रोजी-रोटी के लिए जंग लड़ रही राष्ट्रीय नेटबाल खिलाड़ी रीनू
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एक तरफ जहां नेटबाल में भारत ने पाकिस्तान को हराकर एशियाई स्वर्ण विजेता बनकर उपलब्धि हासिल की है वहीं, हिमाचल के कई खिलाड़ियों को उचित मान नहीं मिल रहा है। हालांकि, देश के कई राज्यो में इस खेल के खिलाड़ियों को उचित मान-सम्मान दिया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश में नेटबाल को सी श्रेणी में रखा गया है।
नेटबाल में हिमाचल की टीम से 6 बार नेशनल खेलने वाली कौंसल गांव जोगिंद्रनगर की रीनू शर्मा पुत्री दुर्गा दत्त शर्मा की अनदेखी की जा रही है। इस खिलाड़ी के सिर से पिता का साया भी उठ चुका है।
वह बताती हैं कि मैंने पढ़ाई के साथ-साथ इस खेल के लिए बहुत समय दिया, जिसकी बदौलत मेरा चयन 6 बार नेशनल प्रतियोगिता के लिए हुआ। 6 नेशनल खेलने तथा स्थानीय राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय से अंग्रेजी विषय में एमए करने के बावजूद रीनू आज रोजी-रोटी की जंग लड़ने को मजबूर है।
एमए पास बेटी के सिर से उठ चुका है पिता का साया
हिमाचल नेटबाल एसोसिएशन के महासचिव अशोक आनंद का कहना है कि एसोसिएशन कई वर्षों से सरकार से बच्चों के हक की लड़ाई लड़ती आ रही है। वर्ष 2014 में भी दोबारा फाइल तैयार करके खेल विभाग में दी गई है।
लेकिन, अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हिमाचल नेटबाल एसोसिएशन के मुख्य चयनकर्ता सुनील अत्री का कहना है कि सरकारी नौकरियों में जिस तरह अन्य खेलों से खिलाड़ियों को मौका दिया जा रहा है।
उसी तर्ज पर नेटबाल खिलाड़ियों को भी मौका मिलना चाहिए, ताकि 1984 से हिमाचल में पंजीकृत नेटबाल के प्रति उत्साह कायम रहे और रीनू शर्मा जैसी प्रतिभावान खिलाड़ी उभर कर सामने आती रहे।