नगर परिषद की 150वीं वर्षगांठ पर यहां मनाया जाएगा जश्न, जानिए वजह
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देश के सबसे पुराने शहरी निकायों में शुमार नाहन बारह अप्रैल को अपनी 150वीं वर्षगांठ मनाएगा। शहर का इतिहास 400 साल पुराना है जबकि डेढ़ सदी पूर्व यानी 1868 में यहां शहरी निकाय की स्थापना हो गई थी।
वर्तमान में नगर परिषद का दर्जा प्राप्त निकाय के लिए बारह अप्रैल को ऐतिहासिक दिन होगा, जिसे धूमधाम से मनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। कार्यक्रम का नाम जश्न-ए-नाहन दिया गया है जिसमें मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगे।
चौगान में आयोजित होने जा रहे समारोह में शहर की धरोहरों की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके लिए ड्रोन से फोटोग्राफी की गई है। विस अध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक डॉ. राजीव बिंदल ने स्वयं कार्यक्रम का खाका तैयार किया है।
उन्होंने कहा कि कुल 18 धरोहर भवनों की इस कार्यक्रम में प्रदर्शनी लगेगी। जिनमें कालीस्थान, लाल कोठी, नाहन फाउंडरी, दिल्ली गेट सहित विभिन्न सरकारी भवन शामिल हैं।
ऐसे भवनों के गेट पर समारोह से पहले बाकायदा नेम प्लेट और इतिहास भी लिखा जाएगा। शहर को हेरिटेज के रूप में विकसित कर पर्यटन के तौर पर विकसित करने में इससे मदद मिलेगी।
राजा कर्म प्रकाश ने 400 साल पहले बसाया था शहर
नाहन शहर को राजा कर्म प्रकाश ने लगभग 400 साल पहले बसाया था। उस दौरान नाहन सिरमौर रियासत की राजधानी कहलाई जाने लगी। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान वर्ष 1868 में सिरमौर में म्यूनिसपल बोर्ड बनाया गया जिसे वर्ष 1889 में कमेटी का दर्जा दे दिया गया।
तब इसमें कुल नौ वार्ड थे। इनमें से चार इलेक्टिड और पांच नोमिनेटिड होते थे। इस बोर्ड का कार्यकाल तीन वर्ष का होता था। जबकि रियासत के महाराजा बोर्ड के अध्यक्ष बने। वर्ष 1934 में भी इसके नौ सदस्य थे।
जिनमें तीन नोमिनेटिड और छह इलेक्टिड हुआ करते थे। उस दौरान भी अध्यक्ष नोमिनेटिड हुआ करता था। हालांकि, उपाध्यक्ष का पद इलेक्टिड प्रणाली से चुनने की प्रथा शुरू की गई।
पुस्तकों में दूसरी नगर परिषद का जिक्र
पूर्व विधायक एवं राजवंशज अजय बहादुर कहते हैं कि उस दौरान कमेटी को चुंगी और वनों से राजस्व प्राप्त होता था। आमदनी और खर्चा बराबर रहता था। पूरी आमदनी शहर के विकास पर खर्च की जाती थी। सिरमौर की अंडरग्राउंड सीवरेज प्रणाली आज भी अंग्रेजों के जमाने की चल रही है। रणजोर सिंह की तारीख-ए-रियासत पुस्तक में भी इसका जिक्र है। जबकि टीएस नेगी की सिरमौर गेजेटिर में भी यह अंकित हैं।