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Shimla News: भवनमालिकों को थोड़ी राहत, कोर्ट के आदेश मिलने पर ही सख्ती करेगा निगम

Sun, 23 Aug 2026 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 23 Aug 2026 11:55 PM IST
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nagar nigam news shimla
रिहायशी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने का मामला
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सुप्रीम कोर्ट में चल रही मामले की सुनवाई
निगम ने कोर्ट को सौंपी है सैकड़ों भवनमालिकों की सूची, फिलहाल कार्रवाई को लेकर नहीं आया स्पष्ट आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के रिहायशी क्षेत्रों में बिना अनुमति व्यावसायिक गतिविधियां चला रहे सैकड़ों भवनमालिकों पर फिलहाल नगर निगम कार्रवाई नहीं करेगा। सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस मामले में स्पष्ट आदेश मिलने तक नगर निगम ने फिलहाल कोई कार्रवाई न करने का फैसला लिया है।
नगर निगम का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में इससे जुड़े मामले पर हाल ही में सुुनवाई हुई है, लेकिन इस सुनवाई में कोई स्पष्ट आदेश नहीं आए हैं। ऐसे में जब तक सुप्रीम कोर्ट से कोई लिखित आदेश जारी नहीं हो जाते हैं, तब तक निगम अपने स्तर पर कार्रवाई नहीं करेगा। बीते महीने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नगर निगम ने शिमला शहर में सर्वेक्षण कर ऐसे भवनमालिकों की सूची तैयार की थी जो चिह्नित किए गए रिहायशी क्षेत्रों में बिना अनुमति दुकानें, ढाबे, होटल आदि चलाकर नियमों को तोड़ रहे हैं। निगम ने करीब 510 ऐसे भवनमालिकों की सूची तैयार की थी। इसके अलावा निगम कोर्ट में पहले से चल रहे ऐसे 180 मामलों को भी इसमें शामिल किया गया है। इनकी सूची निगम ने चार अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में पेश की थी। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों में सख्ती के निर्देश दिए हैं जहां रिहायशी क्षेत्रों में लोग व्यावसायिक गतिविधियां चला रहे हैं। हालांकि, अभी कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जारी है। निगम आयुक्त सचिन कंवल ने कहा कि कोर्ट के आदेश आने पर आगामी कार्रवाई होगी।
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भवनमालिकों को फिलहाल राहत
शिमला शहर में इस सर्वेक्षण के बाद हड़कंप मच गया था। बिना अनुमति दुकानें, ढाबे चला रहे सैकड़ों लोग नगर निगम से मिलने नोटिस का जवाब देने अब भी नगर निगम कार्यालय पहुंच रहे हैं। निगम इनके जवाब की जांच कर रहा है। लोगों को चिंता सता रही है कि यदि कोर्ट ने सख्त आदेश दिए तो उनको व्यावसायिक गतिविधियां बंद करनी पड़ेगी। निगम का कहना है कि नियमानुसार रिहायशी क्षेत्रों में इन गतिविधियों को नहीं चला सकते। हालांकि, इनमें कई लोग ऐसे हैं जिनके भवन पंचायत के समय के बने हैं। इनके न नक्शे पास हैं और न ही इनके पास दुकान चलाने की अनुमति है। नक्शा पास न होने के कारण ये व्यावसायिक गतिविधियां चलाने के लिए आवेदन तक नहीं कर सकते। फिलहाल नगर निगम समेत सबकी नजरें अब कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
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