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शिमला में आशियाना बनाने के लिए सक्रिय हुए माननीय
Mon, 09 Aug 2021 01:34 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 09 Aug 2021 01:34 PM IST
सार
माननीय को आशंका है कि अगले चुनाव में कहीं विधायकी हाथ से गई तो पहाड़ों की रानी शिमला में सरकारी जमीन पर आशियाना बनाने का उनका ख्वाब टूट जाएगा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बेघरों को घरों का सपना दिखाकर चुनावी नैया पार लगाने वाले माननीय विधायक हिल्स क्वीन शिमला में अपना आशियाना बनाने का ख्वाब पाले बैठे हैं। इस ख्वाब को साकार करने के लिए उन्हें राजधानी शिमला में सरकारी जमीन चाहिए। अगले वर्ष विधानसभा चुनाव नजदीक देख माननीय अब इस मामले में सक्रिय हो गए हैं। एमएलएल हाउसिंग सोसायटी के नाम पर सरकारी जमीन अलॉट कराने के लिए विभिन्न स्तर पर माननीयों की ओर से लगातार दबाव बढ़ाया जा रहा है।
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नियमों में ऐसा कोई प्रावधान न होने का पेच भांपकर अब माननीय 99 साल की लीज पर अपनी सोसायटी के लिए सरकारी जमीन मांग रहे है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार सोसायटी के नाम पर लीज भी नहीं हो सकती। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सोसायटी के नाम जमीन सुनिश्चित कराने की जल्दबाजी को समझा जा सकता है। माननीय को आशंका है कि अगले चुनाव में कहीं विधायकी हाथ से गई तो पहाड़ों की रानी शिमला में सरकारी जमीन पर आशियाना बनाने का उनका ख्वाब टूट जाएगा। इसलिए, माननीयों गुपचुप दौड़भाग कर शिमला में दो जगह जमीन भी पसंद कर ली है।
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शोघी और तारादेवी के समीप 49 बीघा का एक बड़ा भूखंड है। यह जमीन दस्तावेज में देश के राष्ट्रपति के नाम पर है और मौजूदा समय में इसका कब्जा पथ परिवहन निगम के पास है। दूसरी जगह का चयन जाठियादेवी में किया गया है। करीब 100 बीघा की यह जमीन दस्तावेजों में उद्योग विभाग के नाम है। पुख्ता जानकारी के अनुसार माननीयों की एमएलए हाउसिंग सोसायटी के आग्रह पर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष विपिन परमार भी इस बाबत संभावनाओं को टटोल चुके हैं। स्पीकर परमार की अध्यक्षता में हो चुकी उच्च स्तरीय बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई। बैठक में सचिव राजस्व , उपायुक्त शिमला और एसडीएम ग्रामीण आदि आला अधिकारी भी मौजूद रहे।
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पता चला है कि सचिव राजस्व ने वस्तुस्थिति से विधानसभा अध्यक्ष को अवगत कराया। अधिकारियों के अनुसार सोसायटी के नाम सरकारी जमीन लीज पर देने का नियमों में प्रावधान नहीं है। तारादेवी के समीप जो जमीन है उसे लेने के लिए राष्ट्रपति भवन की मंजूरी लेनी होगी। जबकि, जाठिया देवी में टाउनशिप पहले से ही प्रस्तावित है। माननीयों के लिए अगर नियमों में संशोधन करना हो तो मामला कैबिनेट में ले जाना पड़ेगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद ही माननीयों को लीज पर आशियाना बनाने के लिए जमीन मिल सकती है। उधर, इस बारे में विधानसभा अध्यक्ष विपिन परमार ने कहा कि मामले में अभी केवल चर्चा हुई है। कोई भी फैसला नहीं लिया गया है।