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NGT: कमेटी जांचेगी, फोरलेन निर्माण से कितना हुआ पर्यावरण का नुकसान

Fri, 22 Sep 2017 10:38 PM IST
रितेश गुलेरिया/अमर उजाला, बिलासपुर
रितेश गुलेरिया/अमर उजाला, बिलासपुर Updated Fri, 22 Sep 2017 10:38 PM IST
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National green tribunal order for four lane project in Himachal Pradesh Bilaspur

एनजीटी ने फोरलेन निर्माण से हो रहे पर्यावरण को नुकसान की रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक टीम बनाई है। यह टीम 25 सितंबर को बिलासपुर पहुंच रही है। इस कमेटी में देहरादून और कुल्लू के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। टीम पांच दिन के अंदर पूरी रिपोर्ट तैयार कर कोर्ट को देगी।

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टीम डंपिंग साइटों, गोबिंद सागर और सतलुज नदी में जा रहे मलबे, ब्लास्टिंग से हो रहे प्रदूषण और लोगों के घरों को हुए नुकसान की पूरी रिपोर्ट तैयार करेगी।

टीम 30 सितंबर को अपनी पूरी रिपोर्ट कोर्ट में जमा करवाएगी। इस टीम में कुल्लू स्थित गोविंद बल्लभ पंत हिमालयन पर्यावरण एवं विकास संस्थान और फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट देहरादून से विशेषज्ञ शामिल होंगे।
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टीम यह भी पता लगाएगी कि प्रदूषण से लोगों के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ रहा है। वहीं विस्थापित एवं प्रभावित लोगों के लिए भी यह अंतिम मौका होगा, वे भी प्रदूषण से हो रहे नुकसान के बारे में अपनी बात कमेटी के समक्ष रख सकते हैं।
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इधर, समिति के महासचिव मदल लाल शर्मा ने विस्थापितों और प्रभावितों से अपील की है कि वह अपने घरों से बाहर निकलकर कमेटी को अपनी समस्याओं के बारे में बताएं।

पूर्व में एनजीटी ने फोरलेन निर्माण कर रही कंपनी को साफ आदेश दिए हैं कि अगर पर्यावरण के साथ खिलवाड़ किया और मलबा सतलुज में डाला गया तो वह फोरलेन निर्माण पर भी रोक लग सकती है। 

कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन समिति ने की है शिकायत
कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन समिति ने एनजीटी में शिकायत की है कि निर्माण कार्य के दौरान नियमों को ताक पर रखकर डंपिंग हो रही है। पूरा मलबा गोबिंद सागर और सतलुज नदी में जा रहा है।


इसके अलावा ब्लास्टिंग के कारण घरों में दरारें आ चुकी है। प्रदूषण से भी लोगों के स्वास्थ्य और फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। इसकी सुनवाई एनजीटी दिल्ली में चल रही है। बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने उक्त आदेश दिए हैं।

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