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Shimla News: दो बरसातों में दरके पहाड़ अभी भी असुरक्षित, भूस्खलन का खतरा
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दरबाजे पर बरसात, तैयारियों पर सवाल
शहर में बीती दो बरसातों में बीस से अधिक हुई थी मौतें, न ढहे डंगे लगे न ही पहाड़ों की हुई स्टेबलाइजेशन
बालूगंज क्रॉसिंग और शिवबावड़ी में अभी काम अधूरे
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला में दो सालों में बरसात ने खूब कहर बरपाया है। शहर में कई जगह भारी भूस्खलन के कारण जहां सड़कों को नुकसान पहुंचा वहीं कई लोगों की मौत भी हुई थी।
बरसात अब फिर आने वाली है लेकिन इससे निपटने की तैयारियां अभी तक अधूरी हैं। दो साल पहले जिन स्थानों पर भूस्खलन हुआ था उन्हें सुरक्षित करने का काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। न तो ढहे डंगे लग पाए हैं न ही पहाड़ों की स्टेबलाइजेशन हो पाई है। स्टेबलाइजेशन वह तकनीक होती है जिससे भूस्खलन को रोकने में मदद मिलती है। बरसात के मौसम में इन स्थानों पर अब भारी बारिश होने पर फिर से हादसे का खतरा बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार हिमाचल में मानसून 23 से 25 जून के बीच दस्तक दे सकता है। बालूगंज क्रॉसिंग की बात करें तो यहां पर पिछले साल अगस्त महीने में भारी भूस्खलन होने से शिमला-बालूगंज मार्ग पर वाहनों की आवाजाही अवरुद्ध हो गई थी।
बालूगंज-एडवांस्ड स्टडी-विधानसभा मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण कई दिनों तक बाधित रहा था। वर्तमान में यहां पर स्टेबलाइजेशन का काम चल रहा है जिसे लोक निर्माण विभाग करवा रहा है। पहाड़ी पर भूस्खलन रोकने के लिए लोहे की जाली के साथ ही एक और जाली लगाई जा रही है। मौके पर मौजूद स्टाफ के मुताबिक इस जाली से भारी बारिश होने पर भूस्खलन जैसी स्थिति से निपटा जा सकेगा। नमी रहने से खाली हो चुके पहाड़ पर हरी घास भी उग सकेगी। इस तकनीक का मकसद हरियाली की मदद से पहाड़ी को सुरक्षित करना है, लेकिन अभी भी पहाड़ी पर स्टेबलाइजेशन का काम पूरा नहीं हो पाया है।
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वाहनों की आवाजाही को बीच-बीच में बारिश के चलते रोका जा रहा है। ऐसे में अगर बरसात के मौसम में भारी बारिश होती है तो यहां दोबारा भूस्खलन का खतरा है। निर्माण कार्य की वजह से बालूगंज के लिए जाने वाले मार्ग की हालत भी खस्ताहाल बनी हुई है। इस वजह से वाहन चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता नवीन कुमार ने कहा कि इस स्थान पर स्टेबलाइजेशन का काम किया जा रहा है। विभाग ने मजबूत डंगों का निर्माण किया है। एडवांस्ड स्टडी में हैरिटेज पार्क के पास किए जाने वाले कार्य की टेंडर प्रक्रिया चल रही है।
शिवबावड़ी हादसे में हुई थी 20 मौतें
वर्ष 2023 में शिव बावड़ी हादसे में 20 लोगों की जान चली गई थी। हादसा इतना भयावह था कि कई दिनों तक लोगों के शवों को भी तलाश नहीं जा सका था। यहां एडवांस्ड स्टडी से भारी भूस्खलन हुआ जिससे शिवबावड़ी में मंदिर तक तबाही मची थी। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग यहां पर भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित करने का काम करवा रहा है। बालूगंज-समरहिल मार्ग पर विभाग ने वैलीसाइड और हिल साइड डंगे लगाने का काम तो पूरा कर लिया है लेकिन बालूगंज-सांगटी मार्ग पर अभी भी पहाड़ी की तरफ डंगा लगाने का काम अधूरा है। इसके अलावा न्यू शिमला में भी एक बुजुर्ग और युवती की भूस्खलन की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
हैरिटेज पार्क में भी भूस्खलन का खतरा
एडवांस्ड स्टडी में हैरिटेज पार्क के पास भी भूस्खलन का खतरा है लेकिन यहां भी सुरक्षा को लेकर कोई कार्य नहीं हुआ है। इस वजह से यहां अभी भी हादसे का खतरा बना हुआ है। बालूगंज-समरहिल मार्ग और बालूगंज-सांगटी मार्ग की हालत खस्ता है। इस वजह से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। दोनों जगह पर बरसात की तबाही के बाद अभी भी हादसे के खतरे से लोग खौफजदा हैं।
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शहर में बीती दो बरसातों में बीस से अधिक हुई थी मौतें, न ढहे डंगे लगे न ही पहाड़ों की हुई स्टेबलाइजेशन
बालूगंज क्रॉसिंग और शिवबावड़ी में अभी काम अधूरे
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला में दो सालों में बरसात ने खूब कहर बरपाया है। शहर में कई जगह भारी भूस्खलन के कारण जहां सड़कों को नुकसान पहुंचा वहीं कई लोगों की मौत भी हुई थी।
बरसात अब फिर आने वाली है लेकिन इससे निपटने की तैयारियां अभी तक अधूरी हैं। दो साल पहले जिन स्थानों पर भूस्खलन हुआ था उन्हें सुरक्षित करने का काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। न तो ढहे डंगे लग पाए हैं न ही पहाड़ों की स्टेबलाइजेशन हो पाई है। स्टेबलाइजेशन वह तकनीक होती है जिससे भूस्खलन को रोकने में मदद मिलती है। बरसात के मौसम में इन स्थानों पर अब भारी बारिश होने पर फिर से हादसे का खतरा बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार हिमाचल में मानसून 23 से 25 जून के बीच दस्तक दे सकता है। बालूगंज क्रॉसिंग की बात करें तो यहां पर पिछले साल अगस्त महीने में भारी भूस्खलन होने से शिमला-बालूगंज मार्ग पर वाहनों की आवाजाही अवरुद्ध हो गई थी।
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बालूगंज-एडवांस्ड स्टडी-विधानसभा मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण कई दिनों तक बाधित रहा था। वर्तमान में यहां पर स्टेबलाइजेशन का काम चल रहा है जिसे लोक निर्माण विभाग करवा रहा है। पहाड़ी पर भूस्खलन रोकने के लिए लोहे की जाली के साथ ही एक और जाली लगाई जा रही है। मौके पर मौजूद स्टाफ के मुताबिक इस जाली से भारी बारिश होने पर भूस्खलन जैसी स्थिति से निपटा जा सकेगा। नमी रहने से खाली हो चुके पहाड़ पर हरी घास भी उग सकेगी। इस तकनीक का मकसद हरियाली की मदद से पहाड़ी को सुरक्षित करना है, लेकिन अभी भी पहाड़ी पर स्टेबलाइजेशन का काम पूरा नहीं हो पाया है।
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वाहनों की आवाजाही को बीच-बीच में बारिश के चलते रोका जा रहा है। ऐसे में अगर बरसात के मौसम में भारी बारिश होती है तो यहां दोबारा भूस्खलन का खतरा है। निर्माण कार्य की वजह से बालूगंज के लिए जाने वाले मार्ग की हालत भी खस्ताहाल बनी हुई है। इस वजह से वाहन चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता नवीन कुमार ने कहा कि इस स्थान पर स्टेबलाइजेशन का काम किया जा रहा है। विभाग ने मजबूत डंगों का निर्माण किया है। एडवांस्ड स्टडी में हैरिटेज पार्क के पास किए जाने वाले कार्य की टेंडर प्रक्रिया चल रही है।
शिवबावड़ी हादसे में हुई थी 20 मौतें
वर्ष 2023 में शिव बावड़ी हादसे में 20 लोगों की जान चली गई थी। हादसा इतना भयावह था कि कई दिनों तक लोगों के शवों को भी तलाश नहीं जा सका था। यहां एडवांस्ड स्टडी से भारी भूस्खलन हुआ जिससे शिवबावड़ी में मंदिर तक तबाही मची थी। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग यहां पर भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित करने का काम करवा रहा है। बालूगंज-समरहिल मार्ग पर विभाग ने वैलीसाइड और हिल साइड डंगे लगाने का काम तो पूरा कर लिया है लेकिन बालूगंज-सांगटी मार्ग पर अभी भी पहाड़ी की तरफ डंगा लगाने का काम अधूरा है। इसके अलावा न्यू शिमला में भी एक बुजुर्ग और युवती की भूस्खलन की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
हैरिटेज पार्क में भी भूस्खलन का खतरा
एडवांस्ड स्टडी में हैरिटेज पार्क के पास भी भूस्खलन का खतरा है लेकिन यहां भी सुरक्षा को लेकर कोई कार्य नहीं हुआ है। इस वजह से यहां अभी भी हादसे का खतरा बना हुआ है। बालूगंज-समरहिल मार्ग और बालूगंज-सांगटी मार्ग की हालत खस्ता है। इस वजह से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। दोनों जगह पर बरसात की तबाही के बाद अभी भी हादसे के खतरे से लोग खौफजदा हैं।