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शिमला: मॉकड्रिल ः जाखू रोप-वे केबिन में फंसे कर्मी को 40 मिनट में निकाला
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संवाद
शिमला। जाखू रोप-वे की सुरक्षा को लेकर बुधवार को माॅक ड्रिल की गई। इसमें केबिन में फंसे कर्मी को 40 मिनट के भीतर सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया गया।
रोप-वे इंस्पेक्टर राजेंद्र चांदला ने बुधवार को हुई इस मॉकड्रिल का निरीक्षण किया। जाखू रोप-वे के प्रबंधक मदन शर्मा ने बताया कि दोपहर 3:45 बजे जाखू रोपवे के मिडल टावर के पास केबिन रोके गए। इसके बाद रोप-वे की 12 सदस्यीय रेस्क्यू टीम के एक सदस्य को मैकेनिकल इंजीनियरों की देखरेख में टावर पर चढ़ाया गया। टॉवर पर चढ़ने के बाद कर्मी रस्सी की मदद से केबिन तक पहुंचा और केबिन का दरवाजा खोल कर भीतर दाखिल हुआ। इसके बाद केबिन में बैठे दूसरे कर्मी को रेस्क्यू चेयर पर बैठा कर जमीन पर उतारा गया। 40 मिनट के भीतर दोपहर 4:25 बजे रेस्क्यू आपरेशन पूरा कर लिया।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता यांत्रिक और रोप-वे इंस्पेक्टर राजेंद्र चांदला ने बताया कि रोपवे का इस्तेमाल करने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर छह माह बाद मॉक ड्रिल की जाती है। बुधवार को जाखू रोपवे की मॉकड्रिल के दौरान व्यवस्थाएं दुरुस्त पाई गईं। इस मौके पर विभाग के सहायक अभियंता कमल शर्मा भी मौजूद रहे।
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रोपवे के केबिन अटके देख सहम गए लोग
जाखू रोपवे के केबिन मिडल टावर के पास बुधवार दोपहर बाद एकाएक अटके देखकर लोगों को लगा कि रोप-वे में खराबी आ गई है। आधी दूरी पर रुके रोप-वे केबिन की फोटो लोग एक दूसरे को भेजने लगे। बाद में लोगों को पता चला कि यह माॅकड्रिल है। एक घंटे बाद रोप-वे दोबारा सामान्य तरीके से चलने लगे।
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रोप-वे इंस्पेक्टर राजेंद्र चांदला ने बुधवार को हुई इस मॉकड्रिल का निरीक्षण किया। जाखू रोप-वे के प्रबंधक मदन शर्मा ने बताया कि दोपहर 3:45 बजे जाखू रोपवे के मिडल टावर के पास केबिन रोके गए। इसके बाद रोप-वे की 12 सदस्यीय रेस्क्यू टीम के एक सदस्य को मैकेनिकल इंजीनियरों की देखरेख में टावर पर चढ़ाया गया। टॉवर पर चढ़ने के बाद कर्मी रस्सी की मदद से केबिन तक पहुंचा और केबिन का दरवाजा खोल कर भीतर दाखिल हुआ। इसके बाद केबिन में बैठे दूसरे कर्मी को रेस्क्यू चेयर पर बैठा कर जमीन पर उतारा गया। 40 मिनट के भीतर दोपहर 4:25 बजे रेस्क्यू आपरेशन पूरा कर लिया।
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लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता यांत्रिक और रोप-वे इंस्पेक्टर राजेंद्र चांदला ने बताया कि रोपवे का इस्तेमाल करने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर छह माह बाद मॉक ड्रिल की जाती है। बुधवार को जाखू रोपवे की मॉकड्रिल के दौरान व्यवस्थाएं दुरुस्त पाई गईं। इस मौके पर विभाग के सहायक अभियंता कमल शर्मा भी मौजूद रहे।
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रोपवे के केबिन अटके देख सहम गए लोग
जाखू रोपवे के केबिन मिडल टावर के पास बुधवार दोपहर बाद एकाएक अटके देखकर लोगों को लगा कि रोप-वे में खराबी आ गई है। आधी दूरी पर रुके रोप-वे केबिन की फोटो लोग एक दूसरे को भेजने लगे। बाद में लोगों को पता चला कि यह माॅकड्रिल है। एक घंटे बाद रोप-वे दोबारा सामान्य तरीके से चलने लगे।