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Shimla News: लोअर बाजार, प्रतिबंधित सड़क पर अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई को जारी रखे नगर निगम
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मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ का आदेश, मनमानी करने वाले नपेंगे
नगर निगम की कार्रवाई रोकने वाले स्ट्रीट वेंडर्स पर होगी कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला के ऐतिहासिक लोअर बाजार और प्रतिबंधित सड़कों पर अतिक्रमण को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। इसके साथ बार-बार अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका से जुड़े आवेदन का निपटारा करते हुए स्पष्ट किया कि सड़कों और फुटपाथों पर चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। अदालत ने आदेश दिया है कि प्रशासन की ओर से की जा रही आपातकालीन मॉक ड्रिल सप्ताह में एक बार अनिवार्य रूप से जारी रहेगी। नगर निगम और पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वह टाउन वेंडिंग कमेटी द्वारा घोषित नो-वेंडिंग जोन में किसी भी प्रकार का कब्जा न होने दें। हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया था। 20 जुलाई 2022 को अदालत के समक्ष यह बात सामने आई थी कि लोअर बाजार में अतिक्रमण के कारण आपातकालीन एंबुलेंस भी नहीं निकल पा रही थी। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए गोल्डन ऑवर (दुर्घटना या बीमारी के बाद का पहला महत्वपूर्ण घंटा) सबसे जरूरी होता है। यदि लोअर बाजार जैसे घने और भीड़भाड़ वाले पहाड़ी रास्तों पर अवैध कब्जे जारी रहे तो स्थानीय निवासियों को समय पर एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल पाएगी जो उनके जीवन के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।
कोर्ट ने नगर निगम की उस रिपोर्ट पर भी कड़ा संज्ञान लिया जिसमें बताया था कि पवन शर्मा (वेंडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष), ओमप्रकाश और अखिलेश तिवारी नामक तीन वेंडर लगातार सरकारी काम में बाधा डाल रहे हैं। यह लोग नो-वेंडिंग जोन में अवैध रूप से कारोबार करने के लिए दूसरे वेंडर्स को भी उकसा रहे हैं। कोर्ट ने इसे न्यायिक आदेशों का सीधा उल्लंघन और नगर निगम कर्मियों के कर्तव्यों में बाधा माना है।
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नगर निगम शिमला की ओर से पेश स्टेटस रिपोर्ट में बताया कि शहर को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए पुख्ता कदम उठाए गए हैं। लोअर बाजार, लक्कड़ बाजार और मालरोड (लिफ्ट के पास) से हटाए जाने वाले 98 दुकानदारों (वेंडर्स) को आजीविका भवन (सब्जी मंडी) की छत पर शिफ्ट करने का प्रस्ताव है। पुलिस, नगर निगम और फायर ब्रिगेड के संयुक्त प्रयासों और नियमित मॉक ड्रिल के कारण सीटीओ चौक से लोअर बाजार तक आपातकालीन वाहनों का मूवमेंट समय 14 मिनट से घटकर 5 मिनट रह गया है। बाजार में बिना अनुमति दोबारा कब्जे रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है।
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नगर निगम की कार्रवाई रोकने वाले स्ट्रीट वेंडर्स पर होगी कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला के ऐतिहासिक लोअर बाजार और प्रतिबंधित सड़कों पर अतिक्रमण को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। इसके साथ बार-बार अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका से जुड़े आवेदन का निपटारा करते हुए स्पष्ट किया कि सड़कों और फुटपाथों पर चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। अदालत ने आदेश दिया है कि प्रशासन की ओर से की जा रही आपातकालीन मॉक ड्रिल सप्ताह में एक बार अनिवार्य रूप से जारी रहेगी। नगर निगम और पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वह टाउन वेंडिंग कमेटी द्वारा घोषित नो-वेंडिंग जोन में किसी भी प्रकार का कब्जा न होने दें। हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया था। 20 जुलाई 2022 को अदालत के समक्ष यह बात सामने आई थी कि लोअर बाजार में अतिक्रमण के कारण आपातकालीन एंबुलेंस भी नहीं निकल पा रही थी। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए गोल्डन ऑवर (दुर्घटना या बीमारी के बाद का पहला महत्वपूर्ण घंटा) सबसे जरूरी होता है। यदि लोअर बाजार जैसे घने और भीड़भाड़ वाले पहाड़ी रास्तों पर अवैध कब्जे जारी रहे तो स्थानीय निवासियों को समय पर एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल पाएगी जो उनके जीवन के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।
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कोर्ट ने नगर निगम की उस रिपोर्ट पर भी कड़ा संज्ञान लिया जिसमें बताया था कि पवन शर्मा (वेंडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष), ओमप्रकाश और अखिलेश तिवारी नामक तीन वेंडर लगातार सरकारी काम में बाधा डाल रहे हैं। यह लोग नो-वेंडिंग जोन में अवैध रूप से कारोबार करने के लिए दूसरे वेंडर्स को भी उकसा रहे हैं। कोर्ट ने इसे न्यायिक आदेशों का सीधा उल्लंघन और नगर निगम कर्मियों के कर्तव्यों में बाधा माना है।
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नगर निगम शिमला की ओर से पेश स्टेटस रिपोर्ट में बताया कि शहर को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए पुख्ता कदम उठाए गए हैं। लोअर बाजार, लक्कड़ बाजार और मालरोड (लिफ्ट के पास) से हटाए जाने वाले 98 दुकानदारों (वेंडर्स) को आजीविका भवन (सब्जी मंडी) की छत पर शिफ्ट करने का प्रस्ताव है। पुलिस, नगर निगम और फायर ब्रिगेड के संयुक्त प्रयासों और नियमित मॉक ड्रिल के कारण सीटीओ चौक से लोअर बाजार तक आपातकालीन वाहनों का मूवमेंट समय 14 मिनट से घटकर 5 मिनट रह गया है। बाजार में बिना अनुमति दोबारा कब्जे रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है।