MSME for Bharat: सोलन में मंत्री हर्षवर्धन बोले- उद्योगों को धारा 118 में बार-बार मंजूरी लेने की जरूरत नहीं
अमर उजाला की ओर से देहूंघाट स्थित होटल पाइनग्रोव में हुए एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव में हिमाचल के उद्योग, श्रम एवं रोजगार मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उद्यमियों, अधिकारियों और विशेषज्ञों ने एक मंच पर आकर सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यम (एमएसएमई) के समक्ष आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान पर मंथन किया।
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वैश्विक मानचित्र पर पहचान बना चुके हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक जिला सोलन में शनिवार को एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। अमर उजाला की ओर से देहूंघाट स्थित होटल पाइनग्रोव में हुए इस सम्मेलन में हिमाचल के उद्योग, श्रम एवं रोजगार मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उद्यमियों, अधिकारियों और विशेषज्ञों ने एक मंच पर आकर सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यम (एमएसएमई) के समक्ष आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान पर मंथन किया। कॉन्क्लेव में उद्योग जगत की हस्तियों ने भविष्य के एमएसएमई के साथ मौजूदा दौर में पेश आ रही चुनौतियों पर चर्चा के साथ उनसे निपटने के रास्ते पर भी मंथन किया। आगे जानिए कॉन्क्लेव में किसने क्या कहा...
उद्योगों की समस्याओं का समाधान होगा: उद्योग मंत्री
सोलन में आयोजित अमर उजाला के एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने उद्यमियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि एमएसएमई को लेकर जल्द ही समस्याओं का समाधान किया जाएगा। नियमों में जो भी छूट होगी, वो भी दी जाएगी। कहा कि उद्योगों को धारा 118 में बार-बार मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा बिजली दरों को कम करने को लेकर भी बात की जा रही है। अंतिम सत्र में उद्योग विभाग एवं एमएसएमई से जुड़े अधिकारियों ने सरकारी योजनाओं के बारे में उद्यमियों को जानकारी दी और उनके सवालों के जवाब भी लिए।
पिंजौर-नालागढ़ फोरलेन निर्माण में देरी से उद्योगों को हो रहा नुकसान: अग्रवाल
एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव के पहले सत्र में कल के एमएसएमई विषय पर चर्चा हुई। सामूहिक चर्चा के लिए पैनल में लघु उद्योग भारती बद्दी के प्रदेशाध्यक्ष अखिल मोहन अग्रवाल, लघु उद्योग संघ बद्दी के अशोक राणा और गत्ता उद्योग संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष हेमराज चौधरी शामिल रहे। लघु उद्योग भारती बद्दी के प्रदेशाध्यक्ष अखिल मोहन अग्रवाल ने कहा कि पिंजौर-नालागढ़ फोरलेन निर्माण में देरी के कारण नालागढ़-बद्दी-बरोटीवाला में उद्योग पलायन कर रहे हैं। सड़कों की हालत काफी खराब हो गई है। सरकार की ओर से इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इससे उद्योगों को नुकसान हुआ है। कहा कि 2021 से फोरलेन बन रहा है। दो बार फोरलेन निर्माण कंपनी छोड़ कर चली गई है। इससे निर्माण में देरी हो रही है।
एमएसएमई देश की रीढ़ की हड्डी: अशोक राणा
लघु उद्योग संघ के प्रदेशाध्यक्ष अशोक राणा ने कहा कि एमएसएमई देश की रीढ़ की हड्डी है। समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। 78 फीसदी एमएसएमई उद्योग है। हिमाचल में सरकारी नौकरी कम है तो युवा पढ़ने के बाद उद्योग लगाने की सोचते हैं, लेकिन एमएसएमई उद्योग लगाने के लिए काफी दिक्कतें आ जाती हैं। नियम काफी कड़े हैं। इसमे सुगमता लाई जाए। केंद्र सरकार ने सीजीटीएसएमई लाखों रुपये का फंड देने के लिए बैंक आनाकानी करते हैं। राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना को फिर से शुरू किया है। मुख्यमंत्री ने पांच लाख नौकरियां देने की बात कही है। अगर उद्योग शुरू हो सके तो ही समाज आगे बढ़ेगा और युवाओं को नौकरी मिलेगी। एमएसएमई सेक्टर टैक्स तक देता है। छोटे उद्योगों की लीज 95 साल की जाए ताकि आसानी हो। नक्शा मंजूर करवाने के लिए 2.5 लाख रुपये लग रहे हैं। पहले 10,000 रुपये लगते थे। बिजली में सब्सिडी दी जाए। फायर एनओसी उद्योगों को काफी मुश्किल से मिलती है। इस बारे में कई बैठकें हो गई हैं लेकिन कोई हल नहीं निकला है, केंद्र सरकार के साथ इस पर चर्चा की जाए।
जीएसटी की नई दरें खतरनाक: हेमराज
गत्ता उद्योग संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष हेमराज ने कहा कि गत्ता उद्योग का जीडीपी में 29 फीसदी योगदान है। जीएसटी दरों में काफी परिवर्तन हुआ है, जो पहले 12 फीसदी में कच्चा माल आता था अब वो 18 फीसदी हो गया है। जबकि तैयार माल पर जीएसटी पांच फीसदी हो गया है। उन्होंने कहा कि इससे गत्ता उद्योग संचालकों को नुकसान होगा। कहा कि जीएसटी की नई दरें खतरनाक हैं।
बीबीएन में सड़क सुविधा को बेहतर किया जाए: सुरेंद्र जैन
सोलन में एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव के दूसरे सत्र में एमएसएमई की स्थानीय चुनौतियों और अवसर विषय पर प्रिंटर्स एसोसिएशन बद्दी के सलाहकार सुरेंद्र जैन, परवाणू उद्योग संघ के महासचिव सार्थक जैन और फार्मा उद्योग संघ के सतीश सिंगला ने चर्चा की। प्रिंटर्स एसोसिएशन बद्दी के सलाहकार सुरेंद्र जैन ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में बड़ी, छोटी व मध्यम औद्योगिक इकाइयां हैं। बीबीएन में 75 जो प्रबंधक, मालिक और कर्मचारी हैं, वे रोजाना पिंजौर, पंचकूला और चंडीगढ़ व मोहाली से बद्दी के लिए आवाजाही करते हैं। रोजाना 50 किलोमीटर का सफर कर रहे हैं और फिर वापस भी जा रहे हैं। अकसर शिकायत रहती है कि सड़क नहीं है और जाम लगता है। उन्होंने उद्योग मंत्री से आग्रह किया कि सड़क सुविधा को बेहतर किया जाए। साथ ही कहा कि उद्योग हिमाचल में कमा रहे हैं और दर्द हिमाचल को दे रहे हैं। सारा काम हिमाचल के साथ हो रहा है और पैसा खर्च करने के लिए चंडीगढ़ जाते हैं। यह बहुत ही दर्द की बात है कि एक राज्य हमें सब कुछ दे रहा है लेकिन खर्च बाहर हो रहा है। इस पर थोड़ा ध्यान देना चाहिए।
नियमों में बदलाव नहीं हुए तो डेढ़ साल में बहुत से उद्योग हो जाएंगे बंद: सतीश सिंगला
हिमाचल प्रदेश फार्मा उद्योग संघ के चेयरमैन सतीश सिंगला ने कहा कि प्रदेश में करीब 400 फार्मा उद्योग हैं। 150 उद्योग अनुपालन उद्योग नियमों के तहत चले हुए हैं। केंद्रीय सरकार संयुक्त उद्यम के साथ संयुक्त निरीक्षण में लाइसेंस देती है। फार्मा उद्योग 40,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध करवाता है। एक लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार दे रहा है। हिमाचल से 10 हजार करोड़ का आयात किया जाता है। केंद्र की ओर से नए-नए नियम बनाए जा रहे हैं। इससे लगातार उद्योगों को फर्क पड़ रहा है। अभी 50 यूनिट के करीब बंद हो चुके हैं। आने वाले समय में यदि कोई बदलाव नहीं हुए तो डेढ़ साल के अंदर बहुत से उद्योग बंद हो जाएंगे।
ग्रेटर परवाणू का एक औद्योगिक विकास प्राधिकरण बनाया जाए: सार्थक तनेजा
परवाणू उद्योग संघ के महासचिव सार्थक तनेजा ने कहा कि एमएसएमई की स्थानीय चुनाैतियां हैं। उन्होंने परवाणू के उद्योगों पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश का सबसे पहला औद्योगिक क्षेत्र परवाणू है। उद्योग संघ ने ग्रेटर परवाणू का एक औद्योगिक विकास प्राधिकरण बनाया जाए ताकि उद्योग क्षेत्र को फायदा मिल सके। इससे उद्योग लगाने के लिए जमीन आसानी से मिल सकेगी। बजट में आसानी होगी। इसी के साथ परवाणू में बाहरी राज्यों से कर्मचारी और प्रबंधक आते हैं लेकिन उन्हें टोल देना पड़ता है। इससे काफी दिक्कतें आ रही हैं। इसमें थोड़ी राहत देनी चाहिए। परवाणू को एनएच से कटे हुए काफी समय हो गया है। इसे कामली पुल के साथ जोड़ा जाए, लेकिन आज तक संभव नहीं हो पाया है।