मौत के 61 साल बाद फिर जिंदा हुआ जहांगीर
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प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड गलतियों को नहीं सुधार पा रहा। अपने कारनामों को बोर्ड बार-बार दोहरा रहा है। आठवीं कक्षा की ‘हिमाचल लोक संस्कृति और योग’ किताब में मुगल सम्राट जहांगीर को 1688 में जीवित करार दिया गया है। जहांगीर की मौत साल 1627 में हो चुकी है।
किताब में बच्चे यह पढ़ रहे हैं कि मुगल सम्राट 1688 में कांगड़ा आए थे। यह गलती पिछले साल भी छपी थी और ‘अमर उजाला’ ने 14 जनवरी 2015 के अंक में इस गलती को तथ्यों के साथ प्रकाशित किया था। इस बार भी किताब में वही छपकर आ गया है।
1627 में हुई थी मौत बताया कि 1688 में कांगड़ा आए
जहांगीर 1627 ईस्वी में दुनिया से रुखसत हो गए थे। नुरूद्दीन मोहम्मद सलीम जहांगीर का जन्म 20 सितंबर 1569 में हुआ था। 1622 में कांगड़ा आए थे और 8 नवंबर 1627 में कश्मीर से लौटते वक्त चिंगस में उनकी मौत हो गई थी। आठवीं की किताब में जहांगीर के कांगड़ा आने का जिक्र वर्ष 1688 में किया गया है और छात्रों को यही पढ़ाया जा रहा है।
अभिभावकों ने पहले गलती उजागर होने के बाद इसमें सुधार की मांग की थी लेकिन बोर्ड ने कुछ नहीं किया। नए सत्र में भी जहांगीर के कांगड़ा आने का समय 1688 बताया जा रहा है। इधर, स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव बलवीर ठाकुर ने कहा कि मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की जाएगी। कहां गलती हुई है, इसकी तहकीकात की जाएगी।
एससीआरटी ने भी सही कराई गलती पर बोर्ड बना रहा लापरवाह
अमर उजाला में गलती को उजागर करने के बाद शिक्षा बोर्ड ने सही तारीख पता लगाने के लिए स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीआरटी) से सहायता ली थी।
एससीआरटी के विषय विशेषज्ञों ने सही जानकारी एकत्र कर बोर्ड को उपलब्ध करवाई थी जबकि एससीआरटी का यह काम नहीं था। बावजूद इसके बोर्ड की लापरवाही का खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। उधर, बोर्ड भी रस्मी कार्रवाई करते हुए जांच करने की बात कर रहा है।