राष्ट्रीय खेल दिवस: खेलों में हिमाचल की धमक, बेटियों ने भी बिखेरी चमक, दुनिया में चमकाया नाम
सिरमौर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ खेल के क्षेत्र में चमक बिखेर रहा है। यहां के खिलाड़ियों ने राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
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हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ खेल के क्षेत्र में चमक बिखेर रहा है। यहां के खिलाड़ियों ने राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा का लोहा मनवाया है। सीता गोसाईं ने 90 के दशक में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम चमकाया। वह एशियन खेलों में रजत पदक हासिल करने वाली भारतीय हॉकी टीम में शामिल रहीं। उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से भी नवाजा गया। उनकी बहन गीता गोसाईं ने भी राष्ट्रीय स्तर पर हॉकी में पहचान बनाई है। शिलाई क्षेत्र की रितु नेगी ने 2022 में एशियाई खेलों में भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तानी की और टीम को स्वर्ण पदक दिलाया।
रितु नेगी को अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। प्रियंका नेगी प्रो कबड्डी लीग में दबंग दिल्ली की महिला टीम की हिस्सा रहीं। पुष्पा राणा 2022 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक विजेता टीम की सदस्य रहीं। नाहन निवासी भूपिंदर सिंह रावत प्रसिद्ध फुटबाल खिलाड़ी रहे। सेना में सेवाएं देते हुए रावत भारतीय टीम से जुड़े। रावत मलयेशिया में मर्डेका टूर्नामेंट में भारतीय टीम के सदस्य थे। हरिपुर खोल के निशानेबाज समरेश जंग ने मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों में 2006 में पांच स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य पदक जीता। उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स का सर्वश्रेष्ठ एथलीट भी घोषित किया गया। 2002 कॉमनवेल्थ गेम्स (मैनचेस्टर) में दो स्वर्ण पदक (फ्री पिस्टल पेयर्स और स्टैंडर्ड पिस्टल पेयर्स) जीते। भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया।
दुर्गम क्षेत्र धिराइना निवासी हेवीवेट रेसलर द ग्रेट खली किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। खली भारत के पहले प्रोफेशनल रेसलर थे, जिन्होंने डब्ल्यूडब्ल्यूई ज्वाइन किया। वह 2007-08 की विश्व हेवीवेट चैंपियनशिप में विजेता बने। नाहन के प्रसिद्ध फुटबाल खिलाड़ी नरेंद्र थापा युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। नाहन के संग्राम सिंह ने क्रिकेट के क्षेत्र में जलवा बिखेरा। पांवटा साहिब के ऑफ स्पिनर गुरविंदर सिंह टोली रणजी ट्रॉफी-2016 सीजन में देश के टॉप-3 स्पिनरों में शामिल रहे। सीजन में 6 मैच खेलकर हिमाचल टीम के लिए 21 विकेट झटके हैं।
आठ साल की उम्र में हाथ कट गया, निषाद ने कड़ी मेहनत व संकल्प से पेश की मिसाल
भारत पहली बार वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप की मेजबानी करेगा। इस चैंपियनशिप में पदक के प्रबल दावेदारों में हिमाचल प्रदेश के स्टार पैरा एथलीट निषाद कुमार का नाम प्रमुख है। टोक्यो और पेरिस पैरालंपिक में लगातार दो बार सिल्वर मेडल जीतने वाले निषाद अब नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 27 सितंबर से 5 अक्तूबर तक होने वाली वर्ल्ड पैरा चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक की ओर नजरें गड़ाए हुए हैं। हाल ही में वह कैलिफोर्निया (यूएसए) के सैन डिएगो में ट्रेनिंग लेकर भारत लौटे हैं। निषाद बताते हैं कि उनके संघर्षपूर्ण सफर में परिवार और विशेषकर उनकी मां का सबसे बड़ा योगदान रहा।
जब निषाद आठ वर्ष के थे, तो एक हादसे में उनका हाथ चारा काटने वाली मशीन में आ गया और कट गया। इस घटना को याद करते हुए उनकी मां पुष्पा देवी कहती हैं कि उस समय यही चिंता सताती थी कि बेटे का भविष्य क्या होगा। मां की चिंता दूर करते हुए निषाद ने तब कहा था कि आप फिक्र मत करो, इतना कमाऊंगा कि सोचोगी पैसा कहां रखूं। बेटे ने अपने संकल्प और मेहनत से यह सच कर दिखाया। पहली बार जब उन्हें दुबई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में जाना था, तो ढाई लाख रुपये कर्ज लेकर स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें भेजा गया। ऊना के उपमंडल अंब के गांव बदाऊं के रहने वाले निषाद ने हादसे के बाद टूटने के बजाय खुद को खेलों की ओर मोड़ा। उन्होंने एक के बाद एक उपलब्धियां हासिल कीं।