गुणा-भाग और विज्ञान में पिछड़ गए आठवीं कक्षा के विद्यार्थी, ऐसे हुआ खुलासा
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हिमाचल के सरकारी स्कूलों में गुणात्मक शिक्षा देने के सरकार के दावों की पोल खुल गई है। गणित और विज्ञान विषय में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले आठवीं कक्षा के विद्यार्थी पिछड़ रहे हैं।
आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का गणित में 40 फीसदी और विज्ञान में 50 फीसदी से कम परीक्षा परिणाम रहा है। सामाजिक अध्ययन विषय में भी बच्चे फिसड्डी साबित हुए हैं। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के नेशनल अचीवमेंट सर्वे 2017 में यह खुलासा हुआ है।
गौर करने वाले आंकड़े यह हैं कि 11 जिलों का गणित में परिणाम 40 फीसदी से कम रहा है। सिर्फ मंडी जिले ने 40 फीसदी का आंकड़ा पार किया है। हालांकि मंडी का प्रदर्शन भी बहुत अच्छा नहीं है। मंडी से मात्र 0.22 फीसदी के साथ गणित विषय में प्रदेश में टॉप किया है।
सरकारी स्कूलों में ये रहा गणित का परिणाम
सर्वे के मुताबिक आठवीं कक्षा के गणित विषय में लाहौल स्पीति का सबसे कम 29.28 फीसदी परिणाम रहा है जबकि बिलासपुर का 35.07 फीसदी, चंबा का 32.34 फीसदी, कांगड़ा का 35.75 फीसदी, ऊना का 35.58 फीसदी, हमीरपुर का 33.69 फीसदी, सिरमौर का 30.24 फीसदी, सोलन का 39.78 फीसदी,
किन्नौर का 32.98 फीसदी, शिमला का 36.65 फीसदी और कुल्लू जिला का 32.37 फीसदी परीक्षा परिणाम रहा है। इसी तरह विज्ञान में बिलासपुर का 39.86 फीसदी, चंबा का 37.53 फीसदी, कांगड़ा का 42.68 फीसदी, ऊना का 41.49 फीसदी, हमीरपुर का 39.08 फीसदी, सिरमौर का 36.09 फीसदी, सोलन का
47.92 फीसदी, किन्नौर का 44.23 फीसदी, मंडी का 47.56 फीसदी, लाहौल एवं स्पीति का 42.22 फीसदी, शिमला का 46.90 फीसदी और कुल्लू जिला का 39.99 फीसदी परीक्षा परिणाम रहा है।
सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक आशीष कोहली ने कहा कि सर्वे से सामने आई कमियों को दूर करने के लिए जल्द ही विशेष कार्य योजना तैयार की जाएगी।
1947 स्कूलों में 25 हजार बच्चों ने दी परीक्षा
एनसीईआरटी ने 13 नवंबर 2017 को प्रदेश के 1947 स्कूलों में 25393 बच्चों की अचीवमेंट सर्वे के तहत परीक्षा ली थी। तीसरी कक्षा के 6664, पांचवीं के 7515 और आठवीं कक्षा के 11214 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी।
तीसरी और पांचवीं कक्षा की भाषा, पर्यावरण विज्ञान और गणित विषय की परीक्षा ली गई थी जबकि आठवीं कक्षा की भाषा, गणित, विज्ञान और सामाजिक अध्ययन विषय की परीक्षा ली गई थी। ओएमआर शीट के माध्यम से परीक्षा ली गई थी। इसके तहत विद्यार्थियों से आब्जेक्टिव टाइप सवाल पूछे गए थे।
आठवीं तक फेल नहीं करने की नीति बड़ा कारण
शिमला। प्रदेश में पहली से आठवीं तक विद्यार्थियों को कक्षाओं में फेल नहीं किया जाता है। नो डिटेंशन पॉलिसी के चलते आठवीं कक्षा तक असेसमेंट आधार पर बच्चों को अगली कक्षा में प्रवेश दिया जाता है।
इन कक्षाओं के परिणाम अपेक्षाकृत संतोषजनक
शिक्षक भी नो डिटेंशन पॉलिसी के चलते विद्यार्थियों का ज्ञान बढ़ाने के लिए अधिक मेहनत नहीं कर रहे हैं। इसी कारण नवीं और दसवीं कक्षा में फेल होने वाले विद्यार्थियों की संख्या अधिक रहती है।
शिमला। आठवीं कक्षा के अपेक्षाकृत तीसरी और पांचवीं कक्षा के बच्चों का परीक्षा परिणाम संतोषजनक रहा है। पर्यावरण विज्ञान, भाषा और गणित विषय में सभी जिलों का परिणाम ठीक रहा है। तीसरी कक्षा के गणित विषय में कांगड़ा का औसत परिणाम सबसे अधिक 76.20 फीसदी रहा है
जबकि सिरमौर औसत परिणाम सबसे कम 41.10 फीसदी रहा। पांचवीं के गणित विषय में भी कांगड़ा 62.36 फीसदी के साथ अव्वल और सिरमौर 37.55 फीसदी के साथ फिसड्डी रहा है।