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अफसर बताएं, क्या शिमला एक साल पहले से सेफ है?
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sat, 10 Oct 2015 12:53 PM IST
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क्या शिमला एक साल पहले से सेफ है? शिमला में क्या लोग खुद को ज्यादा सुरक्षित समझते हैं? अगर जनता खुद को सुरक्षित समझती है तो इस बात का आप के पास क्या साक्ष्य हैं? शिमला पुलिस पांच चुनौतियां क्या मानती है? यह सवाल एडीजीपी (कानून व्यवस्था) संजय कुंडू ने शिमला पुलिस की मासिक अपराध समीक्षा बैठक के दौरान जिला शिमला के पुलिस कप्तान से पूछे।
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एसपी डीडब्ल्यू नेगी ने कहा कि पहले की अपेक्षा शिमला में आपराधिक घटनाएं काफी कम हुई हैं। चोरियों और सेंधमारी की वारदातों का ग्राफ काफी नीचे आया है। ट्रैफिक व्यवस्था सुधरी है। एडीजीपी ने कहा कि हर तफ्तीश में जांच अफसर के पास प्लान होना चाहिए। इसके बिना जांच दिशाहीन हो जाती है।
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जोर दिया कि शिमला पुलिस अलग से एक क्राइम एनालिस्ट को बिठाए जो आपराधिक आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करें। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस का काम आसान हो जाएगा। कहा कि अपहरण के मामले बढ़ रहे हैं इन्हें कैसे नियंत्रण में किया जाए इस बारे में चितंन की जरूरत है। उन्होंने डीएसपी ठियोग और डीएसपी रामपुर को शाबाशी भी दी गई।
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एसपी शिमला ने क्राइम का पूरा ब्यौरा स्लाइड शो के जरिये प्रोजेक्टर से बताया। इस दौरान आईजी साउथ रेंज एपी सिद्की भी मौजूद थे। लंबित पड़े मामलों को जल्द सुलझाने के निर्देश जारी किए। आईजी ने शिमला पुलिस की पीठ भी थपथपाई।
एसपी डीडब्ल्यू नेगी के मुताबिक शिमला पुलिस की पांच चुनौतियां
1 शिमला शहर की पांच चुनौतियों में सबसे पहले ट्रैफिक रही है लेकिन काफी हद तक सुधार कर लिया गया है। शहर में 90 फीसदी गाड़ियां सड़क के एक ही किनारे खड़ी हो रही है।
2 दिन में चोरियां दूसरी बड़ी चुनौती है। इसमें लोगों को भी जागरूक होेने की जरूरत है। 10 लाख की कीमत का सामान 5 रुपये के ताले में रखते हैं। कीमती सामान ऐसी जगह रखें जहां चोर अंदाजा न लगा पाए।
3. राष्ट्रीय स्तर के लोगों की शिमला शहर में वीवीआईपी मूवमेंट भी बड़ी चुनौती है इस वजह से आम लोगों को काफी दिक्कतें पेश आती हैं।
4. राजधानी होने की वजह से सभी संवैधानिक पद शिमला में होने से यह भी किसी चुनौती से कम नहीं है। इनकी ओर से भी एक ही समय पर कई मर्तबा तीन कॉल आए जाए तो यह बहुत मुश्किल हो जाता है कि पहले कहां जाएं?
5. पांचवीं चुनौती हिमाचल विश्वविद्यालय है। यहां 1971 से अब तक 300 से ज्यादा एफआईआर हो चुकी हैं। हत्या के मुकदमे भी हैं। लेकिन एक साल से यहां माहौल नियंत्रण में हैं।
चोरी और सेंधमारी करने वालों का क्या कोई गैंग हैं?
एडीजीपी के सवाल पर एएसपी सिटी भजन देव नेगी ने कहा कि साल 2014 में एक ऐसे गैंग का भंडाफोड़ किया था जिसमें करीब 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसी तरह एक नेपाली गैंग को भी पकड़ा है। यह नेपाली मूल के ही लोगों को नशीली चीजें खिलाकर उनका पैसा लूट लेते थे। मर्डर के आरोप में इस गैंग को कुल्लू से पकड़ा गया। एडीजीपी के एक सवाल के जवाब में एएसपी सिटी भजन देव नेगी ने कहा कि शहर में लगे सीसीटीवी की मदद से शहर से गुम होने वाले करीब 75 फीसदी बच्चों को सुरक्षित ढूंढ निकाला है।
रेपिस्ट से गहनता से करो पूछताछ- एडीजीपी ने रेपिस्ट से गहनता से पूछताछ करने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोपी मानसिक बीमार होते हैं। इस बात की तीव्र संभावना होती है कि उन्होंने ऐसे कृत्य को पहले भी अंजाम दिया हो और केस रिपोर्ट न हुआ हो। जिला में रेप के दो मामले अनसुलझे हैं। इसमें पीड़ित पुलिस को सहयोग नहीं कर रही। इस वजह से आरोपियों को नहीं पकड़ा जा सका।
कितने बच्चे हो रहे हैं गुम- एडीजीपी ने कहा कि हर अभिभावक यह चाहता है कि उसका बच्चा सुरक्षित स्कूल पहुंचे और लौट आए। उसके मन में असुरक्षा का भय न हो। उसकी संपत्ति सुरक्षित है इस बात को लेकर वह बेफ्रिक हो जाए। भयमुक्त होकर महिलाएं युवतियां, बच्चे और बुजुर्ग घूम सके। इस दिशा में हमेशा पुलिस को प्रयासरत रहना चाहिए। उन्होंने पूछा कि क्या आप के जिले में बच्चे और युवतियां गुम हो रहे हैं। जवाब मिला हां लेकिन इसके पीछे किसी संगठित गिरोह के हाथ होने की बात से इंकार किया गया।
हत्या के दो केसों में नेपाली वांछित- इस साल हत्या के केवल दो मामलों में आरोपियों की तलाश की जा रही है। इसमें एक मामला जु्ब्बल और दूसरा नारकंडा का है। ये नेपाली हत्या कर फरार हो गए हैं। बाकी कत्ल के मामले सुलझा लिए गए हैं। महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों के मामलों की शिकायतें सबसे अधिक आ रही हैं। थानों में महिला कर्मचारियों के सामने बेहिचक शिकायतें करती हैं।