24 घंटे विद्युत आपूर्ति के लिए ग्रिड का आधुनिकीकरण जरूरी: जयराम
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में लोगों को 24 घंटे विद्युत आपूर्ति और ग्रिड को और अधिक बेहतर बनाने के लिए नई तकनीक अपनाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), राष्ट्रीय कौशल विकास फोरम और जीईटी एंड डी इंडिया लिमिटेड के सहयोग से आयोजित हिमालय ग्रिड के आधुनिकीकरण विषय पर कार्यशाला की अध्यक्षता की।
कहा कि यह संस्था प्रदेश के इंजीनियरों के कौशल विकास में अहम भूमिका निभा रही है। प्रकृति ने प्रदेश को विद्युत ऊर्जा संभावनाओं से नवाजा है। आज तक देश में कुल 45000 मेगावाट क्षमता का दोहन हुआ है। इसमें हिमाचल का योगदान 11000 मेगावाट क्षमता का है। कहा कि सरकार प्रदेश में उपलब्ध ऊर्जा संभावनाओं के दोहन के लिए प्रतिबद्ध है।
राज्य विद्युत निगम लिमिटेड और प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के अलावा जीईटी एंड डी इंडिया लिमिटेड प्रदेश की ग्रिड अधोसंरचना के आधुनिकीकरण को 515 करोड़ की परियोजनाएं कार्यान्वित कर रहे हैं। इन परियोजनाओं में वांगतू, गुम्मा, उरनी, देहां, बरसैन और हाटकोटी में गैस इंसूलेटिड सबस्टेशन की स्थापना प्रमुख हैं।
उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के पूरे होते ही इनसे राज्य में ऊर्जा की बढ़ती मांग पूरी होगी। इसे अंतर्राज्यीय बिजली ट्रांसमिशन परियोजनाओं के माध्यम से राष्ट्रीय ग्रिड से भी जोड़ा जा सकेगा। उन्होंने ट्रांसमिशन नुकसान को कम करने के लिए ट्रांसमिशन लाइनों के स्तरोन्यन पर भी बल दिया।
सरकार सुनिश्चित कर रही है कि आगामी बिजली परियोजनाओं से पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे। सरकार प्रदेश में अक्षय ऊर्जा को प्रोत्साहन दे रही है। जीईटी एंड डी इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सुनील वाधवा ने कहा कि ज्ञान का आदान प्रदान समाज व देश के विकास के लिए महत्त्वपूर्ण है।
राष्ट्रीय कौशल विकास फोरम के अध्यक्ष सुनील ग्रोवर ने कहा कि इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर हिमाचल केंद्र का मुख्य लक्ष्य तकनीकी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना है। हिमाचल केंद्र के अध्यक्ष आरके शर्मा ने बताया कि नौ लाख से अधिक इंजीनियर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) से जुड़े हुए है।
राज्य केंद्र की स्थापना 1988 में हुई थी। इसमें लगभग चार हजार सदस्य हैं। इस अवसर पर बिजली बोर्ड के प्रबंध निदेशक जेपी काल्टा और एसएन कपूर सहित कई अन्य मौजूद रहे।