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नगर निकाय चुनाव: डिजिटल सुविधाएं बनाएंगी पंचायत, निकाय चुनाव को आसान; इस एप से मिलेगी रियल टाइम जानकारी
Sun, 26 Apr 2026 11:45 AM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sun, 26 Apr 2026 11:45 AM IST
सार
नगर निकाय और पंचायतीराज चुनावों के चलते राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं को डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध करवाई हैं। मतदान प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए वोटिंग डे मानीटरिंग सिस्टम (मतदान दिवस निगरानी प्रणाली) लागू की गई है। पढ़ें पूरी खबर...
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
नगर निकाय और पंचायतीराज चुनावों को आसान, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं को डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध करवाई हैं। अब मतदाता घर बैठे ही अपने वोट, मतदान केंद्र और चुनाव परिणाम से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। उम्मीदवारों के लिए भी खर्च का हिसाब देना और अन्य प्रक्रियाएं ऑनलाइन कर दी गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव सुरजीत सिंह ने बताया कि मतदाताओं के लिए इलेक्टोरल सर्च हिमाचल (वोटर सारथी एप) सबसे उपयोगी साबित होगा। इससे नाम मतदाता सूची में खोज सकते हैं, मतदान केंद्र का स्थान जान सकते हैं और अपने वार्ड से जुड़े उम्मीदवारों की जानकारी भी देख सकते हैं। मतदान के बाद इसी एप पर परिणाम भी उपलब्ध होंगे।
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मतदान प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए वोटिंग डे मानीटरिंग सिस्टम (मतदान दिवस निगरानी प्रणाली) लागू की गई है। मतदान प्रतिशत और बूथ स्तर की गतिविधियों की वास्तविक समय में जानकारी मिलेगी। बैलेट बॉक्स ट्रैकिंग एप (मतपेटी ट्रैकिंग एप) के जरिए मतपेटियों की आवाजाही पर निगरानी रखी जाएगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
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चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के लिए कैंडिडेट एक्सपेंडिचर रिर्पोटिंग सिस्टम (उम्मीदवार व्यय रिपोर्टिंग प्रणाली) शुरू की गई है, जिसके माध्यम से वे अपने चुनावी खर्च का पूरा ब्यौरा ऑनलाइन जमा कर सकेंगे। इससे जवाबदेही सुनिश्चित होगी और प्रक्रिया सरल बनेगी। इसके अतिरिक्त इलेक्टोरल रोल मैनेजमेंट सिस्टम (मतदाता सूची प्रबंधन प्रणाली) पोर्टल पर मतदाता फोटोयुक्त सूची डाउनलोड कर सकते हैं और किसी भी प्रकार की शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं।
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लाहौल-स्पीति जिला और चंबा के किलाड़ में इस बार पूरे प्रदेश के साथ ही पंचायत चुनाव होंगे। दुर्गम क्षेत्रों के लिए राज्य निर्वाचन आयोग इस बार अलग शेड्यूल जारी नहीं करेगा। सर्वोच्च न्यायालय की ओर से 31 मई तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के निर्देशों के चलते यह व्यवस्था लागू की जा रही है।
नायब नहीं, तहसीलदार ही होंगे एआरओ
चुनावों में तहसीलदारों को ही सहायक रिटर्निंग ऑफिसर एआरओ का जिम्मा सौंपा जाएगा। प्रदेश के कुछ जिला उपायुक्तों ने राज्य निर्वाचन आयोग से आग्रह किया था कि नायब तहसीलदारों को भी एआरओ लगाने की अनुमति दी जाए, लेकिन आयोग ने अनुमति नहीं दी।
चुनावों में तहसीलदारों को ही सहायक रिटर्निंग ऑफिसर एआरओ का जिम्मा सौंपा जाएगा। प्रदेश के कुछ जिला उपायुक्तों ने राज्य निर्वाचन आयोग से आग्रह किया था कि नायब तहसीलदारों को भी एआरओ लगाने की अनुमति दी जाए, लेकिन आयोग ने अनुमति नहीं दी।