा नुकसान
बजट की यह घोषणाएं पूरी न होने से नगर निगम को खुद नुकसान हो रहा है। इनके शुरू होने से न सिर्फ पैसों की बचत होगी बल्कि इस काम में लगाए कर्मचारी भी दूसरे कार्यों में लगाए जा सकेंगे। साथ ही आम जनता को निगम दफ्तर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
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पेपरलैस सदन, तहबाजारियों का एप से पंजीकरण का वादा भी अधूरा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में कांग्रेस शासित नगर निगम एक बार फिर वार्षिक बजट में शहरवासियों के लिए बड़ी घोषणाएं करने जा रहा है। शहर की जनता को इस बार भी कई बड़े सपने दिखाए जाएंगे। लेकिन बजट की कितनी घोषणाएं धरातल पर उतरेंगी, इस पर सबकी नजरें रहेंगी।
दरअसल, नगर निगम के पिछले बजट की कई घोषणाएं एक साल बाद भी धरातल पर नहीं उतरी हैं। शहर की जनता आज भी नगर निगम दफ्तर के चक्कर काटने को मजबूर हैं। पिछले बजट में नगर निगम की कई सेवाएं ऑनलाइन करने का सपना दिखाया था। शहरवासियों को घर बैठे जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र देने के लिए ऑनलाइन सुविधा शुरू होनी थी। लेकिन यह एक साल से साॅफ्टवेयर में ही उलझी हुई है। हर महीने इसकी लॉचिंग के सपने दिखाए जा रहे हैं। नगर निगम में 1870 से लेकर 2015 तक शहर में हुए हर जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड मौजूद है। शहर के अलावा विदेशों से भी लोग इन प्रमाण पत्रों के लिए शिमला आते हैं।
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निगम बजट घोषणा के एक साल बाद भी इसे ऑनलाइन नहीं कर पाया। नगर निगम संपत्तियों के किराये के भुगतान के लिए आज भी लोगों को कैश काउंटर के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। बजट घोषणा के अनुसार अप्रैल 2024 में इसकी सुविधा मिलनी थी। लेकिन एक साल बाद भी इसका अता पता नहीं है।
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शहर में हर घर से कूड़ा उठ रहा है या नहीं, इसे जांचने के लिए क्यूआर कोड लगाने की योजना थी। इस पर कई बैठकें भी हुई। लेकिन फिर इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। नगर निगम सदन को पेपरलैस बनाने का दावा भी हवा हो गया। नगर निगम को सदन के लिए जगह तक नहीं मिली है। शहर में तहबाजारियों का एप के जरिये पंजीकरण भी अभी तक शुरू नहीं हुआ। निगम का दावा है कि ऐप तैयार हो चुका है। लेकिन पंजीकरण की तारीख लगातार आगे टल रही है।
निगम को खुद भी हो रहा नुकसान
बजट की यह घोषणाएं पूरी न होने से नगर निगम को खुद नुकसान हो रहा है। इनके शुरू होने से न सिर्फ पैसों की बचत होगी बल्कि इस काम में लगाए कर्मचारी भी दूसरे कार्यों में लगाए जा सकेंगे। साथ ही आम जनता को निगम दफ्तर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।