अनुराग की ताजपोशी से बदलेंगे हिमाचल के सियासी समीकरण
हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर की लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद पर तैनाती से हिमाचल के सियासी समीकरण बदल जाएंगे। सियासी हार के बादर से प्रदेश सरकार के अंदर तवज्जो न मिलने से असंतुष्ट पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के खेमे को जहां एक ओर इससे मजबूती मिलेगी, वहीं पार्टी को भी भविष्य के चेहरे और निगमों-बोर्डों में तैनाती के दौरान मांगी जाने वाली संभावित हिस्सेदारी में भी मोलभाव करने का दम मिलेगा।
केंद्र की मोदी-शाह की सियासी जोड़ी के इस नए दांव के बाद अब देखना यह होगा कि हिमाचल के सियासी समीकरण कितना बदलते हैं। दरअसल, विधानसभा के चुनावी नतीजों के बाद से माना जाने लगा था कि धूमल परिवार के दिन लद गए हैं। लेकिन पार्टी के भीतर से हमीरपुर में कोई नेता न उभर सके, इसके लिए धूमल ने मंत्रियों के चयन के समय एड़ी चोटी का जोर लगा दिया।
केंद्रीय नेतृत्व ने उनकी ज्यादा नहीं मानी लेकिन उनके हिस्से से चार मंत्री और हमीरपुर से किसी को भी मंत्रिपद न देने की बात मान ली गई। इसके बाद से असंतुष्ट होने के बावजूद धूमल चुप्पी मारकर बैठे थे।
सूत्रों की मानें तो उनकी नजर 2019 के लोकसभा चुनाव पर थी क्योंकि वह जो भी करते उसका सीधा असर हमीरपुर लोकसभा सीट पर पड़ना था। साथ ही वह बोर्ड निगमों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के पदों पर अपने खास लोगों की एडजस्टमेंट के लिए भी वह इंतजार कर रहे थे।
अब अनुराग के मुख्य सचेतक बनने से जहां एक ओर धूमल खेमे खासकर अनुराग का कद हिमाचल में बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर सियासी संतुलन बनाने में केंद्रीय नेतृत्व को भी आसानी होगी।