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Shimla News: एक महीने में मोबाइल हो गया खराब, लौटाने होंगे 26 हजार
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मुकदमा लड़ने का खर्च भी डीलर ही देगा
मोबाइल फोन बार-बार हो रहा था गर्म, चटक गया था कांच
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने फैसला सुनाते हुए मैसर्स हर्ष कम्युनिकेशन हटनाला (चंबा) की अपील खारिज कर दी है। इसके साथ डीलर को 26,300 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।
राज्य आयोग ने जिला उपभोक्ता आयोग चंबा के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें डीलर को सेवा में कमी का दोषी माना गया था। अपील खारिज होने के बाद अब डीलर को मोबाइल की कीमत के 20,300 रुपये ग्राहक को लौटानी होगी। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न के लिए तीन हजार रुपये और मुकदमा लड़ने के एवज में तीन हजार रुपये अलग से देने होंगे। मामला चंबा जिले का है। चंबा मेडिकल कॉलेज में सीनियर स्टेनोग्राफर के पद पर कार्यरत अनुपमा जमवाल ने 21 जनवरी 2023 को चंबा स्थित मैसर्स हर्ष कम्युनिकेशन से 19 हजार रुपये में सैमसंग गैलेक्सी ए-14 5 जी मोबाइल और 1,300 रुपये में एडाप्टर खरीदा था। उपभोक्ता का आरोप था कि डीलर ने उन्हें बिना सील वाला (अनसील्ड) बॉक्स दिया था। विरोध करने के बावजूद उन्हें सीलबंद डिब्बा नहीं दिया।
खरीद के एक महीने के भीतर ही फोन बार-बार गर्म (ओवरहीट) होने लगा। इसके अलावा फोन का ऊपरी कांच कई जगह से चटक गया और कॉल भी कटने तथा डायवर्ट होने लगीं। इसकी शिकायत डीलर से की लेकिन उचित सहायता देने के बजाय टालमटोल की गई। इसके बाद उपभोक्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग, चंबा में शिकायत दर्ज कराई। जिला आयोग ने सुनवाई के बाद डीलर को सेवा में कोताही बरतने का दोषी करार दिया था। इस आदेश के खिलाफ डीलर ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की थी।
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डीलर पेश नहीं कर पाया पुख्ता सबूत
राज्य आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंदर सिंह मेहता और सदस्य योगिता दत्ता की खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि डीलर इस बात का कोई ठोस सबूत या निरीक्षण रिपोर्ट पेश नहीं कर पाया कि उसने उपभोक्ता को सीलबंद फोन दिया था या उपभोक्ता ने खुद फोन का दुरुपयोग किया था। आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि फोन वारंटी अवधि के भीतर था और ऐसे में डीलर का दायित्व था कि वह उपभोक्ता की शिकायत पर उचित सहायता प्रदान करता। डीलर यह साबित करने में भी असफल रहा कि उपभोक्ता ने फोन ठीक करवाने के लिए उसे सौंपा नहीं था। सैमसंग इंडिया (निर्माता) ने भी स्पष्ट किया था कि उक्त विक्रेता उनका अधिकृत डीलर नहीं है। इन तमाम तथ्यों के आधार पर राज्य आयोग ने जिला आयोग के फैसले को सही ठहराते हुए डीलर की अपील खारिज कर दी।
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मोबाइल फोन बार-बार हो रहा था गर्म, चटक गया था कांच
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने फैसला सुनाते हुए मैसर्स हर्ष कम्युनिकेशन हटनाला (चंबा) की अपील खारिज कर दी है। इसके साथ डीलर को 26,300 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।
राज्य आयोग ने जिला उपभोक्ता आयोग चंबा के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें डीलर को सेवा में कमी का दोषी माना गया था। अपील खारिज होने के बाद अब डीलर को मोबाइल की कीमत के 20,300 रुपये ग्राहक को लौटानी होगी। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न के लिए तीन हजार रुपये और मुकदमा लड़ने के एवज में तीन हजार रुपये अलग से देने होंगे। मामला चंबा जिले का है। चंबा मेडिकल कॉलेज में सीनियर स्टेनोग्राफर के पद पर कार्यरत अनुपमा जमवाल ने 21 जनवरी 2023 को चंबा स्थित मैसर्स हर्ष कम्युनिकेशन से 19 हजार रुपये में सैमसंग गैलेक्सी ए-14 5 जी मोबाइल और 1,300 रुपये में एडाप्टर खरीदा था। उपभोक्ता का आरोप था कि डीलर ने उन्हें बिना सील वाला (अनसील्ड) बॉक्स दिया था। विरोध करने के बावजूद उन्हें सीलबंद डिब्बा नहीं दिया।
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खरीद के एक महीने के भीतर ही फोन बार-बार गर्म (ओवरहीट) होने लगा। इसके अलावा फोन का ऊपरी कांच कई जगह से चटक गया और कॉल भी कटने तथा डायवर्ट होने लगीं। इसकी शिकायत डीलर से की लेकिन उचित सहायता देने के बजाय टालमटोल की गई। इसके बाद उपभोक्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग, चंबा में शिकायत दर्ज कराई। जिला आयोग ने सुनवाई के बाद डीलर को सेवा में कोताही बरतने का दोषी करार दिया था। इस आदेश के खिलाफ डीलर ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की थी।
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डीलर पेश नहीं कर पाया पुख्ता सबूत
राज्य आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंदर सिंह मेहता और सदस्य योगिता दत्ता की खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि डीलर इस बात का कोई ठोस सबूत या निरीक्षण रिपोर्ट पेश नहीं कर पाया कि उसने उपभोक्ता को सीलबंद फोन दिया था या उपभोक्ता ने खुद फोन का दुरुपयोग किया था। आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि फोन वारंटी अवधि के भीतर था और ऐसे में डीलर का दायित्व था कि वह उपभोक्ता की शिकायत पर उचित सहायता प्रदान करता। डीलर यह साबित करने में भी असफल रहा कि उपभोक्ता ने फोन ठीक करवाने के लिए उसे सौंपा नहीं था। सैमसंग इंडिया (निर्माता) ने भी स्पष्ट किया था कि उक्त विक्रेता उनका अधिकृत डीलर नहीं है। इन तमाम तथ्यों के आधार पर राज्य आयोग ने जिला आयोग के फैसले को सही ठहराते हुए डीलर की अपील खारिज कर दी।