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चतुर्थ श्रेणी कर्मी को राहत: आठ साल की नियमित सेवा पर पेंशन से इन्कार, हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार
Wed, 07 Oct 2026 05:56 PM IST
Krishan Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 07 Oct 2026 05:56 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को पेंशन लाभ से वंचित करने के मामले में राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने सरकार की अपील खारिज कर एकल पीठ के फैसले में सुधार करते हुए 10 हजार रुपये की जुर्माने राशि अब पेंशन रोकने का गलत आदेश पारित करने वाले अधिकारी से वसूल करने का आदेश दिया है। साथ ही जुर्माना राशि कर्मचारी को देने को कहा है।
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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को पेंशन लाभ से वंचित करने के मामले में राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने सरकार की अपील खारिज कर एकल पीठ के फैसले में सुधार करते हुए 10 हजार रुपये की जुर्माने राशि अब पेंशन रोकने का गलत आदेश पारित करने वाले अधिकारी से वसूल करने का आदेश दिया है। साथ ही जुर्माना राशि कर्मचारी को देने को कहा है। अदालत ने कहा कि गलत आदेश के कारण कर्मचारी को अनावश्यक मानसिक परेशानी और मुकदमेबाजी का सामना करना पड़ा।
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मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगीकी खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। मामला लोक निर्माण विभाग में कार्यरत कर्म चंद से जुड़ा है। वह वर्ष 2006 से दैनिक वेतन भोगी बेलदार के रूप में सेवाएं दे रहे थे। 8 अक्तूबर 2013 को उनकी सेवाएं नियमित की गईं और 28 फरवरी 2022 को वह सेवानिवृत्त हुए। उनकी नियमित सेवा अवधि 8 वर्ष 4 महीने रही। सरकार ने उन्हें पेंशन देने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया था कि केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1972 के तहत पेंशन के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की नियमित सेवा जरूरी है।
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मामले में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के सुंदर सिंह और बालो देवी मामलों में दिए गए फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि नियम के अनुसार दैनिक वेतन भोगी के रूप में की गई 5 साल की सेवा को एक साल की नियमित सेवा के बराबर माना जाता है। कर्म चंद की करीब सात वर्ष की दैनिक वेतन सेवा के आधार पर उनकी पेंशन योग्य सेवा में एक वर्ष अतिरिक्त जोड़ा गया। इस तरह उनकी कुल पेंशन योग्य सेवा 9 वर्ष 4 महीने हो गई। कोर्ट ने माना कि यह अवधि पेंशन लाभ के लिए पूरी तरह से वैध है। इससे पहले एकल पीठ ने सरकार पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया था और इसे चीफ जस्टिस डिजास्टर रिलीफ फंड में जमा करने को कहा था। अब खंडपीठ ने इसमें सुधार करते हुए आदेश दिया कि यह जुर्माना राशि पेंशन रोकने का गलत आदेश पारित करने वाले अधिकारी से वसूल की जाए।
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