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Shimla News: विद्यार्थी सिखेंगे मधुमक्खी पालन और कौशल आधारित शिक्षा
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बागवानी विभाग और कोटशेरा कॉलेज के बीच हुआ एमओयू
अनुसंधान और वैज्ञानिक अध्ययन की भी मिलेंगी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजीव गांधी गवर्नमेंट कॉलेज (कोटशेरा) चौड़ा मैदान के विद्यार्थी अब दूसरे विषयों के साथ मधुमक्खी पालन और कौशल-आधारित शिक्षा को भी सिखेंगे। इसके लिए शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश बागवानी विभाग के निदेशक विनय सिंह और कोटशेरा कॉलेज की ओर से जूलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शालिनी चौहान ने समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
यह समझौता कॉलेज के प्राचार्य गोपाल चौहान की ओर से अनुमोदित किया गया। एमओयू का उद्देश्य विद्यार्थियों को मधुमक्खी पालन, कौशल आधारित शिक्षा, अनुसंधान और वैज्ञानिक अध्ययन के उन्नत अवसर उपलब्ध कराना है। दोनों संस्थानों के बीच शोध परियोजनाएं, फैकल्टी विकास कार्यक्रम, प्रशिक्षण मॉड्यूल निर्माण, फील्ड विज़िट, विशेषज्ञ व्याख्यान, स्किल डेवलपमेंट कोर्स और उद्यमिता संबंधी गतिविधियां संयुक्त रूप से संचालित की जाएंगी। समझौता पांच वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा और मूल्यांकन उपरांत इसे नवीनीकृत किया जा सकेगा। इस अवसर पर बागवानी विभाग ने 17 से 21 नवंबर तक कॉलेज के 19 विद्यार्थियों के लिए पांच दिवसीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किया। प्रशिक्षण में विषय विशेषज्ञ डॉ. दलीप सिंह नरगेटा ने मधुमक्खी पालन का इतिहास, प्रजातियों की पहचान, छत्ते का प्रबंधन, रोग कीट नियंत्रण एवं शहद संग्रहण की आधुनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी प्रदान की।
उद्यान विभाग जिला शिमला के विषय विशेषज्ञ डॉ. कुशाल सिंह मेहता ने मधुमक्खी पालन को रोजगार-उन्मुख, आत्मनिर्भरता आधारित और ग्रामीण उद्यमिता का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि शहद, बी वैक्स, पराग, प्रोपोलिस और रॉयल जेली जैसे उत्पाद किसानों और युवाओं के लिए महत्वपूर्ण आय के अवसर प्रदान करते हैं। प्रशिक्षण शिविर के समापन अवसर पर संयुक्त निदेशक डॉ. नीना ठाकुर मौजूद रहीं।
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अनुसंधान और वैज्ञानिक अध्ययन की भी मिलेंगी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजीव गांधी गवर्नमेंट कॉलेज (कोटशेरा) चौड़ा मैदान के विद्यार्थी अब दूसरे विषयों के साथ मधुमक्खी पालन और कौशल-आधारित शिक्षा को भी सिखेंगे। इसके लिए शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश बागवानी विभाग के निदेशक विनय सिंह और कोटशेरा कॉलेज की ओर से जूलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शालिनी चौहान ने समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
यह समझौता कॉलेज के प्राचार्य गोपाल चौहान की ओर से अनुमोदित किया गया। एमओयू का उद्देश्य विद्यार्थियों को मधुमक्खी पालन, कौशल आधारित शिक्षा, अनुसंधान और वैज्ञानिक अध्ययन के उन्नत अवसर उपलब्ध कराना है। दोनों संस्थानों के बीच शोध परियोजनाएं, फैकल्टी विकास कार्यक्रम, प्रशिक्षण मॉड्यूल निर्माण, फील्ड विज़िट, विशेषज्ञ व्याख्यान, स्किल डेवलपमेंट कोर्स और उद्यमिता संबंधी गतिविधियां संयुक्त रूप से संचालित की जाएंगी। समझौता पांच वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा और मूल्यांकन उपरांत इसे नवीनीकृत किया जा सकेगा। इस अवसर पर बागवानी विभाग ने 17 से 21 नवंबर तक कॉलेज के 19 विद्यार्थियों के लिए पांच दिवसीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किया। प्रशिक्षण में विषय विशेषज्ञ डॉ. दलीप सिंह नरगेटा ने मधुमक्खी पालन का इतिहास, प्रजातियों की पहचान, छत्ते का प्रबंधन, रोग कीट नियंत्रण एवं शहद संग्रहण की आधुनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी प्रदान की।
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उद्यान विभाग जिला शिमला के विषय विशेषज्ञ डॉ. कुशाल सिंह मेहता ने मधुमक्खी पालन को रोजगार-उन्मुख, आत्मनिर्भरता आधारित और ग्रामीण उद्यमिता का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि शहद, बी वैक्स, पराग, प्रोपोलिस और रॉयल जेली जैसे उत्पाद किसानों और युवाओं के लिए महत्वपूर्ण आय के अवसर प्रदान करते हैं। प्रशिक्षण शिविर के समापन अवसर पर संयुक्त निदेशक डॉ. नीना ठाकुर मौजूद रहीं।
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